
Ranchi : हेमंत सोरेन सरकार के दो साल तकरीबन पूरे हो गए. इसे लेकर प्रदेश भाजपा ने रविवार को सरकार को उसके परफॉर्मेंश को लेकर घेरा. प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी सहित अन्य नेताओं ने सरकार के दो साल को झूठ और लूट का साल बताया. इन दो सालों में राज्य के बेहाल होने की बात कही. इस मौके पर आरोप पत्र भी जारी किया.
दीपक प्रकाश ने कहा कि हेमंत सरकार के दो साल बेहद तकलीफदेह और कष्टदायक रहे हैं. साथ ही यह विश्वासघाती सरकार भी है. किसानों, महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों से किए वादे धरातल पर नहीं उतारे. जनता डर व भय के माहौल में जी रही. 3200 से अधिक बलात्कार, 3486 हत्या, 224 डकैती और 1271 लूट के मामले इस दौरान सामने आ चुके हैं. राज्य में लॉ एंड ऑर्डर फेल है तथा लोकतंत्र खतरे में है.
इसे भी पढ़ें :मुंगेर में कोरोना विस्फोट, एक साथ मिले 11 मरीज, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप
केंद्र से मिली मदद का उपयोग करने में फेल
दीपक प्रकाश ने कहा कि 2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित किए जाने के बावजूद इस सरकार ने युवाओं को छला. नियुक्ति देने वाला नहीं, नौकरी छीनने वाला यह साल साबित हुआ है. नए विज्ञापन निकले नहीं, बल्कि पूर्व के विज्ञापनों को भी रद्द कर दिया. यहां तक कि कुछ की परीक्षाएं भी हो चुकी थीं.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से कोरोना काल में भरपूर मदद राज्य को मिली पर प्राप्त राशि को खर्च कर पाने में सरकार निकम्मी साबित हुई. राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में भी सरकार उदासीन है. कोरोना काल में जनता को भगवान भरोसे इस सरकार ने छोड़ दिया. टीकाकरण को लेकर सत्ता पक्ष की ओर से ही भ्रम फैलाए गए. दवाईयों की कालाबाजारी की सीआईडी जांच हो रही है. संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना सरकार की आदत बन गयी है. प्रदेश भाजपा लगातार सशक्त विपक्ष के तौर पर आवाज उठाती रहेगी.
इसे भी पढ़ें :बक्सर में पत्नी को दरोगा की परीक्षा दिलाने ले जा रहे पति की सड़क हादसे में मौत, पत्नी गंभीर
बाबूलाल ने भी किया वार
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सत्ताधारी दल लगातार संघीय ढांचों पर प्रहार कर रहे हैं. रेल, सेल, कोल इंडिया और एनटीपीसी जैसे सरकारी उपक्रमों के बारे में असंसदीय बयानों से प्रहार किया जा रहा. संवैधानिक संस्थाओं पर निरंतर हमले हो रहे हैं. संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत आचर किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार की उदासीनता के कारण महिला आयोग, सूचना आयोग, बाल संरक्षण आयोग समेत अन्य आयोगों का गठन नहीं किया जा सका है. लोकायुक्त का भी पद लंबे समय से खाली है. चुनाव आयोग के निर्देश के बावजूद देवघर डीसी को नहीं हटाया जाना संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सरकार के अमर्यादित आचरण को दिखाता है.
इसे भी पढ़ें :UP Assembly Election 2022 : सपा के प्रचार वाहन से बज रहा था ‘आएंगे फिर योगी…’ का गीत, VIDEO हुआ वायरल




