
- सरना कोड पर आदिवासी सेना के अध्यक्ष शिवा कच्छप ने न्यूज विंग के साथ शेयर की अपने ‘मन की बात’
Praveen Munda
Ranchi : सरना कोड को लेकर झारखंड सहित देश के कई हिस्सों में निवास करनेवाले आदिवासी समुदाय के लोग आंदोलनरत हैं. आदिवासी सेना के अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि 20 अक्टूबर की महारैली में हमलोगों ने दिखा दिया है कि हमारा आंदोलन कितना सशक्त है. सरना समुदाय जनगणना प्रपत्र में अपने लिए अलग कोड की मांग कर रहा है. इसको अलग-अलग नजरिये से देखा जा रहा है. कोई कहता है कि सरना कोड नहीं मिल सकता है, क्योंकि सरना नाम पर पूरे देश के आदिवासी सहमत नहीं हो सकते हैं. यह भी कहा जा रहा है कि देशभर से अलग-अलग नामों से कोड की मांग हो रही है, इसलिए कोड नहीं मिल सकता.
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और कौन समुदाय कोड की लड़ाई लड़ रहा है
शिवा कच्छप ने कहा कि यह सही है कि सरना नाम पूरे देश के आदिवासियों की पहचान नहीं बताता, लेकिन यह भी देखना होगा कि झारखंड से लेकर दिल्ली तक लगातार अंदोलन करनेवाले कौन लोग हैं. वे कौन हैं, जो अलग कोड के लिए लड़ रहे हैं? झारखंड के रांची में रैली निकालनेवाले कौन हैं? राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रैली निकालनेवाले, सड़क जाम करनेवाले कौन लोग हैं? दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना देनेवाले कौन हैं? प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति भवन में लगातार पत्र भेजकर कोड की गुहार लगानेवाले कौन लोग हैं? वे निश्चय ही सरना समुदाय के ही लोग हैं, जो लाखों की संख्या में हैं और अवाज बुलंद कर रहे हैं. पूरे देश में और कौन आदिवासी समुदाय हैं, जो कोड के लिए इतना संघर्ष कर रहे हैं?
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मुख्यमंत्री ने समझी हमारी बात
शिवा कच्छप ने कहा, “मेरी समझ में यह तर्क बेकार है कि किसी और समुदाय को यह नाम पसंद आयेगा या नहीं, झारखंड और देश भर में फैले सरना समुदाय के लोग अपने हक के लिए लड़ रहे हैं और हमें इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है. हम 2021 की जनगणना में अपने लिए अलग कोड चाहते हैं. अगर वह नहीं मिलेगा, तो हम लगातार संघर्ष करने के लिए तैयार हैं. हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक कोड नहीं मिल जाता.” शिवा कहते हैं, “यह अच्छी बात है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हमारी मांगों को समझा है. उनका आश्वासन है कि जल्दी ही विधानसभा में सरना धर्म कोड से संबंधित प्रस्ताव पारित कराकर केंद्र को भेजा जायेगा.”
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दोहरी मार के शिकार हैं झारखंड के आदिवासी
शिवा कहते हैं, “अभी हालात ये हैं कि झारखंड के आदिवासी दोहरी मार के शिकार हैं. कभी उन्हें सरना सनातन के नाम पर हिंदू धर्म के साथ, तो कभी नस्लीय दावों के साथ ईसाई समुदाय के साथ जोड़ा जाता है. जनगणना में झारखंड के आदिवासियों की सही संख्या नहीं आ रही है और इसका खामियाजा हमें राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में भुगतना पड़ रहा है. हमारी मांग सरना कोड है और यह मिलने तक हम नहीं रुकेंगे.”
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