
Saurav Singh
Ranchi/Chatra: विस्थापन समिति और कोल फील्ड लोडर एसोसिएशन के नाम पर पिपरवार थाना क्षेत्र स्थित अशोका, पिपरवार एवं पुरनाडीह कोल परियोजना में टीपीसी उग्रवादियों के द्वारा वसूली का खेल चल रहा है.
टीपीसी के कमांडर ब्रजेश गंझू, आक्रमण और अन्य टीपीसी उग्रवादियों के संरक्षण में पिपरवार थाना क्षेत्र स्थित अशोका, पिपरवार एवं पुरनाडीह कोल परियोजना में विस्थापित ग्रामीण संचालन समिति का गठन किया गया है.
इसके नाम पर कोल व्यवसायी, डीओ होल्डर व ट्रांसपोर्टर से 150 रुपये प्रति टन और कोयला लिफ्टर से 200 से 300 रुपया प्रति ट्रक की वसूली की जा रही है.
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इस बात की पुष्टि 6 अक्टूबर को हो गयी जब टीपीसी उग्रवादियों के द्वारा कोल लिफ्टर साबिर अहमद की लेवी नहीं देने के चलते गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी.
विस्थापित ग्रामीण संचालन समिति का किया गया है गठन
टीपीसी के कमांडर ब्रजेश गंझू, आक्रमण और अन्य टीपीसी उग्रवादियों के संरक्षण में विस्थापित ग्रामीण संचालन समिति का किया गया है.
बेंती, विजन टोला, न्यू मंगरदाहा, सरैया ठेठांगी, सरैया के कुछ व्यक्तियों को अशोक कोल परियोजना में, ग्राम कल्याणपुर, बहेरा, राजधर के कुछ लोगों को पिपरवार कोल परियोजना में और ग्राम पुरनाडीह, जामडीह, एकराडीहगड़ा व कठौन के कुछ लोगों को पुरनाडीह कोल परियोजना के संचालन समिति में शामिल किया गया है.
कोल व्यवसायी, डीओ होल्डर और ट्रांसपोर्टर आदि से टीपीसी उग्रवादी संगठन का भय दिखा कर लेवी की वसूली की जा रही है.
इन बड़े टीपीसी उग्रवादियों के संरक्षण में चलता है लेवी वसूली का खेल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिपरवार एवं पुरनाडीह कोल परियोजना में टीपीसी के ब्रजेश गंझू, भीखन गंझू, आक्रमण, आदेश गंझू, आजाद, सौरभ और मुकेश के संरक्षण में लेवी की वसूली का खेल चलता है.
बबलू सागर मुंडा, जानकी महतो, क्यूम अंसारी, मुन्ना मियां, असलम, प्रकाश मुंडा, विनोद महतो, विजय महतो, गब्बर महतो, बालेश्वर उरांव, दिनेश भगत, कैलाश करमाली, शिव प्रकाश प्रजापति, दर्शन गंझू, अवध ठाकुर, तालेश्वर उरांव, देवनारायण गंझू, प्रेम सागर मुंडा, रतन महतो, वासुदेव, विकास, नागेश्वर गंझू, अर्जुन गंझू, धनेश्वर गंझू, सुरेश गंझू, विजन, देवलाल गंझू, सुखी गंझू, फागू गंझू आदि के नाम पर वसूली की जाती है.
जिसमें एजाजुल, विशुन देव, प्रेम गंझू, सुरेंद्र राम, जुगेश, अनिल चौबे माइनिंग सरदार सीसीएल के द्वारा टीपीसी उग्रवादियों एवं संचालन समिति के बीच तालमेल स्थापित कर टीपीसी उग्रवादी संगठन के निर्देशों को संचालन समिति के सदस्यों तक पहुंचाया जाता है.
वसूली का बड़ा हिस्सा टीपीसी के उग्रवादियों को पहुंचाया जाता है. हालांकि संचालन समिति के सदस्य भी रुपये आपस में बांट लेते हैं.
टेरर फंडिंग मामले में 77 लोगों के खिलाफ हुई है प्राथमिकी दर्ज फिर भी नहीं रुक रही वसूली
टेरर फंडिंग मामले में 77 लोगों के खिलाफ पिपरवार थाना में नामजद प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इन 77 लोगों में अधिकतर लोग क्षेत्र के विस्थापित परिवार से जुड़े हैं या फिर विस्थापित नेता हैं.
इन लोगों पर उग्रवादी गतिविधि में शामिल रहने या उग्रवादियों को फंड मुहैया कराने का आरोप लगा है. इसके बावजूद भी कोल परियोजाओं में टीपीसी उग्रवादियों के द्वारा लेवी वसूली पर रोक नहीं लग पा रही है.
पिपरवार थाना क्षेत्र स्थित संचालित पिपरवार कोल परियोजना अशोका प्रोजेक्ट काटा कल्याणपुर काटा और पुरनाडीह कोल परियोजना में कोल व्यवसायों व डीओ होल्डर्स को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीपीसी के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता, आक्रमण उर्फ रविंद्र गंझू, भीखन गंझू, के संरक्षण में विस्थापित ग्रामीण विजन संचालन समिति का गठन किया गया.
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लिफ्टर साबिर अहमद की हत्या में शामिल विनय खलखो वसूलता है लेवी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोल लिफ्टर साबिर अहमद की हत्या की साजिश रचनेवाले विनय खलखो संचालन समिति के नाम पर लेवी की वसूली करता है.
बताया जा रहा है कि कांटा घर में वाहनों का कांटा होने के बाद जब लोडिंग के लिए वाहनों को भेजा जाता है, तो उसके पहले विस्थापित ग्रामीण संचालन समिति या कोल फील्ड लोडर एसोसिएशन को एक हजार रुपये वाहन मालिक देता है.
रुपये नहीं देने पर कोयला लोड नहीं होने दिया जाता है. बता दें कि कोल लिफ्टर साबिर अहमद की हत्या में विनय खलको पर भी एफआइआर दर्ज कराया गया है.
विनय खलको ने साबिर अहमद से कहा था कि अगर काम करना है तो लेवी तो देना पड़ेगा नहीं तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा.
पुलिस को चुनौती दे रही है टीपीसी
मिली जानकारी के अनुसार भाकपा माओवादियों से निपटने के लिए कतिपय पुलिस अफसरों ने भाकपा माओवादियों से अलग हुए नक्सलियों को सहायता देकर टीपीसी नामक उग्रवादी संगठन खड़ा करने में मदद की. अब यह संगठन भी पीएलएफआइ के ढर्रे पर काम कर रही है.
वह जम कर लेवी वसूली कर रही है. चतरा जिले में टीपीसी की उत्पत्ति 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुई थी. भाकपा माओवादी से अलग हुए ब्रजेश, मुकेश, कोहराम और आक्रमण ने इसका गठन किया था.
दस वर्षो के दौरान संगठन ने दर्जनों घटनाओं को अंजाम दिया. 27 मार्च 2013 को कुंदा थाना क्षेत्र के लकड़बंधा गांव में भाकपा माओवादी के दस उग्रवादियों को मौत के घाट उतार टीपीसी ने अपनी मजबूती का अहसास कराया था.
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