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#JSLPS की नियुक्ति प्रक्रिया में नहीं है पारदर्शिता, मनमाने तरीके से होती है नियुक्ति

Ranchi: झारखंड राज्य आजीविका मिशन (जेएसएलपीएस) में विभिन्न पदों पर लगातार नियुक्तियां होती हैं. पर अधिकतर नियुक्तियों में पारदर्शिता का अभाव होता है. आजीविका मिशन में नियुक्ति की प्रक्रिया में तीन चरण होते हैं.

पहले चरण में परीक्षा आयोजित की जाती है. उसके बाद उसमें पास अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी होती है. तीसरे चरण में इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद ज्वाइनिंग दी जाती है.

अधिकतर मामलों में अभ्यर्थिंयों का कहना होता है कि जेएसएलपीएस किस आधार पर रिजल्ट जारी करता है और इसका आधार क्या है समझ ही नहीं आता. तीन बार फॉर्म भर चुके चतरा के एक अभ्यर्थी का कहना है कि मैंने अधिकतर मामलों में जानना चाहा कि मेरा सलेक्शन क्यों नहीं हुआ, और किस आधार पर छांटा गया, पर कोई जवाब नहीं मिला.

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जेएसएलपीएस के अधिकारियों का कहना है कि नियुक्ति के दौरान हम मेरिट का ख्याल रखते हैं और ऐसे लोगों का चयन करते हैं जिसे गांव और ग्रामीण परिवेश की समझ हो. दूसरी तरफ अभ्यर्थियों का कहना है कि जान पहचान के ही लोगों को काम पर रखा जाता है, परीक्षा और अन्य औपचारिकता महज दिखावे के लिए ही होती है.

जेएसएलपीएस में किसी भी तरह की कोई पारदर्शिता नहीं है. जेएसएलपीएस जब भी नियुक्ति करता है तो परीक्षा के मार्क्स और चयन का कारण स्पष्ट नहीं करता. अधिकतर मामलों में नियुक्तियां मनमानी ही होती हैं.

हर दूसरे महीने निकलती है नियुक्ति

झारखंड राज्य आजीविका मिशन में लगभग हर दूसरे या तीसरे महीने विभिन्न पदों के लिए आवेदन मंगाये जाते हैं. परीक्षाएं भी आयोजित की जाती हैं. चयन में ब्लॉक, अनुमंडल, जिला और राज्यस्तरीय सभी नियुक्तियां शामिल हैं. जेएसएलपीएस में नियुक्ति लोगों को गांव के विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की रिपोर्ट तक तैयार करनी होती है.

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जेएसएलपीएस में यंग प्रोफेशनल के लिए राज्य के बाहर के इलाकों के बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटियों में कैंपस के माध्यम से चयन करती है, पर जेएसएलपीएस राज्य के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में कैंपस प्लेसमेंट के लिए नहीं पहुंचता है.

ग्रामीण विकास विभाग के दूसरे विंग में भी नियुक्ति का हाल खस्ता

ग्रामीण विकास विभाग के अन्य विंग जैसे स्टेट इंस्टीच्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट में भी कांट्रेक्ट स्तर पर नियुक्ति करायी जाती है. पर वहां भी हुई नियुक्तियों का हाल लगभग वैसा ही है जैसा जेएसएलपीएस का है. सर्ड में भी नियुक्तियां किस आधार पर की गयी हैं, पता नहीं चल पाता, कभी-कभी तो यह भी पता नहीं लगता कि नियुक्ति की प्रक्रिया कब और कैसे की गयी.

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