Khas-Khabar

डोभा का गंदा पानी पीने को मजबूर ग्रामीण, उसके लिए भी लग रही कतार 

Dumka : स्वच्छता और स्वास्थ्य के नाम पर भले ही जो दावे किये जाएं पर दुमका के सुदूर आदिवासी गांवों में शौचालय के इस्तेमाल के लिए तो दूर, पीने के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं है.

देखें वीडियो-

मसलिया प्रखंड के हडराईडीह पंचायत अंतर्गत भीलाडीह गांव के लोग डाडी व डोभा के गंदे पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं. ग्रामीण प्रधानमंत्री से सवाल कर रहे हैं कि जब पीने को पानी नहीं है तो शौचालय का इस्तेमाल कैसे करें.

इसे भी पढ़ें – राज्यसभा में बोले गुलाम नबी आजाद, हिंसा और मॉब लिंचिंग का कारखाना बन गया है झारखंड

एक घंटे में एक बाल्टी पानी देता है चापाकल

गांव में दो टोला (सहारडीह टोला और भीलाडीह टोला) हैं जहां 90 परिवार रहते हैं. गांव की कुल जनसंख्या लगभग 600 है. यहां कुल पांच चापाकल है, जिसमें से सिर्फ एक  ठीक है, तीन चापाकल करीब एक घंटे में एक बाल्टी पानी देते हैं. एक पूरी तरह खराब है. गांव में दो कुए हैं जो पूरी तरह सूख गये हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि जल समस्या का सुध लेने वाला कोई नही है. जनप्रतिनिधियो से शिकायत करने के बाद भी यहां का न तो चापाकल की मरम्मत की जाती है और न ही जल समस्या का समाधान किया जाता है.

पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नही होने के कारण मनुष्य के साथ-साथ गाय, बैल, बकरी आदि को भी पानी की समस्या से गुजरना पड़ रहा है.

पानी की व्यवस्था में बीत रहा महिलाओं का पूरा समय

ग्रामीणों कहना है कि महिलाओं का पूरा समय पानी व्यवस्था करने में ही बर्बाद हो जाता है. खराब चापाकल और डोभा के पास लाइन लगाकर रखना पड़ता है. पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने के कारण ग्रामीण प्रतिदिन नहा भी नही सकते.

गांव की महिला मनेका देवी कहती हैं, ‘मोदी जी ने शौचालय तो बना  दिया है लेकिन पानी के अभाव में उसका कोई भी ग्रामीण उपयोग नही करता है. आखिर उपयोग करे भी तो कैसे?’

मनेका ने कहा कि ग्रामीण पानी के लिय रात 10/11 बजा देते है और अहले सुबह से ही पानी कीं व्यवस्था में लग जाते हैं. पानी का व्यवस्था करने के लिए दूसरे गांवों में बी जाना पड़ता है.

इसे भी पढ़ें – डेटिंग साइट के जरिये फंसाकर सेना के अधिकारी से 33 लाख ठगे, दो साइबर अपराधी गिरफ्तार

पानी बना ग्रामीणों के बीच कलह का कारण

संजय मुर्मू कहते हैं, ‘पानी की समस्या के कारण गांव में अक्सर ग्रामीणों में नोक-झोंक होती रहती है. भीलाडीह में पीने के पानी की किल्लत को लेकर जनप्रतिनिधि, विभाग और सरकार के प्रति बहुत नाराजगी है. हमारी मांग है कि गांव के दोनों टोलों में दो-दो नया डीप बोरिंग किया जाय और पानी की सोलर टंकी लगायी जाये. ’

वोट बहिष्कार करेंगे :  ग्रामीण

ग्रामीणों कहते हैं कि हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में पीना के पानी की समस्या के समाधान का वादा भाजपा नेता ने किया था. राज्य सरकार ने भी कोई पहल नहीं की. ऐसे में अब मजबूर होकर ग्रामीण वोट का बहष्किार करेंगे. ग्रामीणों का नारा है-पानी नही तो वोट नही, विकास नही तो वोट नहीं.

गांव में जो चपाकाल खराब पड़े हैं

(1) सहारडीह टोला के अनिल मिर्था के घर का चापाकल करीब पांच वर्ष से खराब है.

(2) सहारडीह टोला के पंजू पुजहर के घर के सामने का चापाकल करीब दो वर्ष से करीब एक घंटा के अंतराल में एक बाल्टी पानी देता है.

(3)सहारडीह टोला के देवीसोल मुर्मू के घर के सामने का चापाकल भी करीब एक घंटा के अंतराल में एक बाल्टी पानी देता है.

(4)भीलाडीह टोला के संचरवा पुजहर के घर के सामने का चापाकल भी करीब एक घंटा के अंतराल में एक बाल्टी पानी देता है.

इसे भी पढ़ें – स्वच्छ, सुंदर शौचालय प्रतियोगिता में झारखंड पूरे देश में अव्वल, टॉप टेन में झारखंड के 5 जिले

Related Articles

Back to top button