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नक्सलियों के हैंडलर ओवरग्राउंड वर्कर का नेटवर्क होगा ध्वस्त, हाल के दिनों में एनआईए ने कई जगहों पर की है छापेमारी

Ranchi: झारखंड में सुरक्षाबलों के लगातार बढ़ते दबाव के कारण नक्सलियों की संख्या बेशक घट रही है. मगर नक्सलियों के ओवरग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) की संख्या सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. हालांकि नक्सलियों के हैंडलर माने जाने वाले ओवरग्राउंड वर्कर का नेटवर्क ध्वस्त करने में एनआईए जुट गई है. हाल के दिनों में माओवादी की प्लानिंग के खात्मे के लिये कई जगहों पर छापेमारी की है. 20 जून को नक्सलियों के फरार कमांडरों, ओवर ग्राउंड वर्कर्स समेत अन्य सदस्यों से जुड़े गिरिडीह और बोकारो जिलों के 19 ठिकानों पर छापेमारी में आपत्तिजनक दस्तावेज, मोबाइल फोन समेत अन्य सामान एनआईए ने जब्त किया.

वही 27 जून को भी चाईबासा जिले में माओवादी संगठन के विभिन्न संदिग्धों और ओजीडब्ल्यू से जुड़े ठिकाने पर रेड में मोबाइल फोन, दस्तावेज और पत्र सहित कई आपत्तिजनक सामान एनआईए ने जब्त किया है. एनआईए जांच में पता चला है कि सड़क निर्माण कार्य में माओवादी बड़ी मात्रा में लेवी वसूल रहे है. यह वसूली ओजीडब्ल्यू की मदद से किया जा रहा है. माओवादी फिर से सक्रिय होने की कोशिश कर रहा है. माओवादी के नेता, कैडर और ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) संगठन की कमजोर होती साख को फिर से पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं.

मुखबिरी से लेकर हथियार पैसों के बंदोबस्त समेत कई जिम्मेदारी

ओवरग्राउंड वर्कर को सामान्य भाषा में ओजीडब्लयू कहा जाता है. यह नक्सलियों के लिए मुखबिरी का ही काम नहीं करते, बल्कि उनके लिए सुरक्षित ठिकानों का बंदोबस्त करने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, हथियारों व पैसों का बंदोबस्त करने समेत अन्य जिम्मेदारियों को भी निभाते हैं. यह सुरक्षाबलों की गतिविधियों की खबर भी नक्सलियों तक पहुंचाते हैं. ओवरग्राउंड वर्कर नक्सली संगठनों के लिए स्थानीय युवकों की भर्ती में भी अहम भूमिका निभाते हैं.

ओजीडब्लयू कभी आसानी से हाथ नहीं आते. इनकी गतिविधियां तभी नजर आती हैं, जब किसी जगह यह अपना कोई निशान छोड़ जाएं, अन्यथा नहीं. इनके खिलाफ अकसर कोई पक्का सबूत नहीं मिलता. कई बार ऐसे ओवरग्राउंड वर्कर पकड़े गए हैं जो राजनीतिक, सामाजिक कार्य से जुड़े रहे हैं. प्रत्यक्ष रुप से किसी तरह के गंभीर अपराध में लिप्त न होने के कारण कई बार यह आसानी से बच निकलते हैं. ओवरग्राउंड वर्कर नकसली संगठनों के लिए एक रीड़ की हड्डी जैसा होता है. कई बार ओवरग्राउंड वर्कर ही नक्सलियों का हैंडलर होता है.

फरार नक्सलियों में एनआईए घोषित कर रखा है इनाम

झारखंड में नक्सल मामले की जांच कर रही है एनआईए डेढ़ दर्जन के करीब फरार नक्सलियों पर इनाम घोषित कर रखा है. टेरर फंडिंग समेत अन्य मामलों की जांच कर रही एनआइए फरार चल रहे नक्सली की तलाश में है. इनमें पतिराम मांझी उर्फ अनल, बिरजू गंझू उर्फ छोटू खरवार, आक्रमण उर्फ रवींद्र गंझू, अजय महतो उर्फ मोछल, चंचल उर्फ बिरसेन, कृष्णा उर्फ अविनाश उर्फ सौरभ, सौरभ उर्फ मारकुस बाबा उर्फ वीरेंद्र यादव, रवींद्र गंझू उर्फ मुकेश गंझू समेत करीब डेढ़ दर्जन फरार नक्सलियों पर राज्य सरकार के अलावे एनआईए ने इनाम घोषित किया है.

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