
Akshay/Chandi Dutt
Ranchi: 2019 के दिसंबर में जब हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनी तो उस वक्त सुखदेव सिंह सूबे के गृह सचिव थे. कुछ महीनों के बाद उन्हें जब राज्य का नया मुख्य सचिव बना दिया गया तो कुछ दिनों तक यह पद खाली रहा. चूंकि यह विभाग काफी महत्वपूर्ण था तो इस विभाग का जिम्मा एल. ख्यांगते को दिया गया लेकिन सरकार की ओर से नई अधिसूचना जारी हुई और गृह विभाग का प्रभार आईएएस राजीव अरुण एक्का को दे दिया गया. राजीव अरुण एक्का जब पॉवर ब्रोकर के आवास से सरकारी कार्य निपटाते हुए वायरल एक वीडियो में पाए गए तो तत्काल हेमंत सरकार ने उनसे गृह विभाग लेते हुए यह कुर्सी मिली वंदना डाडेल को सौंप दी. फिलहाल यह जिम्मा अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी अविनाश कुमार के पास है. इन चार आईएएस अधिकारियों में सुखदेव सिंह को छोड़ बाकी सभी अधिकारियों का विवादों से खूब नाता रहा है. यहां यह जानना जरूरी है कि इस विभाग के मंत्री शुरू से ही सूबे के मुखिया खुद हेमंत सोरेन रहे हैं. ऐसे में बार-बार गृह सचिव पर सवाल उठना निश्चित तौर पर झारखंड की पुलिसिंग पर सवाल उठाता है.
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राजीव अरुण एक्का
राजीव अरुण एक्का सिर्फ गृह सचिव ही नहीं रहे बल्कि वो सीएम हेमंत सोरेन के काफी करीबियों में से एक माने जाते रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव का पद भी संभाला है. सीएम के हर कार्यक्रम में वो साथ नजर आते थे. लेकिन अचानक से उनका एक विवादित वीडियो जारी होता है. उनपर आरोप लगा कि वो ईडी के रडार पर रहने वाले पॉवर ब्रोकर विशाल चौधरी के अशोक नगर स्थित आवास पर अपने कार्यालय का कामकाज निबटाते थे. वीडियो में कुछ पैसों के लेन-देन की बात भी सुनाई देती है. हालांकि यह किसकी है.यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. आरोप लगने के बाद ईडी की तरफ से उन्हें समन किया जाता है. ईडी उनसे पूछताछ भी करती है. इधर हेमंत सोरेन को उन्हें एक तरह से कहा जाए तो डिमोट करना पड़ता है. उनसे सीएम के प्रधान सचिव और गृह विभाग का प्रभार वापस ले लिया जाता है और ग्रामीण विकास विभाग का जिम्मा दे दिया जाता है. साथ ही सरकार की तरफ से एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया जाता है. जांच अभी जारी है.
वंदना डाडेल
झारखंड हाईकोर्ट ने बीते शुक्रवार( 14 जुलाई ) को ईडी के गवाह अशोक यादव पर राज्य सरकार की ओर से लगाए गए सीसीए को अवैध करार देते हुए तत्काल अशोक यादव को रिहा करने का आदेश दिया. जस्टिश एस. चंद्रशेखर ओर जस्टिश रत्नाकर भेंगरा की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि तत्कालीन गृह सचिव वंदना डाडेल पर विभागीय कार्यवाही की जानी चाहिये. ईडी के गवाह पर सीसीए के लगाए जाने को खारिज करने के ऐसे एक नहीं बल्कि दो मामले हुए. पहला मामला ईडी के ही गवाह जय प्रकाश यादव उर्फ मुंगेरी यादव का था तो दूसरा मामला अशोक यादव का है. कोर्ट के ऑर्डर में यह साफ कहा गया है कि गृह विभाग के मंत्री (जो राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैं) उन्होंने बिना सोचे समझे सीसीए लगाने पर फैसला लिया. साथ ही कोर्ट ने तत्कालीन विभागीय सचिव की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं. इसके अलावा हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि तत्कालीन विभागीय गृह सचिव पर सरकार कार्रवाई करे.
अविनाश कुमार
वंदना डाडेल के बाद हाल ही में राज्य सरकार ने अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी अविनाश कुमार को गृह विभाग का जिम्मा दिया है. अविनाश कुमार की छवि एक तेज-तर्रार अधिकारी के रुप में जरूर है. लेकिन उनका भी रिश्ता विवादों के साथ खूब रहा है. यहां तक कि उन पर सीबीआई जांच की भी आंच पड़ी. मामला तीन अगस्त 2009 का है. सीबीआई ने उनके आवास पर छापेमारी की थी. उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. तत्कालीन राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित भी किया था. सीबीआई की छापेमारी उनपर और वर्तमान के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के आवास पर हुई थी. राजेश ठाकुर उस वक्त झारखंड के राज्यपाल सैयद सिबते रजी के पीएस (पर्सनल सेक्रेट्री) थे वहीं अविनाश कुमार राज्यपाल के ओएसडी (ऑफिसर इन स्पेशल ड्यूटी) के पद पर तैनात थे. हालांकि बाद में दोनों को सीबीआई की तरफ से क्लीन चिट दे दी गयी. लेकिन 2009 में इस खबर ने खूब सुर्खियां बंटोरी थी.




