
Ranchi: झारखंड के किसान फूलों की खेती में अब अपनी दिलचस्पी नहीं दिख रहे हैं. सरकार की महत्वकांक्षी योजना को अब साकार होने में काफी समय लग सकता है. सब्जियों को विदेश भेजने के बाद झारखंड के फूलों को खाड़ी देशों में भेजने की तैयारी थी, लेकिन पिछले तीन माह से फूलों की खेती के लिए किसानों ने हाथ खड़े कर दिए हैं. अब विभाग ऐसे किसानों को फिर से खेती कराने के प्रयास में जुट चुका है. सिमांत किसान से लेकर सामूहिक खेती करने वाले किसानों को फूलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. कृषि विभाग ने इस संबंध में ऐसे किसानों को खेती करने के लिए आमंत्रित भी कर रहा है, ताकि उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके. अभी तक इन सुविधाओं का लाभ लेने के लिए कोई भी किसान सामने नहीं आया था. जिसके बाद विभाग अब अन्य सुविधाओं के साथ-साथ उन्हें इस खेती के भविष्य के बारे में भी बताने की तैयारी जिला स्तर से कर रही है.
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किसानों की आय बढ़ाने के लिए की गयी थी पहल
किसानों की आय बढ़ाने को लेकर तीन माह पहले ही कवायद शुरू की गयी थी. लेकिन किसानों का कहना है कि ल़ॉकडाउन में सबसे अधिक नुकसान फूलों की खेती से हुआ है. जिसके बाद इन किसानों को इस खेती में फिलहाल कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही है. उनका यह भी कहना है कि उनके उत्पाद बंगाल के फूलों की तुलना में कम बिकते हैं और बिचौलिए इसका लाभ उठा रहे हैं. लेकिन विभाग का कहना है कि इसी को देखते हुए उन्हें लाभ दिलाने की दिशा में सरकार अब फूलों के निर्यात करने वाली एजेंसी की तलाश कर रही है. एजेंसी मिलने के साथ ही फूलों की गुणवत्ता तय कर उसे बाहर भेजा जा सकेगा. किसानों को फूलों की खेती को लेकर आगे आना होगा.
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राज्य में 745 लाख फूलों का होता है उत्पादन
राज्य में सलाना फूलों का उत्पादन 745 लाख के आस-पास होता है. इसमें जो फूलों का आंकड़ा बताया जा रहा है उसमें कट फ्लावर भी शामिल है. बागवानी के पूर्व निदेशक विजय कुमार बताते हैं कि इसका उत्पादन करीब तीन हजार हेक्टेयर भूमि में किया जा रहा है. 4 वर्ष पहले करीब 900 हेक्टेयर भूमि में फूलों की खेती होती थी. लेकिन इसे किसानों ने रोजगार के रूप में अपनाते हुए इसकी खेती करने का रकबा बढ़ात हुए करीब तीन हजार हेक्टेयर तक पहुंच गयी. मालूम हो कि गुलाब की सबसे अधिक खेती रांची जिले में ही की जा रही है. इसमें रांची के पिठोरिया, ओरमांझी व तुपुदाना जगह शामिल हैं. जबकि दूसरे जिलों में गुमला, गढ़वा, दुमका व अन्य जिलों में दूसरे फूलों के भी छोटे स्तर से खेती की जाती है. फूलों को फिलहाल स्थानीय बाजारों में भेजा जाता है, साथ कुछ उम्दा किस्म के फूलों को किसान खुद व्यापारियों के माध्यम से पड़ोसी राज्यों में भेजते हैं. झारखंड में उत्पादित फूलों में से 70 प्रतिशत फूलों की खपत स्थानीय बाजार में हो रही है.
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अंतर्राष्ट्रीय मानक में गुलाब की खेती करना चुनौतीपूर्ण
गुलाब की फूलों को विदेश भेजने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेती करना अति आवश्यक होगा. इस चुनौती को पूरा करने के लिए किसानों की उन्नत किस्मों के फूलों की खेती करनी होगी. फूलों की गुणवक्ता भी ऐसी होनी चाहिए जिससे वे कम से कम दो दिनों तक खराब ना हो सके. बाजार समिति की ओर से बताया गया कि फूलों की अपेक्षा सब्जियों की क्वालिटी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित हो चुकी है. कई किसान इस दिशा में पहले से काम में जुट भी गए हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद उन्हें फिर से एकजुट करना चुनौती बनती जा रही है.
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