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विश्व भारती में बोले पीएम मोदी- गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत बनने का सार

New Delhi:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल के बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन में स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में ऑनलाइन शामिल हुए. बता दें की ये आयोजन शांति निकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय के 100 साल पूरे होने पर हुआ था अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने गुरुदेव के विजन को आत्मनिर्भर भारत बनने का सार बताया. इसके साथ ही उन्होंने गुरुदेव और गुजरात का कनेक्शन भी बताया. उन्होंने अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने बंगाल की संस्कृति और गुरुदेव से जुड़ी कई बातें बताईं. इस मौके पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल भी मौजूद रहे.

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याद दिलाया गुरुदेव का मंत्र एकला चलो..

पीएम मोदी ने कहा कि गुरुदेव का सबसे प्रेरणादायी मंत्र तो हम सबको हमेशा याद रखना चाहिए. संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने “जोदि तोर दक शुने केऊ ना ऐसे तबे एकला चलो रे” का भी उच्चारण किया. पीएम ने मंत्र का मतलब भी समझाते हुए कहा कि यदि कोई साथ न आए तो अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अगर अकेले चलना पड़े तो चलिए. इस दौरान उन्होंने विश्वभारती के छात्र-छात्राओं को एक टास्क भी दिया. पीएम मोदी ने स्टूडेंट्स को पौष मेले में आने वाले लोगों से संपर्क करने और कलाकृतियों को ऑनलाइन बेचने का टास्क दिया.

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  शिक्षण संस्थानों ने भारत निर्माण में निभाई अहम भूमिका

पीएम मोदी बोले जब भक्ति और कर्म की धाराएं पुरबहार थी तो उसके साथ-साथ ज्ञान की सरिता का ये नूतन त्रिवेणी संगम, आजादी के आंदोलन की चेतना बन गया था. आजादी की ललक में भाव भक्ति की प्रेरणा भरपूर थी। समय की मांग थी कि ज्ञान के अधिष्ठान पर आजादी की जंग जीतने के लिए वैचारिक आंदोलन भी खड़ा किया जाए और साथ ही उज्ज्वल भावी भारत के निर्माण के लिए नई पीढ़ी को तैयार भी किया जाए. और इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई, कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों ने. सैकड़ों वर्षों के कालखंड में चले ये आंदोलन त्याग, तपस्या और तर्पण की अनूठी मिसाल बन गए थे. इन आंदोलनों से प्रभावित होकर हज़ारों लोग आजादी की लड़ाई में बलिदान देने के लिए आगे आए.

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