
Jamshedpur : जमशेदपुर पूर्वी विधायक सरयू राय ने इंकैब (केबुल कंपनी) के भारी कल पुर्जे की हो रही चोरी के जांच के संबंध में
डीजीपी को एक पत्र लिखा है. पत्र के माध्यम से केबुल कंपनी में कल पुर्जे की चोरी के दोषियों पर कार्रवाई तथा इसकी बड़ी जांच एजेंसी से करवाने की बात कही है. उन्होंने बताया कि कारखाने के कल पुर्जे की चोरी के संबंध में उन्हें एक बेनामी पत्र व कंपनी से चोरी करते समय वाहन का फोटो भी प्राप्त हुआ है. चोरी के दिन इसकी सूचना पुलिस को भी दी गई थी.इसके पश्चात पवन राम नाम के एसआई ने पेट्रोलिंग के दौरान मौका-ए-वारदात से आशीष नामक एक युवक को कंपनी से चोरी हुए माल सहित पकड़ लिया. लेकिन कुछ देर बाद गोलमुरी थाना के बॉडीगार्ड दिलीप का फोन आया कि बड़ा बाबू का आदेश है कि युवक को छोड़ दिया जाए. उसके बाद युवक छूट गया. हालांकि इस घटना के बाद चोर और थानेदार के दहशत से कोई भी चोरी की घटना को सूचना नहीं दे पाया. इसके पहले भी केबुल वर्कर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा इंकैब की परिसम्पतियों की चोरी की जांच कराने और दोषी पर कार्रवाई करने के बारे में गोलमुरी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. लेकिन वहां पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने के बदले 14 अक्टूबर 2020 को सनहा दर्ज किया.
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सरयू राय ने कहा है कि केबुल कम्पनी पर फिलहाल लिक्विडेशन का संकट मंडरा रहा है. इसके पुनरूद्धार का प्रयत्न भी हो रहा है. एनसीएलटी द्वारा नियुक्त रिजोल्युशन प्रोफेशनल ने इस हेतु ईओआई प्रकाशित किया है. जिसमें वेदान्ता और टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट्स जैसी बड़ी कम्पनियों ने इंकैब के पुनरूद्धार में रूचि दिखाया है. उन्होंने बताया कि एक ओर इंकैब के पुनरूद्धार और पुनरूद्धार नहीं हो पाने की स्थिति में इसके लिक्विडेशन की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी ओर इंकैब फैक्ट्री के प्लांट से कल-पुर्जों की चोरी हो रही है. उन्होंने कहा कि जिम्मेदार व्यक्तियों द्वारा लिखित सूचना देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती. उन्होंने कहा कि जिस बेनामी पत्र की प्रति आवेदन में संलग्न किया है उसमें सपष्ट है कि पुलिस की संलिप्तता किस सीमा तक इस मामले से जुड़ी है. इसमें न केवल स्थानीय पुलिस-प्रशासन बल्कि स्थानीय प्रभावशाली राजनेताओं और शहर के सफेदपोशों की मिलीभगत है.उन्होंने बताया कि यह कारनामा केवल कम्पनी एक्ट के आधार पर एनसीएलटी और एनसीएलएटी के दायरे तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक सुनियोजित आर्थिक अपराध है. इसलिए इसकी जांच किसी सक्षम जांच ऐजेंसी से कराई जानी चाहिए.उन्होंने बताया कि केबुल कम्पनी की परिसम्पतियां राज्य की और कम्पनी के शेयरधारकों की परिसम्पतियां है. इनके साथ केबुल कर्मियों का भविष्य जुड़ा हुआ है.उन्होंने डीजीपी से इस दिशा में उचित कार्रवाई की मांग की है.
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