
Ranchi: राज्य में 30 हजार से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल हैं. जहां क्लास एक से आठ तक की पढ़ाई होती है. इन कक्षाओं का एकेडमी सेशन पूरा हो चुका है. शैक्षणिक सत्र पूरा हो जाने के बाद भी सिलेबस आधा ही रहा.
अब इन स्कूलों में वार्षिक परीक्षा होने वाली है. इन स्कूलों में पढ़ रहे स्टूडेंट्स को आधे-अधूरे सिलेबस की पढ़ाई के आधार पर पूरे साल के सिलेबस की परीक्षा देनी होगी. जहां बेहतर उच्च शिक्षा के लिए बेसिक एजुकेशन को दुरूस्त करने को कहा जाता है, वहीं पढ़ाई की यह हालत व्यवस्था पर सवाल उठाती है.
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गैर शैक्षणिक कार्यों में फंसे रहे शिक्षक
कक्षा एक से पांच और छह से आठ तक बच्चों का सिलेबस आधा रह जाने की बड़ी वजह शिक्षकों का गैर शैक्षणिक कार्यों में फंसे रहना है. इसके अतिरिक्त पारा शिक्षकों की हड़ताल लंबे समय तक रहना भी एक वजह बतायी जा रही है.
विभिन्न प्राइमरी और मीडिल स्कूलों के शिक्षकों ने बताया कि किसी भी स्कूल में शिक्षक चाह कर भी सिलेबस पूरा नहीं करा सकते हैं.
विभाग की ओर से शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझा कर रखा जाता है. एक स्कूल के शिक्षकों को मिड डे मील देने के हर दिन के रिकॉर्ड को अपलोड करना होता है. इसके साथ ही शिक्षकों को विद्यार्थियों के हर दिन की उपस्थिति को भी ऑनलाइन अपलोड करना होता है.
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अभी एमडीएम का चावल बांट रहे शिक्षक
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल शिक्षकों को एमडीएम का चावल बांटने का आदेश दिया गया है. अपने आदेश में विभाग ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में सुखाड़ग्रस्त जिलों में अवकाश की अवधि में कुल 25 दिनों का एमडीएम उपलब्ध कराया जाये.

इसमें 50 फीसदी या इससे अधिक अटेंडेंस वाले विद्यार्थियों को 25 दिन का चावल और पैसे देने हैं. इस आदेश को लेकर स्कूलों में चावल वितरण किया जा रहा है. शिक्षकों का कहना है कि एक क्लास में औसतन 50 विद्यार्थी हैं.
हर छात्र का अटेंडेंस मिला कर चावल वितरण करना है. कक्षा पांच से सात के बच्चों का पूरा विवरण ऑनलाइन अपलोड करने का काम किया जा रहा है. इन विद्यार्थियों की परीक्षा फरवरी के दूसरे सप्ताह या मार्च के पहले सप्ताह में होगी. शिक्षकों की मानें तो गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे रहने पर सिलेबस पूरा कराना संभव नहीं हो पाता है.
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