Opinion

तबलीगी जमात इस देश के मुसलमान की पहचान नहीं है

विज्ञापन

Dr. Neelam Mahendra

कोरोना के खिलाफ अपनी लड़ाई में भारत धीरे-धीरे लेकिन मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि देश में कोरोना मरीजों की संख्या में वृद्धि होने की गति कम हुई है. यह संख्या अब 7.5 दिनों में दुगुनी हो रही है. लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि कोरोना से इस लड़ाई के दौरान निजामुद्दीन में तबलीगी जमात का मरकज़ सबसे कमजोर कड़ी साबित हुआ.

और शायद इसी वजह से यह संगठन जिसके नाम और गतिविधियों से अबतक देश के अधिकतर लोग अनजान थे, आज उसका नाम और उसकी करतूतें देश की सुरक्षा एजेंसियों से लेकर आम आदमी की जुबां पर है.

advt

लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं निकाला जाये कि तब्लीगी जमात के अस्तित्व से दुनिया अनजान थी. विश्व के अनेक देशों की खुफिया एजेंसियों की नज़र काफी पहले से इन पर थीं. काफी पहले से ही इनपर विभिन्न देशों में होने वाली आतंकवादी गतिविधियों में परोक्ष रूप से शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं.

इसे भी पढ़ें – #CoronaWarriors: बगैर सेफ्टी किट के गली और मोहल्लों को सैनिटाइज करने में जुटे हैं सफाई कर्मी

इसपर अल कायदा, हरकत उल मुजाहिदीन, तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों के लिए युवाओं को भर्ती करने के आरोप हैं. अमरीकी खुफिया एजेंसी स्ट्रेटफॉर ने जब  9/11 के हमले की जांच की थी, तो इस जांच की आंच तबलीगी जमात तक भी पहुंची थी. आश्चर्य की बात है कि विभिन्न आतंकवादी संगठनों को परोक्ष रूप से मदद करने के आरोपों के बावजूद इस जमात की जड़ें विश्व के लगभग 150 देशों तक फैली हैं.

लेकिन उससे भी बड़ा आश्चर्य ये है कि सऊदी अरब और ईरान जैसे मुस्लिम मुल्कों में इसे प्रतिबंधित किये जाने के बावजूद भारत में इसकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगना तो दूर की बात है, बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली के भीतर भारत सरकार की नाक के नीचे ही इसका अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय है. जब तक कानूनी रूप से यह सिद्ध नहीं हो जाता कि तबलीगी जमात के आतंकवादियों से किसी प्रकार के संबंध हैं या नहीं यह विवाद का विषय हो सकता है.

adv

लेकिन कोरोना संकट के इस काल में तबलीगी जमात के लोगों के विवादित आचरण पर तो किसी प्रकार की असहमति का प्रश्न ही नहीं उठता. चाहे वो सरकार के दिशा निर्देशों की धज्जियां उड़ाना हो, या स्वास्थ्य कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार हो, पुलिस कर्मियों पर पथराव और हिंसा का तांडव हो या फिर जगह जगह थूकना अथवा ऐसे क्रिया कलाप करना जिससे यह बीमारी फैले.

इसे भी पढ़ें – #WHO प्रमुख ने खारिज की इस्तीफे की मांग, अमेरिका से वित्तीय मदद की अपील

वैसे तबलीगी जमात के मौलाना साद का वीडियो सामने आने के बाद तबलीगी जमात के लोगों के इस आचरण पर ज्यादा आश्चर्य करने का औचित्य नहीं रह जाता, लेकिन इंसानियत के दुश्मन ऐसे लोगों पर सरकार द्वारा कठोर कार्यवाही करने में राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी दिखाना अवश्य आश्चर्यजनक लगता है.

ऐसे संगठनों पर कार्यवाही ना कर पाने की सरकारों की अपनी-अपनी मजबूरियां हो सकती हैं, लेकिन इन्हीं मजबूरियों से समाज के भीतर से विद्रोह के स्वर भी उपजते हैं.

तबलीगी जमात के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. देश के मुस्लिम समाज के भीतर से ही जमात के विरोध में आवाजें उठने लगीं. बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने तबलीगी जमात की गतिविधियों के चलते उनपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. वहीं शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़्वी का कहना है कि, “यह दुनिया की सबसे खतरनाक जमात है. यह मुसलमानों का ऐसा समूह है, जो पूरी दुनिया में इस्लाम के प्रचार के नाम पर मुसलमान युवाओं को कट्टरपंथी बनाता है.”

इसी प्रकार अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री मोहसिन रज़ा ने भी तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा कि जमात ने देशविरोधी मानसिकता का प्रदर्शन किया है. जबकि बरेली की दरगाह आला हजरत ने सरकार से तबलीगी जमात पर कानूनी कार्यवाही करने की मांग की. शिया धर्म गुरु भी तबलीगी जमात पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें – रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्णब गोस्वामी पर हमला, पुलिस ने दो लोगों को किया गिरफ्तार

इतना ही नहीं फ़िल्म उद्योग से जुड़े विभिन्न मुस्लिम चेहरे जैसे अब्बास टायरवाला और सलमान खान भी जमातियों के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं और देश के हर मुसलमान को घर पर ही नमाज़ पढ़ने के साथ सोशल डिस्टेंसिंग की सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं.

लेकिन अब रमजान के महीने और तबलीगी जमात के इतिहास को देखते हुए पूर्व कांग्रेस नेता मौलाना आजाद के पौत्र फिरोज़ बख़्श जो कि मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्विद्यालय के कुलाधिपति भी हैं, उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर लॉक डाउन की तारीख 24 मई तक बढ़ाने की मांग करते हुए देशभर में मुसलमानों द्वारा स्वास्थ्य एवं पुलिस कर्मियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार के लिए क्षमा भी मांगी.

इससे स्पष्ट है कि तबलीगी जमात इस देश के मुसलमान की पहचान नहीं है. क्योंकि तबलीगी जमात का आतंकवाद कनेक्शन है या नहीं यह तो समय ही बतायेगा, लेकिन इतना तो साफ है कि कट्टरता को बढ़ावा देना उसका मकसद जरूर है, और जहां कट्टरता आती है, वहां उदारता का आसमान छोटा हो जाता है, ज्ञान और विज्ञान के सभी दरवाजे बंद हो जाते हैं.

सोच के साथ पहचान भी संकुचित हो जाती है. क्योंकि सोच ही विचार बनाती है, यह विचार ही शब्दों का रूप लेते हैं, यह शब्द हमारा व्यवहार बनते हैं, हमारी आदतें बनती हैं. यही आदतें हमारा चरित्र बनाती हैं और अंत में यही चरित्र हमारी नियति.

अतः यह समझना जरूरी है कि तबवीगी जमात ने अपनी यह पहचान देशविरोधी गतिविधियों वाले चरित्र से स्वयं बनायी है और यह पहचान इस देश के हर मुसलमान की कदापि नहीं हो सकती. इस देश के मुसलमान की पहचान तो अशफाकउल्ला खान, अब्दुल हमीद, अब्दुल कलाम आजाद बिस्मिल्लाह खान जैसे नाम हैं, जिनके बिना हिदुस्तान वो नहीं होता जो वो आज है.

इसलिए आज जब भारत आगे बढ़ रहा है और 21 वीं सदी की बातें कर रहा है, विश्व में एक मुकाम हासिल करने के ख्वाब देख रहा है तो वहां कट्टरता और संकीर्णता की कोई जगह नहीं हो सकती. आज मुस्लिम समाज ही नहीं देश को भी आवश्यकता है ऐसे पढ़े लिखे युवा मुस्लिम नेतृत्व की, जो उदारवादी होने के साथ ही आधुनिक समय की परिस्थितियों से सामंजस्य बैठाते हुए सही मायनों में धर्मनिरपेक्ष रूप से इस्लाम का सही स्वरूप देश और दुनिया के सामने लाये.

इसे भी पढ़ें – #Jharkhand: मजदूरों के खाते में सीधे जायेगा पैसा, आर्थिक सहायता एप में 2.12 लाख ने कराया निबंधन

डिस्क्लेमर: लेखिका वरिष्ठ स्तंभकार हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों का न्यूज विंग  पुष्टि नहीं करता और ये इनके निजी विचार हैं.

advt
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button