
New Delhi : अभिभावकों के संघ और छात्रों ने 12वीं कक्षा के परिणामों के लिए मूल्यांकन संबंधी सीबीएसई और आईसीएसई की योजनाओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं. इन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सीबीएसई और आईसीएसई की परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया. शीर्ष अदालत ने दोनों केंद्रीय बोर्डों के मूल्यांकन फॉर्मूले को उचित करार देते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए हरी झंडी दे दी.
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कोर्ट ने कहा, दखल देने की कोई वजह नजर नहीं आती
जस्टिस एएम खानविलकर और दिनेश माहेश्वरी की विशेष पीठ ने कहा कि सीबीएसई और आईसीएसई की मूल्यांकन स्कीम में दखल देने की कोई वजह नजर नहीं आती है. पीठ ने सीबीएसई कंपार्टमेंट परीक्षा को रद्द करने की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई और आईसीएसई को सोमवार को निर्देश दिया था कि वे 12वीं कक्षा के छात्रों के मूल्यांकन के लिए तैयार किए गए फॉर्मूले पर कुछ छात्रों और अभिभावकों द्वारा उठाई गई चिंताओं को लेकर जवाब दें.
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अभिभावकों के संघ और छात्रों ने दायर की थीं याचिकाएं
गौरतलब है कि 12वीं कक्षा की परीक्षाएं कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण रद्द कर दी गई हैं. अभिभावकों के एक संघ और छात्रों ने 12वीं कक्षा के परिणामों के लिए मूल्यांकन संबंधी सीबीएसई और आईसीएसई की योजनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इसके कई उपनियम मनमाने हैं. वे छात्रों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे.
जस्टिस एएम खानविलकर और दिनेश माहेश्वरी की विशेष पीठ ने कहा कि वह हस्तक्षेप करने वालों की चिंताओं पर सीबीएसई और आईसीएसई के वकीलों के जवाब पर मंगलवार को सुनवाई करेगी.
पीठ ने रजिस्ट्री को इस मामले में उन सभी लंबित याचिकाओं को 22 जून को सूचीबद्ध करने का भी निर्देश दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने 12वीं कक्षा की परीक्षा रद्द करने के सीबीएसई के फैसले को चुनौती दी है और दोनों बोर्ड की मूल्यांकन योजनाओं पर चिंता जताई है.
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बाह्य परीक्षा पर तर्क
यूपी अभिभावक संघ, लखनऊ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने शुरुआत में कहा कि सीबीएसई की योजना में छात्रों को दिया गया बाह्य परीक्षा का विकल्प उन छात्रों के लिए अहम होगा, जो आंतरिक मूल्यांकन में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके.
छात्र और स्कूल दोनों को बाहरी परीक्षा या आंतरिक मूल्यांकन का विकल्प चुनने का अवसर प्रारंभिक चरण में ही दिया जाना चाहिए.
यदि कोई स्कूल या छात्र इस आंतरिक मूल्यांकन का विकल्प नहीं चुनना चाहता, तो जुलाई के मध्य में बाह्य परीक्षा के लिए एक तारीख तय की जा सकती है या परीक्षा आयोजित करने के लिए अनुकूल कोई भी तारीख तय की जा सकती है.
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कोई भ्रम नहीं
पीठ ने कहा कि छात्रों के लिए आशा की कोई किरण होनी चाहिए और कोई भ्रम नहीं होना चाहिए. पीठ ने कहा, परीक्षा रद्द करने का फैसला उच्चतम स्तर पर लिया गया है और हमने इसे सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है.
अनिश्चितता बढ़ रही
वकील ने कहा कि छात्रों के मूल्यांकन की योजना के संबंध में कई चिंताएं हैं, जिनसे अनिश्चितता बढ़ रही है और कोई नहीं जानता कि वास्तव में क्या होगा. उन्होंने कहा कि मूल्यांकन योजना में एकरूपता होनी चाहिए. क्योंकि सीआईएससीई योजना में औसत अंकों की गणना के लिए अंग्रेजी अनिवार्य कर दी गई है, जबकि सीबीएसई में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है और सर्वाधिक अंक वाले तीन विषयों को शामिल किया गया है.
उन्होंने कहा की बोर्ड द्वारा सुझाए गए मूल्यांकन फॉर्मूले के बारे में गणित के एक शिक्षक ने कहा था कि यह बहुत जटिल है. इस पर पीठ ने पूछा कि यदि वह फॉर्मूला नहीं समझ नहीं पा रहे हैं, तो वह गणित के किस तरह के शिक्षक हैं.
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