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सब्सिडी का कोयला खुले बाजार में बिक रहा था, हजारीबाग डीसी ने आवंटन रद्द किया, फिर 62 लाख जुर्माना वसूल कर पाबंदी हटायी

Ranchi: सब्सिडी पर कोयला लेने के बाद कंपनियां उसे खुले बाजार में भारी मुनाफा कमा कर बेच देती हैं. इस सूचना पर फरवरी 2020 में हजारीबाग जिला प्रशासन ने कार्रवाई की. कार्रवाई के दौरान यह पता चला कि 103 ट्रक कोयला खुले बाजार में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था. सीसीएल के दस्तावेज से मिलान के बाद कंपनियों के नाम का पता चला. जिसके बाद डीसी भूवनेश प्रताप सिंह ने उन सभी 12 कंपनियों को मिलनेवाले कोयले के आवंटन को रद्द करने के लिए खान विभाग को पत्र लिखा. फिर डीसी कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद हजारीबाग के डीसी ने करीब 62 लाख का जुर्माना लगा कर 50 ट्रकों को छोड़ दिया. साथ ही संबंधित कंपनियों पर कोयला उठाव पर लगी पाबंदी हटा ली गयी.

दरअसल, ऐसे कोयले को पीएलसी (Private Sector Coal Linkage) कहते हैं. पीएलसी के तहत काफी कम दर पर इस शर्त के साथ कोयला दिया जाता है कि कोयले का इस्तेमाल जिले के आस-पास के कल-कारखानों के लिए हो. लेकिन कुछ कंपनी और माफिया मिल कर कोयले को खुले बाजार में बेचने का काम करते हैं. ऐसा करने से कंपनी और माफिया को काफी मोटी आमदनी होती है. ऐसा ही मामला हजारीबाग में देखने को मिला. हजारीबाग डीसी की तरफ से काफी सख्ती बरतते हुए वैसी कंपनियों और कोयला ढोनेवाले वाहनों की पहचान की गयी, जो सब्सिडीवाले कोयले को खुले बाजार में बेचने का काम करते थे.

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12 कंपनियों की 103 ट्रकों की हुई थी पहचान

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हजारीबाग जिले से सब्सिडी पर मिले कोयले को बिहार या यूपी के खुले बाजार में बेचा जाता है. लिहाजा उन्हें बरही में लगे रसोइयाघाट टोल प्लाजा से गुजरना पड़ता है. बरही के टोल प्लाजा की मदद से जब जांच शुरू हुई, तो 12 कंपनियों के 103 ट्रक ऐसे मिले जो बिहार और यूपी के खुले बाजार में सब्सिडी पर मिले कोयले को बेचने का काम करते थे. इन सभी कंपनियों और ट्रकों का पता लगाने के बाद हजारीबाग डीसी की तरफ से खनन विभाग को इन कंपनियों का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा की गयी. साथ ही कोल इंडिया की ईकाई सीसीएल को भी इनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया.

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जिला प्रशासन ने वसूला 62 लाख जुर्माना, मामला डीसी कोर्ट में

जिला प्रशासन की तरफ से मामला डीसी कोर्ट में चला रहा है. बताया जा रहा है कि सभी 12 कंपनियों के 103 ट्रकों से ऐसा करने के एवज में जुर्माना वसूला जा रहा है. हजारीबाग के डीएमओ नितेश गुप्ता का कहना है कि अभी तक चार कंपनियों से जुर्माना वसूला गया है. जुर्माने की राशि करीब 62 लाख रुपये है. जुर्माना लेने के बाद दोबारा से इन कंपनियों को सब्सिडी पर मिले कोयले का उठाव करने का परमिशन दे दिया गया है. मतलब यह है कि जुर्माना भरने के बाद सब्सिडीवाले कोयले को आस-पास के कल-कारखानों में बेचने के बजाय खुले बाजार में बेचने वाली ये कंपनियां अब दोबारा से कोयले का उठाव कर सकती हैं. जिन कंपनियों से जुर्माना वसूला गया है, उनमें आर्या कोक, सुपर कोक, सुपर फ्यूल जैसी कंपनियां के 50 ट्रक शामिल हैं.

जानें किस कंपनी के थे कितने ट्रक

  • आरएस कोक इंडस्ट्रीज के 25 ट्रक
  • आर्या कोक प्राइवेट लिमिटेड का एक ट्रक
  • सुपर फ्यूल्स के दो ट्रक
  • गोयल उद्योग के के दो ट्रक
  • गिरिंद्रा हार्ड कोक इंटरप्राइजेज के 8 ट्रक
  • सुपर कोक इंडस्ट्रीज के 19 ट्रक
  • जीएन इंडस्ट्रीज के छह ट्रक
  • एनए उद्योग का एक ट्रक
  • कहकसा इंटरप्राजेज का छह ट्रक
  • राजहंस इस्पात का छह ट्रक
  • तंजिल रिफैक्ट्री का एक ट्रक
  • एसएन कोल ब्रिकेट के 32 ट्रक

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