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स्टैन स्वामी ने कोर्ट से स्ट्रॉ, सिपर और गर्म कपड़ों की याचना की, अब चार दिसंबर को कोर्ट सुनेगा मामला

 एनआईए ने कोर्ट को जानकारी दी है कि उनके पास  स्टैन स्वामी की कोई चीज नहीं है. कहा कि गिरफ्तारी के समय उनकी कोई भी चीज जब्त नहीं की गयी थी

Mumbai/Ranchi :  भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में साजिश करने के आरोपी स्टैन स्वामी(83 ) को पानी और जूस पीने के लिए स्ट्रॉ और सिपर चाहिए. उनके पास गर्म कपड़े भी नहीं हैं. जान लें कि  पार्किंसन बीमारी से पीड़ित स्टैन स्वामी ने कोर्ट से मांग की थी कि उन्हें परेशानी की वजह से स्ट्रॉ और सिपर कप की जरूरत है.

एनआईए को यह दोनों चीजें लौटानी चाहिए. लेकिन  एनआईए ने कोर्ट को जानकारी दी है कि उनके पास  स्टैन स्वामी की कोई चीज नहीं है. कहा कि गिरफ्तारी के वक्त उनकी कोई भी चीज जब्त नहीं की गयी थी.

स्टैन स्वामी को कभी एनआईए की कस्टडी में नहीं लिया गया

एनडीटीवी  के अनुसार एनआईए के एक अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर जानकारी दी कि स्टैन स्वामी को कभी एनआईए की कस्टडी में नहीं लिया गया है, इसलिए उनकी कोई भी चीज हमारे पास नहीं है. कहा कि उन्हें सीधे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, इसलिए उन्हें जेल अधिकारियों से मांग करनी होगी.

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 स्टैन स्वामी की याचिका रद्द कर दी थी

जान लें कि पुणे स्थित विशेष अदालत ने एनआईए द्वारा जवाब दाखिल किये जाने के बाद  स्टैन स्वामी की याचिका रद्द कर दी थी. खबर है कि  स्वामी ने एक नये आवेदन में अधिकारियों से स्ट्रॉ-सिपर और सर्दी के कपड़ों की याचना की. कोर्ट ने इस मामले में जेल प्रशासन से जवाब मांगा है. साथ ही सुनवाई चार  दिसंबर तक स्थगित कर दी. अगली सुनवाई तक स्टैन स्वामी को स्ट्रॉ-सिपर और सर्दी के कपड़ों के लिए इंतजार करना होगा.

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रांची से गिरफ्तार किये गये थे स्टैन स्वामी

बता दें कि आदिवासियों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टैन स्वामी को पिछले महीने एनआईए ने झारखंड के रांची से गिरफ्तार किया था. स्टैन स्वामी भीमा-कोरेगांव केस में गिरफ्तार हुए सबसे उम्रदराज व्यक्ति हैं. वे कई स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित बताये गये हैं.

भीमा-कोरेगांव मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में हुए एक कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसके बाद पूरे महाराष्ट्र में हिंसा और आगजनी जैसी घटनाएं हुई थीं और एक व्यक्ति की जान भी गयी थी. जांचकर्ताओं के अनुसार कार्यक्रम में एल्गार परिषद के लोगों द्वारा भड़काऊ बयान दिये गये थे. उसके अगले दिन हिंसा भड़क उठी थी. बता दें कि जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साजिश रची गयी थी.

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