
Ranchi: स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के बेटे कृष अंसारी निशाने पर आ गये हैं, खासकर राजनीतिक दलों के. रिम्स जैसे राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का उनके स्तर से निरीक्षण किया जाना और इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया जाना आफत का विषय हो गया है. भाजपा सहित अन्य संगठनों से जुड़े लोगों ने इस पर सवाल करना और आपत्ति उठाना शुरू भी कर दिया है. सरकार से जवाब मांगा जाने लगा है. इधर, मंत्री इरफान बेटे के बचाव में सफाई देने लगे हैं.
क्या कह रहे स्वास्थ्य मंत्री
मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने अपने बेटे कृष अंसारी द्वारा रिम्स का निरीक्षण किये जाने की खबरों पर आपत्ति जतायी है. अलग अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इससे संबंधित खबर पर अपनी प्रतिक्रिया देते मंत्री ने कहा है कि उनके बेटे कृष अंसारी को लेकर जो बातें कुछ मीडिया माध्यमों और राजनीतिक मानसिकता के लोग फैला रहे हैं, वह पूरी तरह निराधार, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण है. कृष रिम्स किसी निरीक्षण या नेतागिरी के लिए नहीं गया था. वह तो अपने शिक्षक आदित्य कुमार झा के पिता को देखने गया था जो अभी रिम्स में भर्ती हैं. इसी क्रम में बीती रात कुछ आदिवासी परिवार हमारे आवास पर सहायता के लिए पहुंचे जो रिम्स में अपने परिजन के इलाज को लेकर बेहद परेशान थे. उनके आग्रह पर ही कृष मानवीय आधार पर वहां गया. मकसद था किसी की तकलीफ कम करने की कोशिश की जाय. साथ ही संयोग से एक वरिष्ठ पत्रकार बंधु के परिजन भी रिम्स में भर्ती थे. उन्हें भी सहायता की आवश्यकता थी. कृष ने इंसानियत और संवेदनशीलता के भाव से, यथासंभव मदद की. बस इतनी ही ही बात थी. पर जिस तरह इस घटना को तोड़-मरोड़ कर और राजनीति का रंग चढ़ाकर बिना तथ्यों के प्रस्तुत किया जा रहा है. यह बेहद दुखद और चिंताजनक है.
कृष एक पढ़ा-लिखा, संवेदनशील और होनहार छात्र है. वह अभी छुट्टियों में रांची आया हुआ है. सेवा की भावना उसके भीतर सहज रूप से मौजूद है. वह पूर्व सांसद फुरकान अंसारी का पोता है, जिन्होंने झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. ऐसे परिवार में जन्मे युवा में जनभावना और सेवा का स्वाभाविक संस्कार होना कोई अचरज नहीं. इरफान के मुताबिक, कृष बार-बार उनसे एक ही सवाल कर रहा है कि क्या लोगों की मदद करना गुनाह है? क्या किसी की तकलीफ देखकर मदद करना नेतागिरी कहलाता है? यह सवाल उन्हें भीतर तक तोड़ देता है. इरफान के अनुसार, उनका बेटा न तो किसी किसान को गाड़ी से कुचलता है, न ही किसी के मुंह में पेशाब करता है और न ही सत्ता के नशे में इंसानियत भूल जाता है. उसने तो बस एक बीमार को देखा और मदद की. कृष का पिता होने के नाते वे इस सोच से बेहद व्यथित हैं और सोचने को मजबूर हैं कि आखिर हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है? क्या हर युवा हाथ जो मदद के लिए उठता है, अब राजनीति की काली स्याही से रंग दिया जाएगा? यह हाय-तौबा, यह मानसिकता, समाज के लिए घातक है. मंत्री ने सबों से निवेदन करते कहा है कि वे सच्चाई को समझें. राजनीति के चश्मे को उतारें. यह एक युवा की संवेदनशीलता और सेवा-भावना का अपमान है. कृष का मन टूटा हुआ है, लेकिन उसके इरादे मजबूत हैं.
यहां इस लिंक से देखें कृष अंसारी द्वारा अस्पताल के निरीक्षण से संबंधित वीडियो-
https://www.instagram.com/reel/DMLNN4aznmp/?igsh=aWxxbjlrZ2M3aDRw

दूसरे अस्पतालों का भी दौरा कर बना रहे पहचान
सोशल मीडिया पर कृष की ओर से वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं. इनमें रिम्स के अलावा पारस, रांची जैसे अस्पताल में भ्रमण का भी वीडियो शामिल है इन वीडियोज में कृष को अस्पतालों में सुविधाओं का जायजा लेते और कर्मचारियों से बातचीत करते देखा जा सकता है. अब इस तरह के निरीक्षण को लेकर कई लोग सवाल उठा रहे हैं. कुछ का कहना है कि यह कार्य केवल अधिकृत अधिकारियों या स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा किया जाना चाहिए. वहीं, कुछ इसे मंत्री के बेटे द्वारा जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं. कहा जा रहा है कि इस मुद्दे ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच भी चर्चा को जन्म दिया है. कई लोग इसे अनौपचारिक कदम मान रहे हैं. यह पहली बार नहीं है जब इरफान अंसारी या उनके परिवार से जुड़ा कोई मामला चर्चा में आया हो. इससे पहले भी इरफान अंसारी अपने सोशल मीडिया पोस्ट्स और बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं.
क्या है मामला?
खबर के मुताबिक, रिम्स में कृष अंसारी दल बल के साथ घुमने गये थे. अस्पताल का “निरीक्षण” करने के बाद सोशल मीडिया पर उसका प्रदर्शन भी उन्होंने किया था. इसके बाद प्रदेश भाजपा के नेताओं ने इस पर सवाल शुरू कर दिया है. हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल, पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही, अमर कुमार बाउरी समेत अन्य ने सवाल उठाते पूछा है क्या झारखंड में अब विभागों पर पारिवारिक अधिकार चलेंगे? मनीष के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी की असली कार्यशैली यही है. मंत्री इरफान अंसारी के पुत्र द्वारा अस्पतालों का “निरीक्षण” और फिर सोशल मीडिया पर उसका प्रदर्शन करना एक गंभीर सवाल खड़ा करता है. आखिर किस संवैधानिक या प्रशासनिक अधिकार के तहत यह सब हो रहा है? क्या अब मंत्री के रिश्तेदार विभागीय संस्थानों का दौरा करेंगे, रिपोर्ट बनाएंगे, कैमरे लेकर निरीक्षण करेंगे, और जनता को यह जताने की कोशिश करेंगे कि “अब शासन हमारा निजी क्षेत्र है”?
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