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अब भी हैं छोटानागपुर राजवंश के वारिश, संपत्ति-जमीन की खरीद-बिक्री पर होगा मुकदमा

Ranchi: छोटानागपुर राजवंश के वारिश अब भी हैं. स्व महाराजा चिंता मणी शरण नाथ शाहदेव (रातु, रांची) के निधन के बाद उनके वंशजों को लेकर भ्रामक सूचनाएं सामने आ रही थीं. इस पर मीडिया के जरिये आम सूचना जारी की गयी है. इसमें बताया गया है कि चिंता मणी शरण नाथ शाहदेव की चार बेटियां हैं जो उनकी वारिश भी हैं. माधुरी मंजरी देवी, कल्पना कुमारी देवी, स्व तृप्ति मंजरी देवी तथा गायत्री मंजरी देवी. साथ ही स्व युवराज गोपाल शरण नाथ शाहदेव की पत्नी युवरानी प्रियदर्शिनी शाहदेव भी इस लिस्ट में हैं. एडवोकेट मो इमरान की ओर से जारी सूचना में बताया गया है कि स्व तृप्ति मंजरी देवी के बेटे अभिरित देव सिंह तथा स्व गायत्री मंजरी देवी के बेटे कौशलेंद्र सिंह और प्रियंका सिंह भी चिंता मणी शरण नाथ शाहदेव के ही परिवार से हैं. इसके अलावा किसी अन्य को महाराजा साहब (चिंता मणी शरण नाथ शाहदेव) की संपत्ति में किसी तरह का कोई हक, अधिकार या दावा नहीं है. इस संपत्ति, जमीन इत्यादि का किसी और के साथ या उनके द्वारा किया गया कोई ईकरारनामा गैर कानूनी, फर्जी और अमान्य होगा. ऐसे अनाधिकृत व्यक्ति के खिलाफ न्याय सम्मत कार्यवाही की जायेगी.

क्या है विवाद
पिछले दिनों अखबारों के जरिये एक सूचना जारी करते कहा गया था कि रातु महाराजा के वंश में अब कोई पुरुष सदस्य नहीं है सो उनका उत्तराधिकारी भी नहीं है. छोटानागपुर राज की गद्दी खाली है. ऐसे में इसकी संपत्ति पर पड़हा कानून के हिसाब से नियंत्रण होगा.

कौन थे चिंता मणी
गौरतलब है कि रातू महाराजा चिंता मणि शरण नाथ शाहदेव छोटानागपुर राजवंश के 62वें व अंतिम राजा थे. वे 1957 से 62 तक रांची सदर के विधायक भी रहे. लंबे समय तक बीमार रहने के बाद जुलाई 2014 में उनका निधन रातु स्थित महाराजा गढ़ में हो गया था. उनका जन्म 14 दिसंबर 1931 को हुआ था. चिंतामणि नाथ शाहदेव नागवंशी थे. उन्हें महाराजा का पद परदादा प्रताप उदय नाथ शाहदेव से मिला था, क्योंकि उनके पिता महाराजा काली शरण नाथ शाहदेव व दादा की मृत्यु कम उम्र में ही हो गयी थी. महाराजा चिंतामणि के कार्यकाल 1952 में जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ था. 1957 से 62 तक जब वह रांची सदर से निर्दलीय विधायक थे, तब वह बिहार विधानसभा में सबसे कम उम्र वाले विधायक थे. 1962-66 तक बिहार विधान परिषद में एमएलसी भी रहे थे. इसके अलावा वह कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे. महाराजा का विवाह ओड़िशा के देवगढ़ स्टेट की राजकुमारी महारानी प्रेम मंजरी देवी से हुआ थी. रातू महाराज के इकलौते बेटे (उनकी चार बेटियाँ हैं) की 2010 में मृत्यु हो गई थी. वे निःसंतान थे. एक समय खबर थी कि अब रातु महाराज की बेटियाँ रातू किले के रख-रखाव के लिए एक ट्रस्ट बनाने की योजना बना रही हैं. 103 कमरों वाले इस किले का डिज़ाइन बकिंघम पैलेस की तर्ज पर बनाया गया था.

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