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… तो इसलिए झारखंड में लगातार बढ़ रहा है साइबर क्राइम, जानिये क्या है कारण

Ranchi : जरा इन तीन खबरों को देखें:

19 नवंबर 2020 को हजारीबाग के बरकट्टा से सात साइबर अपराधी गिरफ्तार हुए. इनमें शामिल हैं नइटांड़ गांव निवासी दिनेश कुमार, कपका गांव का डेंगलाल कुमार, सोनू राणा, सूरज राणा, उदय कुमार, मंजीत कुमार और जयनगर निवासी परन कुमार ठाकुर. ये सभी एस्कार्ट सर्विस के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठते थे. सभी 19 से 25 वर्ष के बीच की उम्र के हैं.

15 नवंबर को देवघर की साइबर थाना की पुलिस ने अलग अलग गांवों से 18 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार अपराधी लोगों को फोन कर प्रधानमंत्री जनधन योजना के नाम से पैसे भेजने के नाम पर उनके बैंक खाता की जानकारी हासिल करते थे और उनके पैसे उड़ा लेते थे. गिरफ्तार अपराधियों मे प्रदुम कुमार मंडल, जगत कुमार मंडल, टिकल मंडल, वीरेंद्र मंडल सहित अन्य शामिल है.

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11 नवंबर 2020 को मेदिनीनगर थाना प्रभारी का फेसबुक हैक कर लिया गया. साइबर अपराधियों ने उनका फर्जी फेसबुक एकाउंट बनाया और उनके दोस्तों परिचितों से आर्थिक मदद मांगी. इससे पहले भी थाना प्रभारी का फेसबुक एकाउंट हैक किया जा चुका था. अब थाना प्रभारी खुद ही पुलिस के साइबर सेल की मदद से मामले की जांच कर रहे हैं.

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ये तीनों खबरें हाल की है. झारखंड की है और अलग-अलग तीन जिलों की है. ये बताती हैं कि कुछ साल पहले जामताड़ा के करमाटांड़ से साइबर अपराध की जो पौध पनपी थी उसकी जड़ें अब तेजी से दूसरे जिलों की तरफ पसार रही है. तीनों ही मामलों में साइबर अपराधिय़ों ने अपराध के लिए अलग-अलग तरीकों का सहारा लिया.

ऐसा लगता है कि मोबाइल और इंटरनेट के कनेक्शन के साथ अब सहूलिय़त के साथ घर बैठे अपराध करने की भी सुविधा हो गयी है. इसमें कम रिस्क हैं. पुलिस और जांच एजेंसियां अभी भी पुराने तौर तरीकों का इस्तेमाल कर रही है जबकि साइबर अपराधी उनसे दो कदम आगे चल रहे हैं.

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क्यों बढ़ा झारखंड में साइबर अपराध

झारखंड में साइबर अपराध के गढ़ जामताड़ा के करमाटांड़ से कुछ साल पहले देश के अन्य राज्यों में छोटे मोटे काम करने गए कुछ लोग जब वापस लौटें तो वे अपने साथ कुछ भाषा ज्ञान और मोबाइल से साइबर ठगी के तौर तरीके सीखकर आये. ऐसे ही लोगों में सीताराम मंडल, कुतबुल अंसारी, बद्री मंडल, अताकुल जैसे लोगों के नाम हैं.

इन सभी के नाम देश के विभिन्न राज्यों के थानों में साइबर अपराध के दर्जनों मामले दर्ज हैं. बद्रीमंडल के खिलाफ केरल के मल्लापुरम में कांड संख्या 521/17 सहित अन्य मामले दर्ज हैं. कुतुबल अंसारी ने पंजाब के मुख्यमंत्री की पत्नी के खाते से और पटियाला की महारानी के खाते से 23 लाख रुपये उड़ा लिए. अताउल के आंध्र पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ आंध्र प्रदेश के 20 पुलिसवालों के सैलरी एकाउंट से पैसे उड़ाने का आरोप था.

ये सभी मामूली पढ़े लिखे लोग हैं. ज्यादातर ननमैट्रिक हैं. पर मोबाइल या कंप्यूटर पर इनकी उंगलियां ऐसे चलती हैं जिससे बड़े बड़े कंप्यूटर एक्सपर्ट धोखा खा जाये. इन लोगों ने न सिर्फ साइबर अपराध किए बल्कि अपने क्षेत्रों में बेकार बैठे किशोरों, युवाओं को भी इसमें दक्ष कर लिया. इन लोगों ने देशभर के विभिन्न राज्यों के लोगों को अपना निशाना बनाया. इस तरह से करमाटांड़ जैसे इलाकों में इन साधारण लोगों के आलीशान घर बनने लगे.

पैसे कमाने का यह तरीका इतना फला फूला कि इसमें शामिल लोगों को यह अपराध लग ही नहीं रहा है. जामताड़ा के स्थानीय लोग बताते हैं कि जब इन इलाकों मे आलीशान घर बनने लगे तभी पुलिस को सतर्क हो जाना चाहिए था. मगर पुलिस की लापरवाही से यह धंधा तेजी से फलने-फूलने लगा.

एक और बात हुई, इन साइबर अपराधियों के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि कि अगर वे पकड़े भी जाते हैं तो छह महीने, साल भर के बाद वे जेल से छूट जायेंगे या जमानत मिल ही जायेगी. अब एक तरह से उस खास ठग जमात के बीच यह सामाजिक स्वीकार्यता हो गयी है कि इस काम को करने में कोई बुराई नहीं है. कम समय में ज्यादा पैसे कमाने का इससे बेहतर दूसरा कोई तरीका नहीं है.

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देश में अभी क्या है साइबर अपराध के लिए कानून

अधिवक्ता संजय विद्रोही कहते हैं-किसी भी अपराध पर तभी भी अंकुश लगाया जा सकता है जब उसे लेकर अपराधियों में डर पैदा हो. मौजूदा कानून काफी हल्के हैं और इनसे इन अपराधों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता. साइबर क्राइम के लिए मौजूदा कानून आइटी एक्ट की 2008 में निहित है.

इसके सेक्शन 66ए, 66बी,66सी, 66डी, 66इ, 66एफ, 66इ, इसके अलावा 67 ए, 67 बी फिर 69 के तहत इस अपराध के लिए सजा का प्रावधान है.  इन धाराओं के साथ भारतीय दंड विधान की धारा 419, 504, 506 सहित अन्य धाराओं का उपयोग किसी भी किस्म के साइबर अपराध में आइटी एक्ट के साथ लगाया जाता है. इन कानूनों में तीन साल से लेकर अधिकतम दस साल की सजा का प्रावधान है. आइटी एक्ट की धारा 66 मे तीन साल तक सजा का प्रावधान है जबकि 67 में पांच साल की सजा. धारा 70 में 10 साल की सजा का प्रावधान हैं.

संजय विद्रोही कहते हैं कि ज्यादातर मामले में इन अपराधियों को छह महीने, साल भर में जमानत मिल जाती है. ये अपराधी एक ही बार में किसी की जिंदगी भर की कमाई उड़ा लेते हैं. इसलिए ऐसे मामले में उम्रकैद की सजा का प्रावधान होना चाहिए. इतना ही नहीं साइबर अपराध से जुड़े ज्यादातर मामले में थाने में दर्ज होते ही नहीं है. जिसकी पैरवी नहीं होती है वे मामला दर्ज कराने के लिए भी थाने का चक्कर लगाते रहते हैं.

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