JharkhandJharkhand StoryKhas-KhabarLead NewsMain SliderNationalNEWSRanchiTOP SLIDERTop Story

वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे पर ग्रहण, जानिए 1135 हेक्टेयर वन भूमि को लेकर NHAI चेयरमैन ने क्यों लिखी मुख्य सचिव को चिट्ठी

1135 हेक्टेयर वनभूमि की वजह से पीएम गति शक्ति योजना के कई हाइवे परियोजना में देरी

Nikhil Kumar

Ranchi: झारखंड में 1135 हेक्टेयर वनभूमि को लेकर वन विभाग के अधिकारियों की वजह से केंद्र की महत्वाकांक्षी पीएम गति शक्ति योजना पर ब्रेक लग रहा है. राज्य में 10 से अधिक हाइवे प्रोजेक्ट के विकास के रास्ते वनभूमि के पड़ने से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओें में देरी होने की आशंका एनएचएआई ने जतायी है. नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन संतोष कुमार यादव ने इसे लेकर चिंता जतायी है और राज्य के मुख्य सचिव को इस बाबत पत्र लिखकर अपनी चिंता से अवगत कराया है. बीते दिनों अपने रांची दौरे के क्रम में एनएचएआई चेयरमैन ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एवं उनसे मुलाकात कर वन भूमि क्लीयरेंस जैसे गंभीर मुद्दों पर पहल कर परियोजनाओं को समय से पूर्ण करने में सहयोग मांगा है.
इसे भी पढ़ें: NHAI अध्यक्ष ने धनबाद-खैरटुंडा-बगोदर-हजारीबाग रोड का किया निरीक्षण 

इन परियोजनाओं में देरी की संभावना

चार लेन, कुडू से उदयपुरा एनएच 75, डालटेनगंज करीब 40 किमी- फॉरेष्ट लैँड= 78.32 हेक्टेयर
चार लेन उदयपुरा से भोगू एनएच 75, सेक्शन दो: 52 किमी, वनभूमि- 121.0517 हे.
चार लेन, भोगू से शंखा- सेक्शन तीन, 49 किमी, वनभूमि- 21.1742 हेक्टेयर
छह लेन ग्रीनफील्ड वाराणसी-रांची कोलकोता हाइवे: एनएच 22 चतरा बाइपास, 38 किमी, वनभूमि- 103 हे.
छह लेन वाराणसी-रांची-कोलकाता हाइवे: एनएच 100, देवरिया विलेज,चतरा, 31 किमी, 186.24 हे.
छह लेन वारणासी-रांची-कोलकाता हाइवे एनएच 100, देवरिया उसे दोनोशान गांव, 35 किमी, वनभूमि- 119.79 हे.
छह लेन वाराणसी-रांची-कोलकाता हाइवे: दोनोशान से बोंगाबार गांव: 67 किमी, वनभूमि- 213.46 हे.
छह लेन वारणासी-रांची-कोलकाता हाइवे बोंगाबार से एनएच लेपो गांव, वनभूमि 132.51 किमी
वारणासी-रांची-कोलकाता हाइवे, लेपो गांव से कमलापुर झारखंड-बंगाल सीमा तक 29 किमी, 128.21 हेक्टयर वनभूमि
चार लेन बासुकीनाथ से देवघर सेक्शन 114 ए: 11.0316 हेक्टयर वनभूमि

कुल: वनभूमि 1135 हेक्टेयर

देरी का कारण है वन (संरक्षण) नियम 2022

मुख्य सचिव को लिखे अपने पत्र में एनएचएआई चेयरमैन ने इन परियोजनाओं में हो रही देरी की वजह केंद्र सरकार के पर्यावरण,वन और जलवायु मंत्रालय द्वारा अधिसूचित वन (संरक्षण) नियम 2022 है. इसके तहत हाईवे प्रोजेक्ट के तहत आने वाली वन भूमि में कार्यकारी एजेंसी को क्लीयरेंस देने का प्रावधान उस समय ही मिल सकेगा जब कार्यकारी एजेंसी की ओर से प्रतिपूरक क्षतिपूर्ति के रूप में दूसरी ऐसी जगह पर वनीकरण के लिए भूमि उपलब्ध कराया जा सकेगा, जो पहले से वन अधिनियम 1927 से आच्छाादित नहीं हो. अपने पत्र में एनएचएआई चेयरमैन ने मुख्य सचिव को अवगत कराया है कि जिन 1135 एकड़ वन भूमि को लेकर प्रोजेक्ट के पूर्ण होने में देरी हो रही है उसके लिए वैकल्पिक जमीन एनएचएआई के पास नहीं है.

वन विभाग नियम के अनुपालन पर अड़ा 

पत्र में एनएचएआई चेयरमैन ने स्पष्ट किया है कि 10 से अधिक प्रोजक्ट का काम इस वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहा है क्योंकि झारखंड के वन विभाग के अफसर इस बात पर अड़े हैं कि पहले वनीकरण के लिए दूसरी जगह एनएचएआई जमीन उपलब्ध करायें उसके बाद ही बात उपरोक्त परियोजनाओं के लिए वन भूमि का क्लीयरेंस मिल सकेगा. ऐसे में चेयरमैन ने इन सारी स्थिति से सीएस यानी मुख्य सचिव को अवगत कराते हुए कहा कि वर्तमान में एनएचएआई के पास जमीन उपलब्ध नहीं है. ऐसे में इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं में देरी हो सकती है. चेयरमैन ने राज्य के मुख्य सचिव से अविलंब इसमें पहल करके इन समस्याओं के हल में मदद करने की अपील की है ताकि पीएम गति शक्ति योजना से बन रही इन परियोजनाओं के काम में तेजी हो. बता दें कि अधिकांश प्रोजेक्ट स्वीकृत हैं और इनका टेंडर भी फाइनल हो गया है. ऐसे में जहां वनभूमि हैं, वहां पर परियोजना में देरी होने की आशंका जतायी जा रही है.

 

Related Articles

Back to top button