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स्कूल खुले, पहले दिन रही 40 प्रतिशत तक उपस्थिति, कई निजी स्कूल नहीं खुले, विचार कर रहा प्रबंधन

Ranchi : करीब 270 दिनों के बाद वक्त था पहली बार स्कूल की घंटी सुनने का, लेकिन स्कूलों में कोरोना की दशहत साफ दिख रही थी. लंबे इंतजार के बाद दसवीं व 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल तो खुले, शिक्षकों को आदेश के अनुसार आना पड़ा, लेकिन बच्चों की संख्या कम दिखी.

सरकारी स्कूलों में 40 प्रतिशत तक बच्चे पहुंचे, लेकिन निजी स्कूलों में यह संख्या 20 प्रतिशत तक ही रही. राजधानी के अधिकतर निजी स्कूल बंद ही रहे. कई निजी स्कूल अभी स्कूल खोलने से पहले कई पहलुओं पर विचार कर रहे हैं, साथ ही अभिभावक व छात्रों से भी सलाह ली जा रही है.

कुछ निजी स्कूल ऐसे भी थे जहां अभिभावकों के संग वर्चुअल मीटिंग हुई. डीएवी ग्रुप के कई स्कूलों में वर्चुअल मीटिंग अभिभावकों के संग हुई.

कक्षा शुरू होने के पहले बच्चों को किन-किन बातों का ख्याल रखना है और स्कूल बसों की सुविधा कब से छात्रों को मिलेगी इस संबंध में अभिभावकों को बताया गया. पहले दिन जो बच्चे अपने अभिभावकों का सहमति पत्र साथ लेकर स्कूल नहीं आये थे उन्हें स्कूल के प्रवेश द्वार से ही वापस भी कर दिया गया.

इन सब के बीच स्कूल आनेवाले छात्रों के बीच उत्साह देखा गया. बच्चे इस सत्र में पहली बार स्कूल आये थे. छात्रों ने बताया कि अभी तक सिर्फ ऑनलाइन क्लास करके वे उब चुके थे, लेकिन स्कूल आने के बाद उन्हें कई चीजों की जानकारी मिली जो शायद ऑनलाइन क्लास से संभव नहीं हो पाता.

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कोकर के एक स्कूल से भगाया छात्रों को

राजधानी रांची के कोकर स्थित संत अल्बर्ट स्कूल के पूर्व सचिव के पुत्र ने ताला जड़ दिया. जिसके बाद दसवीं के छात्रों व शिक्षकों को वापस लौटना पड़ा.

बताया जा रहा है कि जहां स्कूल बना है उसकी जमीन को लेकर विवाद है. अभिभावकों ने पुलिस से शिकायत की है. इसके बाद उम्मीद जतायी जा रही है कि स्कूल को जल्द खोल दिया जायेगा.

कैसी रही स्कूलों में उपस्थिति

जिला स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 15 फीसदी, बालकृष्ण उच्च विद्यालय में 20 फीसदी, योगदा बालिका स्कूल में 40 फीसदी, ऑक्सफोर्ड स्कूल में 30 फीसदी उपस्थिति रही. जिला स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि छात्र के हित में ऑफलाइन क्लास एक बेहतर पहल है.

10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा को लेकर वक्त कम है, इस पहल के बाद बच्चों की जो भी पढ़ाई से जुड़ी समस्या होगी उसे दूर किया जा सकेगा. लेकिन सभी को कोरोना से बचाव के उपाय अपना कर ही काम करना होगा.

ग्रामीण इलाकों के हाई व प्लस टू स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति बहुत ही कम रही. शिक्षकों का कहना है कि पहले दिन बच्चों की जानकारी कम होने के कारण उपस्थिति में कमी रही लेकिन बुधवार से संख्या में बढ़ोतरी होगी.

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कोविड गाइडलाइन का पालन कर बच्चे पहुंचे कक्षा

कोविड गाइडलाइन के अनुसार ही बच्चों को स्कूल में प्रवेश कराया गया. प्रवेश द्वार से लेकर कक्षा तक जाने के लिए कम से कम छह फीट की दूरी बनायी गयी थी. हर छात्र कक्षा में भी शारीरिक दूरी बना कर बैठा था.

कक्षा में दो विद्यार्थियों के बीच 4 फीट से अधिक की दूरी बनायी गयी थी. कई स्कूलों में जो छात्र अपने साथ मास्क लेकर नहीं आये थे उन्हें मास्क उपलब्ध कराया गया.

बालकृष्ण उच्च विद्यालय में प्राचार्या ने वैसे सभी छात्रों को मास्क दिये जिनके पास मास्क नहीं थे. हर स्कूल में सैनिटाइजर की व्यवस्था की गयी थी जहां छात्र प्रवेश करने के पहले सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे थे.

राजधानी के सबसे बड़े सरकारी स्कूल जिला स्कूल में पहले दिन से ही तीनों संकाय की कक्षाएं ली गयीं. वहीं बालकृष्ण उच्च विद्यालय में डाउट क्लियर करने संबंधित क्लास हुई. डीपीएस स्कूल में केवल 12वीं के ए और बी सेक्शन साइंस के बच्चों को बुलाया गया.

सभी बच्चों ने प्रैक्टिकल किया. लैब में दो गज की दूरी बना कर प्रैक्टिकल करवाया गया. सभी बच्चों से कोरोना गाइडलाइन से संबंधित आवेदन जमा लिया गया. बच्चे अपनी खुद की व्यवस्था से स्कूल आये थे.

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