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सरयू राय ने रघुवर दास के खिलाफ जांच के लिए ईडी को लिखा पत्र

Ranchi : विधायक सरयू राय ने पूर्व सीएम रघुवर दास के खिलाफ जांच के लिए ईडी को पत्र लिखा है. उन्होने अपने पत्र में लिखा है कि ईडी द्वारा धन शोधन मामले की जांच की जा रही है. मामले में निलंबित आइएएस पूजा सिंघल और सीए सुमन कुमार जेल में बंद हैं. इस कांड से जुड़े प्रेम प्रकाश एवं अन्य को अवैध धन अर्जित करने में मददगार प्रभावशाली सरकारी पदधारियों के कारनामों और बदले में अवैध धन का लाभ लेनेवालों के बारे में प्रामाणिक सूचनाएं एवं सबूत मिल सकते हैं.

उन्हों लिखा है कि इनोवा कार संख्या- JH01DV-1101 प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव के करीबी राज़दार पुनीत भार्गव ने 21 फरवरी, 2020 को बिहार के सासाराम स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा से ऋण लेकर ख़रीदी है, जिसका रजिस्ट्रेशन रांची में हुआ है. इस कार पर पूर्व सीएम रघुवर दास द्वारा उपयोग किया जाता है. सरकारी कार्यक्रमों में भी इस कार का उपयोग किया गया है. 13 जून को न्यूज विंग ने इस खबर को ब्रेक किया था, उसके बाद सरयू राय ने इसके आधार पर ट्वीट किया था.

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इसके अलावे फॉर्चुनर कार संख्या JH05CR-0011 हेहल निवासी सुरेन्द्र मोहन ने रांची एसबीआइ से 20 लाख रुपये ऋण लेकर 23 मई, 2020 को ख़रीदी और रजिस्ट्रेशन जमशेदपुर में कराया. कार की क़ीमत का शेष 20 लाख नीलांचल कम्पाउण्ड निवासी अनिदेव इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा लि के निदेशक ने नगद और चेक से चुकाया है. इस कार का उपयोग भी पूर्व सीएम रघुवर दास कर रहे हैं.

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प्रेम प्रकाश के खिलाफ नहीं दर्ज हुआ मामला

उन्होंने लिखा है कि उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने दिनांक 28 जुलाई 2018 को अरगोड़ा थाना में प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव एवं अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थाना प्रभारी को सप्रमाण पत्र दिया था. पर तत्कालीन सरकार में मुख्यमंत्री कार्यालय अथवा मुख्य सचिव कार्यालय से प्राप्त निर्देश के आलोक में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई. यह एक गम्भीर मामला है जिसका सीधा संबंध धन शोधन के उस कांड के साथ है.

इसकी जांच ईडी रांची शाखा कर रही है. ईडी पल्स अस्पताल में लगे धन की जांच कर रहा है. इस अस्पताल भवन की ख़रीद और निर्माण का कार्य 2018 से 2020 के बीच हुआ है. तत्कालीन सरकार के सीएम एवं सीएस के साथ पूजा सिंघल के संबंध जगज़ाहिर हैं.

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इस अवैध धन का स्रोत जानने के लिए पूजा सिंघल और तत्कालीन सरकार में प्रभावी प्रेम प्रकाश एवं अन्य किरदारों के क्रियाकलापों की जांच ज़रूरी है.

जांच के दायरे में उत्पाद विभाग, पथ निर्माण विभाग, भवन निर्माण विभाग, खान विभाग, कौशल विकास विभाग, ऊर्जा विभाग आदि के संदेहास्पद कार्यों की तह में जाने से इस अवैध धन के स्रोत पता चल सकते हैं.

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