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सदर को कोविड अस्पताल बनाने के लिए 21 डॉक्टर मिले, एक भी एनेस्थेटिक नहीं, कौन चलायेगा ICU और वेंटिलेटर?

  • आइसीयू और वेंटिलेटर चलाने के लिए चाहिये एनेस्थेटिक,  60 में से 40 बेड होगा आईसीयू
  • एचआरसीटी और कोविड प्रोफाइल टेस्ट के लिए भी मशीन नहीं

Kumar Gaurav

Ranchi: रांची स्थित राज्य के सबसे बड़े सदर अस्पताल में 60 बेड का डेडिकेटेड कोविड केयर अस्पताल बनाया जा रहा है. डॉक्टरों की मानें तो इसे 10 दिनों में चालू कर दिया जायेगा. 60 बेड के इस कोविड केयर अस्पताल में 40 बेड को आइसीयू सपोर्टेड बनाना है. 30 आइसीयू पूरी तरह तैयार हैं.

स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसके संचालन के लिए सदर अस्पताल को 21 डॉक्टर सहित जरूरी पारा मेडिकल स्टाफ मुहैया कराये गये हैं. पर अधिकतर बेड आइसीयू होंगे, जिसे सिर्फ एनेसथिसिया के डॉक्टर ही चला सकते हैं. पर, विभाग की ओर से एक भी एनेस्थेटिक नहीं दिया गया है. अब यह सवाल है कि बिना एनेस्थेटिक के आइसीयू कैसे चलेगा.

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न तो एचआरसीटी की सुविधा न ही कोविड प्रोफाइल टेस्ट की मशीन

सदर अस्पताल के कोविड सेंटर में अधिकतर बेड गंभीर लक्षण वाले मरीजों के लिए आरक्षित होंगे. ऐसे में वैसे मरीज ही पहुंचेंगे जिन्हें आइसीयू सपोर्ट की जरूरत होगी. ऐसे मरीजों का डब्लयूएचओ और आइसीएमआर के अनुसार हाई रिजोल्यूशन सीटी स्कैन जरूरी होगा.

पर यहां तो एचआरसीटी के लिए सिटी स्कैन मशीन ही नहीं है. सिर्फ एक्स रे मशीन पर ही डिपेंडेंट होना होगा. इसके अलावा मरीजों का कोविड प्रोफाइल टेस्ट भी जरूरी होता है. पर सदर के पास कोविड प्रोफाइल टेस्ट के लिए मशीन ही नहीं है. ऐसे में उन्हें मेडॉल पर डिपेंडेंट रहना होगा.

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200 और कोविड बेड बनाने की है योजना

सदर अस्पताल में 200 और बेड बनाने की योजना है जिसे जल्द ही पूरा करने का लक्ष्य है. सदर अस्पताल के चौथे और पांचवें तल्ले में 50-50 रूम हैं जहां 100-100 बेड की व्यवस्था की जा सकती है. पर वहां आक्सीजन पाइपलाइन से सप्लाई की व्यवस्था नहीं है. पाइपलाइन सप्लाई की व्यवस्था हो जाने से सदर अस्पताल में 200 और मरीजों के लिए बेड उपलब्ध हो जायेंगे.

ये हो सकता है समाधान

सुत्रों की माने तो रिम्स से पीजी पासआउट चार ऐसे डॉक्टर हैं जिन्हें विभिन्न स्वास्थ्य उपक्रमों में पदस्थापित किया गया है. अगर उन्हें यहां बुला लिया जाये तो इसकी समस्या दूर हो जायेगी.

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