
- वाइज़ मेंस क्लब रांची कैपिटल ने 2024 तक सभी खर्च उठाने की ली जिम्मेदारी
Ranchi: इंटरनेशनल एथलीट फ्लोरेंस बारला के मिशन ओलंपिक की राह अब वाइज़ मेंस क्लब रांची कैपिटल आसान करेगा. इंटरनेशनल स्तर पर दो गोल्ड मेडल जीत चुकी बारला ने इस साल 12वीं की जेएसएसपीएस (झारखंड स्पोर्ट्स प्रमोशन सोसाइटी) में रहकर पढ़ाई पूरी की है.
जेएसएसपीएस के पास 12वीं के बाद किसी स्टूडेंट के लिये अभी व्यवस्था नहीं बन पायी है. ऐसे में मिशन ओलंपिक 2024 की तैयारियों में जुटी फ्लोरेंस के लिये संकट खड़ा हो गया था. उसने वाइज़ मेंस क्लब रांची कैपिटल से मदद मांगी. इस पर क्लब के मेंबर रौशन जॉन थिरायट ने 2024 तक उसका सारा खर्च वहन करने का जिम्मा उठाया है. क्लब के हेड शुभेन्दु नारायण भट्टा ने फ्लोरेंस को इसकी सूचना दे दी है.
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खेल विभाग का इंकार
जानकारी के अनुसार जेएसएसपीएस ने फ्लोरेंस के मामले पर खेल विभाग से राय मांगी थी. 12वीं के बाद फ्लोरेंस के लिए पढ़ाई औऱ ट्रेनिंग के मामले में जेएसएसपीएस कोई फैसला नहीं ले पा रहा था.
दरअसल JSSPS के नियमों के तहत किसी भी ट्रेनी को 12वीं की पढ़ाई तक ही स्पोर्ट्स ट्रेनिंग दिये जाने की व्यवस्था है. विभाग ने भी इस मामले में पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं दिया. ऐसे में इस प्लेयर के लिये भविष्य दांव पर था.
गुमला में अपने परिजनों के साथ एक गांव में रह रही फ्लोरेंस ने इसके लिये वाइज मेंस क्लब से मदद मांगी थी. इस पर क्लब की एग्जीक्यूटिव कमिटी की बैठक हुई. क्लब मिशन ओलंपिक तक उसकी मदद करने को तैयार हो गया.
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कजाकिस्तान में गोल्ड मेडल
फ्लोरेंस और उसकी छोटी बहन आशा किरण बारला को टैलेंटेड प्लेयर के तौर पर देखा जाता रहा है. आशा अभी JSSPS में रहकर पढ़ाई करने के साथ साथ ट्रेनिंग ले रही है. फ्लोरेंस ने 2019 में कजाकिस्तान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण एथलेटिक्स कंपटीशन में 400 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था. यह उसका पहला ही इंटरनेशनल टूर्नामेंट था.
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