
Ranchi: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) प्रबंधन ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग से भविष्यनिधि के बकाये का भुगतान करने के लिए 21.34 करोड़ रुपये की मांग की है. पीएफ की यह राशि वर्ष 2002 से नहीं जमा की गयी है. क्षेत्रीय भविष्यनिधि आयुक्त कार्यालय की ओर से 2002 से लेकर 2017 तक के बकाये का एकमुश्त भुगतान करने का आदेश रिम्स प्रबंधन को दिया गया है. रिम्स प्रबंधन की तरफ से 126 दैनिक वेतन भोगी कर्मियों और 36 अनुबंध कर्मियों के भविष्य निधि की कटौती कर उसे जमा नहीं कराया गया है.
ये कर्मचारी 2002 से अब तक रिम्स में काम कर रहे हैं. इनके बकाये का आकलन क्षेत्रीय पीएफ ऑफिस के अधिकारियों ने किया है और उसके आधार पर ही भुगतान करने का नोटिस दिया गया है. रिम्स के आग्रह पर पीएफ कटौती से संबंधित राशि का भुगतान करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आवश्यक कार्रवाई की जा रही है. सरकार के स्तर पर इस बात की भी जांच की जा रही है कि आखिर किन कारणों से कर्मियों के वेतनमान में से पीएफ की राशि की कटौती की गयी अथवा नहीं. पीएफ की राशि का भुगतान होने से सभी कर्मियों के खाते में चार से पांच लाख रुपये जमा हो सकेंगे.
2016 से लगातार नोटिस दिया जा रहा है रिम्स को
रिम्स प्रबंधन को 2016 से पीएफ कार्यालय की तरफ से लगातार नोटिस दिया जा रहा है. पहली बार 31 अक्तूबर 2016 को नोटिस सर्व किया गया था. इस नोटिस में 28 नवंबर को रिम्स प्रबंधन को बकाये पर अपना पक्ष रखने को कहा गया था. तय तिथि को सुनवाई नहीं हुई. फिर 12 दिसंबर को सुनवाई की तिथि तय की गयी. इसमें भी रिम्स प्रबंधन की तरफ से पीएफ कार्यालय को कोई जानकारी नहीं दी गयी. उसके बाद 9 जनवरी 2017 को फिर सुनवाई की तिथि तय की गयी. इसमें रिम्स प्रबंधन ने जो दस्तावेज दिये, उसमें इसकी पुष्टि हुई कि पीएफ की राशि की कटौती और उसके भुगतान में कोई सकारात्मक पहल अब तक नहीं की गयी. पीएफ कार्यालय के अधिकारी एके सिंह ने दस्तावेज की जांच करने के बाद 21.34 करोड़ की राशि और जुर्माने का आलकन कर इसका भुगतान करने का निर्देश दिया.




