
Ranchi: राज्य के नगर निकायों में नक्शे स्वीकृति में पैसों के खेल मामले में कोर्ट के स्वत: संज्ञान की झारखंड हाइकोर्ट में सुनवाई शुक्रवार को हुई. 6 सितंबर को समाचार पत्र में छपी खबरों के आधार पर कोर्ट को बताया गया कि रांची नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम के अधिकारियों द्वारा दुकानदारों से ट्रेड लाइसेंस के नाम भयादोहन कर एक बड़ी राशि की वसूली की जाती है. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई, मौखिक कहा कि ऐसा नहीं चलेगा, अधिकारियों को बदल जाये. इस पर रांची नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि शिकायत के आधार पर पुलिस के समक्ष सनहा दर्ज कराया गया है. निगम की तीन सदस्य कमेटी इस मामले को देखने के लिए बनाई गई है. गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को वापस हेड क्वार्टर बुला लिया गया है. इस पर कोर्ट ने महाधिवक्ता राजीव रंजन को सोमवार को मुख्य सचिव एवं प्रधान सचिव नगर विकास विभाग के साथ बैठक करने को कहा है. साथ ही अगले सुनवाई में बताने को कहा है कि इस संबंध में क्या कदम उठाए गए. कोर्ट ने मौखिक कहा कि निगम में कांट्रैक्ट बेसिस पर नहीं स्थाई नियुक्ति की जाए. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति एस चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर निर्धारित की है. एमिकस क्यूरी इंद्रजीत सिंह ने कोर्ट को बताया की रांची नगर निगम और आरआरडीए में पूर्व में भी भ्रष्टाचार और गड़बड़ी के गंभीर आरोप अधिकारियों पर लगे है, क्रिमिनल केस भी दर्ज हुआ है और कई अधिकारी जेल भी गए हैं.
रांची नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने पैरवी की, वहीं आरआरडीए की ओर से अधिवक्ता प्रशांत कुमार सिंह ने पैरवी की. दरअसल, सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि जो पूर्व में नक्शा पास करने की प्रक्रिया थी उसमें संशोधन कर नया प्रोसेस लागू किया गया है. उस प्रोसेस में नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया 5 चरणों में पूरी होगी. जिसमें नक्शा की वैधता की जांच होनी है और नक्शा पास होना है, इसे लोगों के हित को देखते हुए पूरे राज्य के नगर निगम में लागू किया जाएगा. इसके लिए एक नया सॉफ्टवेयर भी तैयार किया गया है.
बता दें कि इससे संबंधित खबर रांची के स्थानीय समाचार पत्र में छपी थी, जिस पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था. कोर्ट ने इस मामले को एलपीए 132 / 2012 के साथ टैग करने का निर्देश दिया था. उल्लेखनीय है कि 20-30 रुपए प्रति वर्ग फीट चढ़ावा, तब पास होता है नक्शा बीबी वर्ग फीट तक चढ़ावा देकर नक्शा की स्वीकृति प्राप्त किया जाता है. नगर निकायों में नक्शा स्वीकृति के हर चरण पर चढ़ावे की रकम फिक्स कर दी गई है.
इसे भी पढ़ें – झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग का हुआ गठन, हिदायतुल्ला खान बनाये गये अध्यक्ष



