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Ranchi : राज्यपाल के आदेश के बाद भी अनुबंध पर कार्यरत 1000 असिस्टेंट प्रोफेसर का मानदेय नहीं हुआ तय

पीएचडी, नेट, गोल्ड मेडलिस्ट व जेआरएफ क्वालिफाइड 1000 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर 600 रुपये प्रति घंटी के आधार पर काम कर रहे हैं.

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Ranchi : राज्यपाल के आदेश के बाद भी राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों व अंगीभूत कॉलेजों में अनुबंध पर कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों को विभाग की ओर से मानदेय तय नहीं किया गया है. अभी भी पीएचडी, नेट, गोल्ड मेडलिस्ट व जेआरएफ क्वालिफाइड 1000 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर 600 रुपये प्रति घंटी के आधार पर काम कर रहे हैं. इस 600 रुपये  प्रति घंटी के हिसाब से मासिक 36000 रुपये तक मिलता है. पर इसमें भी काफी असमानता है. इसको लेकर शिक्षकों में काफी रोष है. गौरतलब हो कि ऐसे शिक्षक दिसंबर 2017 से काम कर रहे हैं.

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काम समान पर वेतन असमान

इस संबंध में झारखंड सहायक प्राध्यापक अनुबंध संघ के संरक्षक डॉ संजय कुमार झा ने बताया कि संविदा आधारित शिक्षकों से स्थायी शिक्षकों की तरह ही काम लिया जाता है. लेकिन हमें प्रति घंटी के आधार पर मानदेय दिया जाता है. उन्होंने बताया कि सीबीसीएस पाठ्यक्रम के तहत अधिकांश समय परीक्षा आयोजित होना, ग्रीष्मावकाश, दुर्गा पूजा से छठ पूजा सहित अन्य अवकाश में मानदेय नहीं मिलता है. ऐसे में घंटी आधारित होने के कारण मासिक मानदेय  में भारी असमानता है. कई कॉलेजों में जहां शिक्षकों की संख्या कम है, वहां अनुबंध आधारित शिक्षकों को ज्यादा वेतन मिलता है.  जबकि जहां स्थायी शिक्षकों की संख्या ज्यादा है वहां अनुबंध आधारित शिक्षकों को मानदेय कम मिलता है.

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सितंबर में राज्यपाल ने दिया है आदेश

जान लें कि  मानेदय में असमानता को लेकर कुलाधिपति राज्यपाल, मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री को अवगत कराया गया है. इस बाबत राज्यपाल ने 19 सितंबर को ही सकारात्मक पहल करते हुए निश्चित मानदेय निधारित करने का निर्देश विभाग को दिया है. इस निर्देश का पालन विभाग की ओर से अब तक नहीं किया गया है. डॉ संजय कुमार झा ने कहा कि राज्य सरकार झारखंड सहायक प्राध्यापक अनुबंध संघ की मांगे नहीं मानता है तो सभी शिक्षक 18 अक्टूबर को राजभवन के समक्ष अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे.

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