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रामगढ़ : SBM में कर्मियों की नियुक्ति में अपनाया जा रहा मनमाना रवैया, अब मंत्री लेंगे खबर

Ranchi/Ramgarh : रामगढ़ में स्वच्छ भारत मिशन प्रोग्राम (SBM) के तहत जिले स्तर पर विभिन्न पदों के लिए जारी नियुक्ति प्रक्रिया संदिग्ध बनी हुई है. SBM के तहत जिला SBM सह SLWM कॉर्डिनेटर, MIS कॉर्डिनेटर सहित अन्य पदों पर नियुक्ति में विभागीय प्रावधानों को दरकिनार करने के आरोप लग रहे हैं. इस पर मीडिया में खबर सामने आने के बावजूद चिन्हित खामियों को ठीक नहीं किए जाने की शिकायत बनी हुई है.

10 सितंबर 2022 को जिला स्तर पर चयन समिति की ओर से मेरिट लिस्ट जारी की गयी थी. इसके बाद 28 सितंबर और 30 सितंबर को लिस्ट में शामिल कैंडिडेटों का टेस्ट भी ले लिया गया. अब इसी आधार पर आगे फाइनल सेलेक्शन किया जायेगा. पर इस बीच यह विवाद बना हुआ है कि आखिर जिनकी उम्र निर्धारित शर्तों से ज्यादा है, जिन्होंने मैट्रिक, इंटर किसी और राज्य से पास किया है, पदों के लिए निर्धारित योग्यता और अनुभव नहीं है, उन्हें भी मेरिट लिस्ट में जगह कैसे मिली. जबकि दूसरे जिलों में इसी आधार पर आवेदकों के आवेदन रिजेक्ट कर दिये गये. ऐसे में यह कहा जा रहा है कि राज्य में पेयजल विभाग में नियुक्तियों में अलग-अलग पदों के लिए अलग-अलग जिलों में मनमाने तरीके से नियमों का पालन किया जा रहा है जो कई आशंकाओं को जन्म दे रहे हैं.

इन नामों को माना जा रहा संदिग्ध

मिली जानकारी के अनुसार रामगढ़ में जिला स्तर पर गठित समिति ने 10 सितंबर 2022 को एक मेरिट लिस्ट जारी की. इसमें जिला SBM सह SLWM कॉर्डिनेटर के पदों के लिए 11 कैंडिडेट को जगह दी गयी. विज्ञापन शर्तों के आधार पर 22 कैंडिडेट को अयोग्य घोषित कर दिया गया. जिन 11 कैंडिडेट का नाम लिस्ट (जिला SBM सह SLWM कॉर्डिनेटर) में था, उसमें से राजेश कुमार सिंह (पिता- नवल किशोर सिंह, चतरा), अखिलेश पांडेय (पिता- स्व सुरेश पांडेय, लातेहार), संतोष कुमार (पिता- प्रभुनाथ शाह, रांची) के नाम पर सवाल हैं. राजेश के बारे में कहा जा रहा है कि इनकी आयु सीमा निर्धारित गाइडलाइन 35 वर्ष से अधिक है. अखिलेश पांडेय भी 35 प्लस हैं. संतोष कुमार का मैट्रिक, इंटर झारखण्ड का नहीं है.

MIS कॉर्डिनेटर पद के लिए विपुल सुमन ने आवेदन किया था. मेरिट लिस्ट में उन्हें लिया गया. उनका मैट्रिक, इंटर झारखण्ड से नहीं है. साथ ही MIS कॉर्डिनेटर पद के लिए निर्धारित अनुभव भी इनके पास नहीं है. कहा जा रहा है कि उनकी एकेडमिक योग्यता हैड्रोलॉजिस्ट की है जिसमें MIS कॉर्डिनेटर पद से संबंधित योग्यता दूर दूर तक नजर नहीं आती. इसी लिस्ट में आशीष कुमार भी शामिल हैं. वे एकं प्रखंड समन्वयक का अनुभव रखते हैं. पर लिस्ट में इनका चयन किस अनुभव के आधार पर रखा गया है, यह संदिग्ध है. MIS कॉर्डिनेटर  के लिए MIS या GIS से सम्बंधित योग्यता होनी चाहिये थी.

IEC पद के लिए लिस्ट में जगह पाने वाले विपुल सुमन, अश्वनी पांडेय और संतोष कुमार ने मैट्रिक, इंटर झारखंड से बाहर के राज्य से किया है. प्रदीप कुमार को इस पद के लिए निर्धारित योग्यता नहीं है. हकीकत में उनकी योग्यता और दक्षता एकाउंटेंट पद की है. जबकि इसी आधार पर जिला स्तरीय समिति ने प्रदीप कुमार की तरह अनुभव रखने वाले दीपक तमोली के आवेदन को खारिज कर दिया था. राजेश कुमार फिलहाल कहीं कार्यरत नहीं हैं. उन पर अनुशासनात्मक कारवाई चतरा जिले में कार्यपालक अभियंता (पेयजल विभाग) के द्वारा की गयी है. फिर भी इन्हें लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट में अनुमति दी गयी. इस मामले में स्थिति यह रही है कि इसी आधार पर कोडरमा के राजदेव पांडेय को डिसक्वालिफाई कर दिया गया है. पांडेय के बारे में कहा गया कि इनके खिलाफ कोडरमा के कार्यपालक अभियंता (पेयजल विभाग) के द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है.

जानकारी लेने में जुटे मंत्री

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने न्यूज विंग के सवाल पर कहा कि रामगढ़ और अन्य जिलों के मामले उनके संज्ञान में आये हैं. वे अपने स्तर से इस मामले का पता लगाएंगे और जरूरी कदम उठाय़ा जायेगा. रामगढ़ के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (पेयजल विभाग) राजेश रंजन ने न्यूज विंग में इस मसले पर पूर्व में छपी खबर के दौरान कहा था कि विभागीय प्रावधानों के अनुरूप ही नियुक्ति प्रक्रिया होनी चाहिये. अगर कुछ मसला है तो वे इसे देखेंगे. विभागीय सचिव मनीष रंजन को न्यूज विंग की ओर से फोन और मैसेज भी किया गया तो उन्होंने रिस्पॉन्स नहीं दिया. उनका या संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया आने पर उसे भी जगह दिया जायेगा.

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