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पेयजल विभाग की नियुक्ति में विभागीय प्रावधानों के उल्लंघन पर विवाद, रामगढ़ में चयन प्रक्रिया संदिग्ध !

Ranchi: राज्य के विभिन्न जिलों में जिले स्तर पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में अलग अलग पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया जारी है. इसमें विभागीय प्रावधानों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आयी हैं. नया मामला रामगढ़ का सामने आया है. इस जिले में विभिन्न पदों के लिए जारी नियुक्ति प्रक्रिया पर विवाद सामने आया है. IEC और MIS कॉर्डिनेटर के लिए नियुक्ति हेतु जारी मेरिट लिस्ट में सेलेक्टेड कैंडिडेट के मामले में नियमों के उल्लंघन की बात कही जा रही है. फाइनल सलेक्शन से पूर्व 28 सितम्बर को एक टेस्ट लिए जाने की तैयारी पूरी है. फिलहाल इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा जा रहा है कि विपुल सुमन (पिता- शुभ नंदन प्रसाद, MIS कॉर्डिनेटर आवेदक) वह झारखंड से नहीं, बिहार से मैट्रिक, इंटर पास हैं. इसी तरह प्रदीप कुमार (पिता निर्मल महतो, IEC कॉर्डिनेटर) के पास एकाउंटेंट का अनुभव है पर उसका नाम मेरिट लिस्ट में IEC कॉर्डिनेटर के पद के कैंडिडेट की लिस्ट में है. जबकि एकाउंटेंट का अनुभव रखने वाले दीपक नाम के कैंडिडेट के आवेदन को खारिज कर दिया गया. अन्य जिलों में दूसरे राज्यों से मैट्रिक, इंटर पास होने और संबंधित कार्यों का अनुभव नहीं होने की शिकायत पर जारी नियुक्ति प्रक्रिया को कैंसिल कर दिया गया था. पर रामगढ़ में ऐसा नहीं किए जाने पर विवाद शुरू है.
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लातेहार,धनबाद में आवेदन हो चुके हैं खारिज

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2021 को कैबिनेट की बैठक में फैसला लिया गया था कि राज्य से मैट्रिक, इंटर उत्तीर्ण करने वालों को राज्य की नौकरियों में मौका मिलेगा. आरक्षण और अन्य लाभ भी इसी आधार पर तय किये जाने का विषय आया. इसे देखते ही जिला स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में भी इन बिंदुओं का पालन किया जाने लगा है. लातेहार में पिछले दिनों (9 सितंबर) जिला जल स्वच्छता समिति के लिए अलग अलग पदों पर नियुक्ति के क्रम में मेरिट लिस्ट में शामिल अश्विनी पांडेय को दूसरे राज्य से मैट्रिक, इंटर पास होने के आरोप के कारण डिस्क्वालिफाइ कर दिया गया. देवघर में मामला तूल पकड़ने पर विजय कुमार को इसी आधार पर रिजेक्ट कर दिया गया था. धनबाद में भी इसी तरह का केस सामने आने पर कैंडिडेट को अयोग्य घोषित कर दिया गया.

क्या कहते हैं अधिकारी

रामगढ़ के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (पेयजल एवं स्वच्छता) राजेश रंजन ने न्यूज विंग से कहा कि जिला स्तर पर नियुक्ति प्रक्रिया में विभागीय प्रावधानों का पालन तो करना ही होता है. जो शर्तें तय हैं, उसका तो पालन होना ही चाहिये. पर अगर ऐसा कुछ हुआ है तो वे अपने स्तर से इसे देखते हैं. इस मामले में रामगढ़ प्रशासन (डीडीसी, रामगढ़) को फोन किया गया पर उन्होंने रिसीव नहीं किया. उनका पक्ष आने पर उसे भी जगह दिया जायेगा.

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