
Dumka: दुमका प्रखंड के जोगीडीह गांव में चांद-भैरव मुर्मू जिवन अखड़ा और ग्रामीणों ने धर्म, संस्कृति और एसपीटी एक्ट को लेकर एक महत्वपूर्ण कुल्ही दुरुप (बैठक) की.
बैठक में दुमका प्रखंड के बांसकानाली गांव में पूर्व से मंझी थान होने के बावजूद पूर्व की सरकार द्वारा बनाये जाने वाले एक अन्य मंझी थान पर चर्चा की गयी जिसका उद्घाटन पूर्व की सरकार ने किया था.
सर्वसम्मति से चर्चा में यह पाया गया कि बांसकानाली गांव में एसपीटी एक्ट के नियम के विरुद्ध पूर्व की सरकार द्वारा मंझी थान का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था. ग्राम प्रधान मंझी संगठन ने एसपीटी एक्ट और धर्म के विरुद्ध मंझी थान के लिए सरकार को जमीन उपलब्ध करायी थी.
इसके साथ-साथ संताल आदिवासी के धर्म, संस्कृति की मान्यता के विरुद्ध भी यह निर्माण कराया जा गया.
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एक ही मंझी थान, एक ही मंझी बाबा
संताल आदिवासियों में यह धार्मिक मान्यता है कि एक गांव में एक ही पूज्य स्थल मंझी थान होता है और एक ही मंझी बाबा होते हैं.
इसके विरुद्ध बांसकानाली गांव में पूर्व से मंझी थान होते हुए भी सरकार की तरफ से दूसरे मंझी थान का निर्माण कार्य पूर्व की सरकार ने शुरू किया.
किसी भी धर्म या संप्रदाय के धार्मिक व पूज्य स्थल के ऊपर अगल-बगल किसी भी तरह का कमरा नहीं बनाया जाता है.
लेकिन यहां सारे धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध मंझी थान का निर्माण कराया जा रहा है जो संताल धर्म और एसपीटी एक्ट के विरुद्ध है.
इतनी ज्यादा जमीन किस उद्देश्य से दी
चांद-भैरव मुर्मू जिवन अखड़ा की ओर से ग्रामीणों का कहना है कि एक मंझी थान के लिए 14 बीघा, 14 कट्ठा, 13 धूर जमीन की आवश्यकता ही नहीं होती है. फिर यहां इतनी अधिक भूमि किस उद्देश्य से दी गयी?
एसपीटी एक्ट के नियमानुसार प्रधान/मंझी बाबा अपना प्रधानी जोत जमीन, चारागाह, जाहेरथान, श्मशान, कब्रिस्तान आदि किसी को भी दान नही कर सकते हैं.
सरकार को अगर जमीन की जरूरत है तो ग्रामीणों को नोटिस देकर उसे अधिग्रहण करने का प्रावधान है. इसके बावजूद बांसकानाली गांव में संताल आदिवासी के धर्म और एसपीटी एक्ट के विरुद्ध मंझी थान बनवाया जा रहा है.
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ग्रामीणों ने हेमंत सरकार से क्या मांग की
पूर्व के सरकार में ही कई सामाजिक संगठनों ने रैली, प्रदर्शन और लिखित आवेदन के माध्यम से इस पर विरोध दर्ज कराया था लेकिन उस समय की सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की.
ज्ञात हो कि उस समय के प्रतिपक्ष नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने भी इसका विरोध किया था. चांद-भैरव मुर्मू जिवन अखड़ा और ग्रामीण वर्तमान सरकार से यह मांग करते हैं कि संताल आदिवासी के धर्म और एसपीटी एक्ट के विरुद्ध बने निर्माणाधीन मंझी थान को हटाया जाय और इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाये.
अगर वर्तमान सरकार ऐसा नही करती है तो उसके विरुद्ध व्यापक आन्दोलन गांव-गांव में चलाया जायेगा.
इस मौके में अशोक राणा,जोएल मुर्मू,चुड्की हांसदा,दुर्गी सोरेन,रासमुनि टुडू,दरोथी हेम्ब्रोम,मुन्ना हेम्ब्रोम,बिटी टुडू,संतोष टुडू,प्रेम मुर्मू,संतोष मुर्मू,सोम हेम्ब्रोम,बबलू मुर्मू,मैसा मुर्मू,अभीलाल मुर्मू,विनोद हेम्ब्रोम,गुलशन मुर्मू,एग्नासिस मुर्मू,मनोज मुर्मू के साथ काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
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