
Surjit Singh
चुनाव में जोरशोर से भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने वाली भारतीय जनता पार्टी और झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए उन्हीं की सरकार के मंत्री सरयू राय का बयान राजनीतिक विस्फोट है. सरयू राय ने कहा है कि उन्हें इस सरकार का मंत्री होने पर शर्मीदंगी महसूस हो रही है. सरयू राय के बयान से भाजपा में भारी हलचल पैदा हो गयी है और विपक्ष के लिए चुनावी प्रहार का हथियार मिल गया है.
भ्रष्टाचार को लेकर हमलावर रणनीति अपना कर भारतीय जनता पार्टी केंद्र ही नहीं राज्यों में भी सत्ता में आयी. झारखंड में भी भाजपा को लोगों ने इसी उम्मीद में सत्ता तक पहुंचाया कि शासन भ्रष्टाचारमुक्त होगा. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी शुरुआत में ही जीरो टॉलरेंस की बात कही. जिससे उम्मीद बंधी थी कि राज्य को भ्रष्टाचार से मुक्ति ना भी मिले. पर भ्रष्टाचार कम जरुर होगा. पर, अफसोस ऐसा हुआ नहीं.
शुरुआत में तो सब ठीक-ठाक चला. लेकिन ज्यादा दिन तक नहीं चला. जनप्रतिनिधि और आला अधिकारी ऑफ द रिकॉर्ड बातचीत में यह स्वीकारते हैं कि झारखंड में भ्रष्टाचार ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं. मुख्यमंत्री चाहे जितनी भी बार कह लें, उनका कार्यकाल बेदाग है, पर सच सबको पता है. मोबाइल घोटाला, कंबल घोटाला, हाईकोर्ट व विधानसभा भवन निर्माण का ठेका देने में गड़बड़ी के आरोप, राजबाला वर्मा को मुख्य सचिव बनाना, पुलिया निर्माण में गड़बड़ी, शाह ब्रदर्स को लौह अयस्क उत्खनन का आदेश देने, पलामू से साहेबगंज तक चल रहे कोयला-पत्थर के अवैध कारोबार में पुलिस के एक सीनियर अफसर की भूमिका, टीपीसी जैसे उग्रवादी संगठन के प्रति राज्य पुलिस व सरकार की नरमी, टीपीसी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारी अनिल पाल्टा को संटिंग पोस्ट देने जैसे कई मामले हैं, जो सरकार के बेदाग होने के दावे को खारिज करने के लिये काफी है. यह अलग बात है कि केंद्र सरकार की तरह राज्य सरकार भी अपने कार्यकाल में हुए गड़बड़ी के आरोपों की जांच कराने से गुरेज कर रही है. और खुद को बेदाग बता रही है.
इन दिनों एक बार फिर से सरकार के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय फॉर्म में हैं. सरयू राय वह शख्स हैं, एकीकृत बिहार के समय जिनकी भूमिका चारा घोटाला को उजागर करने में थी. जिन्होंने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के भ्रष्टाचार को उजागर किया था. नतीजा सबके सामने है. बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद औऱ मधु कोड़ा जेल गये. रघुवर सरकार में भी सरयू राय हमेशा खुलकर भ्रष्टाचार के मामलों का विरोध किया. सरकार के गलत फैसलों के खिलाफ मुख्यमंत्री को चिट्ठियां लिखी. लेकिन जीरो टॉलरेंस और बेदाग सरकार की बात करने वाले मुख्यमंत्री रघुवर दास ने उनकी चिट्ठियों पर कार्रवाई नहीं की. उल्टे राजबाला वर्मा जैसे भ्रष्टाचार के आरोपी अफसर को लंबे समय तक मुख्य सचिव की कुर्सी पर बैठाये रखा. विधानसभा के दो-दो सत्र स्वाहा हो गये, पर मुख्यमंत्री ने राजबाला वर्मा को नहीं हटाया. इतना ही नहीं सूचना एवं जन संपर्क विभाग ने तो राजबाला के रिटायरमेंट के बाद कैबिनेट की बैठक के हवाले उनकी तारीफ के झूठे कसीदे भी मीडिया को जारी कर दिये. सरयू राय ने इन सबका विरोध किया. राम कृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन को गलत तरीके से ठेका देने का भी विरोध किया. पर, अब सरयू राय को लगता है कि इस सरकार में रह कर वह भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर नहीं लड़ पा रहे हैं. एक सवाल उन पर भी उठ रहा है कि जब वह वर्ष 2017 से ही रघुवर सरकार में रहने को शर्म महसूस कर रहे हैं, तो दो साल तक मंत्री पद पर क्यों बनें रहें. क्यों अब इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं. अब तो रघुवर सरकार के कार्यकाल मात्र 10 माह ही बचे हैं. लोकसभा और विधानसभा चुनाव के कुछ ही समय पहले मंत्रीपरिषद का यह विवाद गंभीर हो गया है.
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