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“बेदाग सरकार” में “दाग” है 5400 घटिया मोबाइल, सखी मंडलों को भी बांटा गया था एक लाख घटिया फोन

राज्य के सखी मंडलों के बीच बांटा गया एक लाख स्मार्ट फोन. सरकार और सरकार के अफसरों का इस मामले में करीब डेढ़ साल तक चुप रहना संदेह पैदा करता है.

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Surjit Singh

झारखंड सरकार के मुखिया रघुवर दास यह बताते रहे हैं कि उनकी सरकार के चार साल का कार्यकाल “बेदाग सरकार” का रहा है. कोई दाग नहीं है. पर, आंगनबाड़ी सेविकाओं को घटिया मोबाइल खरीद कर देने का मामला झारखंड सरकार पर बड़ा “दाग” तो है ही. इससे भी बड़ा दाग है, राज्य के सखी मंडलों के बीच बांटा गया एक लाख स्मार्ट फोन. सरकार और सरकार के अफसरों का इस मामले में करीब डेढ़ साल तक चुप रहना संदेह पैदा करता है. यह घोटाले को ढंकने की कोशिश भी हो सकती है. सरकार यह भूल गयी है कि होर्डिंग्स, विज्ञापन और पोस्टर में खुद को “बेदाग सरकार” बताने भर से काम नहीं चलता. बेदाग होने के लिये दागदार बनाने वालों पर कड़ी कार्रवाई भी करनी होती है. इसके लिये जो इच्छा शक्ति चाहिए. अफसोस, डेढ़ साल में सरकार ने वह इच्छाशक्ति नहीं दिखायी.

14 अक्टूबर 2017 को ही न्यूज विंग ने तीन खबरें प्रकाशित की थीं. जिसमें सखी मंडल की महिलाओं ने साफ-साफ कहा था कि स्मार्ट फोन के नाम पर उन्हें झुनझुना थमाया गया. कार्बन कंपनी का मोबाइल बांटा गया. जो आउटडेटेड तो थे ही और ठीक से काम भी नहीं करते थे. किसी का चार्जर काम नहीं करता था तो किसी का स्क्रीन. जो मोबाइल चार्ज भी होता था, उसकी बैट्री दो-तीन घंटे में ही खत्म हो जाती थी. सखी मंडल की एक लाख महिलाओं को मोबाइल फोने देने की योजना की शुरुआत 8 मार्च 2017 को धुर्वा के जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने की थी. इस कार्यक्रम पर सरकार के नौ करोड़ खर्च हुए थे. इसके बाद सरकार के दूसरे मंत्रियों ने अलग-अलग जिलों में जाकर महिलाओं के बीच करीब एक लाख स्मार्ट फोन बांटे थे.

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महिलाओं को दिये गये थे घटिया क्वालिटी के Karboon K9 4G स्मार्ट फोन

– 3.2 MP Rear Camera, 1.3 MP Front Camera

– 12.7 cm (5) FWVGA Screen Capacitive Touch 854 x 480 pixels resolution Vibrator Mode

– K9 Smart has a 1.2 GHz Dual Core CPU, 1 GB RAM, and 8 GB Storage (with 32 GB expandable memory)

– Dual Sim Support

– 2300mAH Li-ion Battery

मोबाइल में जो शिकायत थी

–              फोन से ठीक तरह से लंबी देर तक बात भी नहीं हो सकती थी.

–              मोबाइल का चार्जर ऐसा है, जिससे मोबाइल चार्ज ही नहीं होता था.

–              सरकार ने मोबाइल के लिए ऐसी कंपनी चुनी, जिसका राजधानी रांची में ना ही आउटलेट था  और ना ही सर्विस सेंटर.

–              किसी भी तरह का डाउनलोड अच्छी तरह से नहीं होता था.

–              मेमोरी की समस्या हमेशा बनी रही.

–              मोबाइल का कोई भी ऐप सही से काम नहीं करता था.

इन कामों के लिये दिये गये थे मोबाइल फोन, हुआ कुछ नहीं

–              स्वलेखा में इंट्री के लिये

–              भीम एप के माध्यम से ट्रांजेक्शन के लिये

–              गांव में ग्रामीण महिलाओं को स्मार्टफोन देकर उन्हें मोबाइल एडवाइजरी सर्विस के साथ जोड़ना.

–              ध्वनि संदेश के माध्यम से खेती, सरकारी योजना औऱ मौसम की जानकारी गांव तक पहुंचाना.

–              ई-किसान एप के जरिये पशु सखी और आजीविका कृषक मित्र हर तरह का आंकड़ा आनलाइन औऱ आफलाइन में देख सकें.

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