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डीजीपी डीके पांडेय ने डेढ़ साल पहले टीपीसी की वसूली रोकने के लिए नहीं की कार्रवाई !

न्यूज विंग के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे हैं, जिससे यह साफ होता है कि राज्य का पुलिस महकमा चाहता ही नहीं था कि कोलियरियों में हो रही अवैध वसूली पर रोक लगे.

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Akshay kumar jha

Ranchi: चतरा के आम्रपाली-मगध और पिपरवार समेत अन्य कोलियरियों में उग्रवादी संगठन टीपीसी द्वारा की जा रही अवैध वसूली की जांच नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) कर रही है. जांच इस बात की हो रही है कि इन कोलियरियों से टीपीसी उग्रवादी अवैध वसूली करते थे या नहीं. न्यूज विंग के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे हैं, जिससे यह साफ होता है कि राज्य का पुलिस महकमा चाहता ही नहीं था कि कोलियरियों में हो रही अवैध वसूली पर रोक लगे. यह आरोप महकमें के शीर्ष पद पर बैठे डीजीपी डीके पांडेय पर है.

टंडवा में हर महीने करोड़ों रुपए की अवैध वसूली टीपीसी के उग्रवादी करते रहे और पुलिस उन्हें संरक्षण देती रही. यह बात सीआईडी की उस जांच के बाद और पुख्ता हो गयी थी, जिसमें साफ तौर से खुलासा किया गया था कि यहां हर डीओ होल्डर और हर ट्रक मालिकों से अवैध वसूली की जाती है. जितने भी ट्रांसपोर्टर कोयले की ट्रांसपोर्टिंग करते हैं, सबका संचालन वहां की लोकल सेल कमेटी करती है. इन लोकल सेल कमेटियों का बागडोर टीपीसी के सरगना के पास हुआ करती है. सीआईडी की ऐसी गंभीर रिपोर्ट के खुलासे के बाद भी पुलिस महकमा शांत रहा. इस रिपोर्ट के मिलने के बाद डीजीपी डीके पांडेय ने अवैध वसूली रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की. अगर कोई कार्रवाई की भी थी, तो वह काफी नहीं था. और न ही कार्रवाई सार्वजनिक हुई.

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डीजीपी और एडीजी ने नहीं दी प्रतिक्रिया

सीआईडी की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद न्यूज विंग ने 11 अक्टूबर को डीजीपी डीके पांडेय और एडीजी सीआईडी अजय कुमार सिंह को प्रश्नावली भेजी थी. प्रश्नावली दोनों अधिकारियों के आधिकारिक मेल आईडी पर भेजी गयी. लेकिन अब तक उनका जवाब नहीं आया है. जवाब आने पर उसे भी प्रकाशित किया जायेगा. न्यूज विंग ने दोनों अधिकारियों से फोन करके भी संपर्क करने की कोशिश की. डीजीपी डीके पांडेय ने फोन रिसिव नहीं किया और एडीजी सीआईडी अजय कुमार सिंह ने सिर्फ इतना कहा कि मैं देखता हूं.

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हजारीबाग आयुक्त की चिट्ठी पर सीआईडी ने की थी जांच

चतरा के टंडवा निवासी सुधीर प्रसाद नामक व्यक्ति ने हजारीबाग आयुक्त को एक चिट्टी लिख कर कहा कि आम्रपाली-मगध और पिपरवार में टीपीसी अवैध वसूली कर रहा है. करोड़ों रुपए की अवैध वसूली रोजाना हो रही है. इन पैसों से मेट्रो शहरों में वसूली करने वाले अकूत संपत्ति बना रहे हैं. सुधीर प्रसाद ने चतरा के तत्कालीन एसपी अंजनी कुमार झा पर भी वसूली में शामिल होने का आरोप लगाया था. 04 जनवरी 2017 को हजारीबाग के तत्कालीन आयुक्त डॉ प्रदीप कुमार ने एडीजी (सीआईडी) को एक खत लिखकर इस बात की जानकारी दी. साथ ही पूरे मामले की जांच करने का आग्रह किया. हजारीबाग आयुक्त के इस चिट्ठी के बाद सीआईडी ने आरोपों की जांच की. जांच में जो तथ्य सामने आये वह चौंकाने वाला था. जानकारी के मुताबिक सीआईडी ने जांच रिपोर्ट डीजीपी को भेज दी. लेकिन उस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

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सीआईडी जांच में जो तथ्य सामने आये : –

हजारीबाग के आयुक्त की चिट्ठी के बाद सीआईडी ने पूरे मामले की जांच करना शुरू किया. 22 अप्रैल 2017 को डीएसपी (सीआईडी) हजारीबाग ने एसपी (सीआईडी) को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी. 11 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट में डीएसपी ने जो लिखा है.

–              तीन लोगों से हुई पूछताछ में यह साफ हुआ कि कोलियरी में ट्रांसपोर्टेशन करने वाली लोकल कमेटी डीओ होल्डर से 254 रुपए प्रति टन की वसूली करती है.

–              आम्रपाली के जीएम से सीआईडी ने पूछा कि क्या आपको भी इस 254 रुपए प्रति टन में से 39 रुपए मिलते हैं. हालांकि जीएम ने इस बात से इनकार किया.

–              आम्रपाली-मगध परियोजना में बड़ी-बड़ी कंपनियां कोयला खरीदती हैं. जिसे ट्रांसपोर्टर रेलवे साइडिंग तक पहुंचाते हैं. इसी दौरान टीपीसी लेवी वसूलता है.

–              कोलियरी में कोयला ट्रांसपोर्टिंग के लिए शांति समिति या संचालन समिति का गठन किया गया है. जिसमें अध्यक्ष सचिव और कई सदस्य होते हैं. आम्रपाली परियोजना समिति की देखरेख टीपीसी के सुप्रीमो करते हैं.

–              टीपीसी के सरगना का खास एक सीसीएल कर्मी हैं, जिसे पिपरवार से आम्रपाली जीएम ने तबादला करा कर लाया है. इस शख्स का आपराधिक इतिहास रहा है.

–              संचालन समिति के कई सदस्यों के नाम से टंडवा थाने में आपराधिक मामले दर्ज हैं.

–              इस परियोजना से लगभग 35 से 40 हजार टन कोयला का उठाव रोज होता है. जिसमें समिति 254 रुपया प्रति टन के हिसाब से वसूली करती है.

–              लेवी का पैसा समिति के सदस्य, लोडर,  टीपीसी उग्रवादी संगठन,  जीएम सीसीएल,  सिक्योरिटी बोर्ड,  प्रदूषण,  मीडिया और इसके अलावा स्थानीय पुलिस के बीच बांटे जाने की बात सामने आयी है. अधिकांश राशि टीपीसी और जीएम सीसीएल को मिलने की बात सामने आई है.

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डीओ लगाती है कंपनियां, टीपीएस समर्थक करते हैं ट्रांसपोर्टिंग

सीआईडी की जांच रिपोर्ट में इस बात का साफ उल्लेख हैं कि कोलियरी में डीओ लगाने यानी कोयला खरीदने का काम बड़ी-बड़ी कंपनियां करती हैं और इसे ट्रांसपोर्ट करने का काम टीपीसी समर्थक करते हैं. रिपोर्ट में आधुनिक,  हिंडालको, बजाज ग्रुप,  बीकेजी, राहुल कार्बन,  नेशनल परिवहन जैसी कंपनियों के नाम हैं, जिसका कोयला ट्रांसपोर्ट करने का काम टीपीसी समर्थक करते हैं.

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मगध-आम्रपाली की सहयोगी कंपनियां टीपीसी की

सीआईडी की रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि मगध-आम्रपाली की जो भी सहयोगी कंपनियां हैं, वह टीपीसी की हैं. रिपोर्ट में वेदांता इंटरप्राइजेज,  गणपति इंटरप्राइजेज,  मां गंगे कोल ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड, टीडी इंटरप्राइजेज, एआर इंटरप्राइजेज,  मां इंटरप्राइजेज, गणगोपाल इंटरप्राइजेज आदि के नाम शामिल हैं. सीआईडी की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि इनमें से ज्यादातर कंपनियां टीपीसी के सगरना और उनके सदस्यों के हैं.

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अशोका और पिपरवार की भी यही कहानी

सीआईडी की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि अम्रपाली-मगध की ही तर्ज पर अशोका और पिपरवार में संचालन समिति का गठन किया गया है. सभी कोलियरियों में डीओ धारक से 254 प्रति टन डीओ होल्डर से लिए जाते हैं. साथ ही लंबी दूरी की ट्रांसपोर्टिंग के लिए 3200 रुपए और कम दूरी की ट्रांसपोर्टिंग के लिए 2200 रुपए लिए जाते हैं.

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डीजीपी से जो सवाल पूछे गयेः-

1)    क्या 04.01.2017 को प्रमंडलीय आयुक्त, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग की तरफ से एडीजी (सीआईडी) को मगध-आम्रपाली और पिपरवार में करोड़ों की अवैध वसूली की जांच करने के लिए कोई पत्र लिखा गया.

 

2)    क्या 22.04.2017 को क्षेत्रीय पुलिस उपाधीक्षक (अपराध अनुसंधान विभाग, हजारीबाग) ने पुलिस अधीक्षक अपराध अनुसंधान विभाग, हजारीबाग) को इसी संबंध में कोई रिपोर्ट भेजी थी.

 

3)    इस रिपोर्ट को सीआईडी की तरफ से डीजीपी कार्यालय यानि आपको सौंपा गया या नहीं.

 

4)    अगर सीआईडी ने आपको रिपोर्ट सौंपी थी, तो आपके स्तर से क्या कार्रवाई की गयी ?

 

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एडीजी सीआइडी से जो सवाल पूछे गयेः-

1)            क्या आपको 04.01.2017 को प्रमंडलीय आयुक्त, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग की तरफ से झारखंड राज्य के आंतरिक संसाधन का अवैध रूप से दोहन एवं काली कमाई कर राजस्व की क्षति पहुंचाने में पुलिस प्रशासन एवं स्थानीय ठेकेदार की मिलीभगत के संबंध में जांच करने के लिए कोई चिट्ठी आयी है. इस चिट्ठी के साथ सुधीर प्रसाद का आवेदन संलग्न है, जो उन्होंने आयुक्त को जांच के लिए दी थी.

2)            क्या 22.04.2017 को क्षेत्रीय पुलिस उपाधीक्षक (अपराध अनुसंधान विभाग, हजारीबाग) ने पुलिस अधीक्षक अपराध अनुसंधान विभाग, हजारीबाग) को इसी संबंध में कोई रिपोर्ट भेजी थी.

 

3)            क्या यह बात सच है कि रिपोर्ट के मुताबिक मगध-आम्रपाली और पिपरवार कोलियरियों में प्रति टन 254 रुपए डीओ होल्डर से विस्थापितों के नाम पर लिया जाता था.

 

4)            क्या यह बात सच है कि रिपोर्ट के मुताबिक लंबी दूरी के लिए 3200 रुपए और छोटी दूरी के लिए 2200 रुपए प्रति ट्रक मालिकों से लिए जा रहे हैं.

5)            क्या यह बात सच है कि इन अवैध वसूली में रिपोर्ट के मुताबिक टीपीसी (तृतीय प्रस्तुती कमेटी) का हाथ है.

 

6)            क्या यह बात सच है कि इन कोलियरियों में लोकल सेल संचालन करने वाली कमेटी का अध्यक्ष और सदस्य टीपीसी के उग्रवादियों के साथ साठ-गांठ कर ऐसा कर रहे हैं.

 

7)            रिपोर्ट के मुताबिक क्या यह बात सच है कि वसूली का पैसा उग्रवादियों के साथ कोलियरी के आला अधिकारियों के बीच बंटता था.

 

8)            आपने यह रिपोर्ट आगे किसी को भेजी या नहीं.

 

9)            अगर आगे रिपोर्ट भेजी तो, रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई हुई या नहीं.

 

10)          रिपोर्ट की सारी बात सही थी तो आपने अपने स्तर से एफआईआर क्यों नहीं किया.            

 

 

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