
Ranchi : राज्य के सरकारी स्कूलों में बांटी गयी किताबों की गुणवत्ता की जांच की जायेगी. इसके लिए सभी जिलों से विभिन्न क्लास की किताबें मंगायी जायेगी.
इस बाबत जेसीइआरटी की ओर से सभी जिलों को पत्र लिखकर सैंपल भेजने को कहा गया है. इस सैंपल मंगाये जाने के बाद किताबों की छपाई, बाइंडिंग और पेपर क्वालिटी देखी जायेगी.
किताबों की सैंपलिंग में गड़बड़ी मिली तो संबंधित प्रकाशकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जायेगी. इसके लिए झारखंड शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने सभी जिलों को निर्देश दिये हैं.
परियोजना निदेशक उमाशंकर सिंह ने प्रकाशकों की ओर से उपलब्ध करायी गयी पहली से दसवीं क्लास की किताबों की सैंपलिंग करने को कहा है.
ऐसे में रैंडमली किसी भी विद्यालय से किताब लेकर उसकी सैंपलिंग मुख्यालय में भेजी जाये, ताकि उसकी जांच हो सके. हर जिला को एक से दो सेट किताबें लाने के लिए कहा गया है.
किताब की गुणवत्ता में गड़बड़ी पाये जाने पर प्रकाशकों की राशि में कटौती की जायेगी. साथ ही उन्हें अगले साल काम भी नहीं दिया जायेगा.
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हर जिला से अलग-अलग क्लास की किताबें भेजने का निर्देश
सभी जिलों को अलग-अलग क्लास की किताबें भेजने को कहा गया है. बोकारो व देवघर जिले को पहली क्लास, धनबाद व साहिबगंज को दूसरी क्लास, चतरा व लोहरदगा को तीसरी क्लास, गिरिडीह व पाकुड़ को चौथी क्लास, गढ़वा व कोडरमा को पांचवी क्लास और गुमला व जामताड़ा को छठी क्लास की दो-दो सेट किताबें देने को कहा गया है.
वहीं, रांची व पश्चिमी सिंहभूम को सातवीं क्लास, दुमका व सिमडेगा को आठवीं क्लास, हजारीबाग व पूर्वी सिंहभूम को नौवीं क्लास और गोड्डा व सरायकेला-खरसावां जिले को दसवीं क्लास की एक-एक सेट किताबें सैंपल के रूप में देने को कहा गया है.
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पहली से दसवीं के बच्चों को मिलती हैं किताबें
शिक्षा के अधिकार के तहत पहली से आठवीं के सभी छात्र-छात्राओं को निशुल्क किताबें मिलती हैं. वहीं, नौवीं व 10वीं की सिर्फ छात्राओं को ही फिलहाल किताबें मिल रही हैं. छात्रों को भी किताबें देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
कोरोना महामारी और लॉक डाउन की वजह से स्कूलों के बंद रहने पर इसी महीने से बच्चों को स्कूल में ही किताबें उपलब्ध करायी जा रही हैं.
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