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पुलिस मुखबिरी जान पर भारी, सुरक्षा के अभाव में साल भर में मारे गए 22 मुखबिर

Saurav Singh

Ranchi: पुलिस को चप्पे-चप्पे की जानकारी मिले, इसलिए पुलिस अनाधिकृत तौर पर मुखबिरों को बहाल करती है. नक्सली गतिविधि और दूसरी ऐसी खबरों के बदले पुलिस की तरफ से मुखबिरों को कुछ इनाम भी मिलता है.

इनाम में क्या और कितना मिलता है, यह भी सरकार के रिकॉर्ड में नहीं होता. नक्सली इलाकों में मुखबिरों की ही वजह से पुलिस को कई बार बड़ी कामयाबी मिलती है. लेकिन इस बात की जानकारी नक्सलियों को अगर हो जाती है, तो फिर वो खबर देने वाले मुखबिर से बदला जरूर लेते हैं.

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मुखबिरों की सुरक्षा का भी जिम्मा पुलिस पर ही होता है. लेकिन ऐसा देखा जा रहा है कि बीते एक साल में पुलिस ने मुखबिरों की सुरक्षा में ढील बरती है. नतीजा यह है कि बीते एक साल करीब 22 मुखबिर मौत के घाट उतार दिए गए.

मुखबिरों की लगातार हो रही मौत, उस दौर की याद दिलाती है जब चतरा में एक-के-बाद-एक मुखबिरों की मौत हो रही थी.

चतरा में होने लगी थी मुखबिरों की हत्या

पिछले 15 दिनों की बात करें तो इस दौरान जहां नक्सलियों ने गिरिडीह में पुलिस का मुखबिर बता कर दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी.

वहीं चतरा में पुलिस का मुखबिर बताकर एक व्यक्ति की गला रेत कर हत्या कर उसके शव को जंगल में फेंक दिया.
पिछले एक साल के दौरान झारखंड में पुलिस मुखबिर बता कर नक्सलियों ने 22 लोगों की हत्याएं की है.

कुछ साल पहले की बात है. अचानक से चतरा जिले में मुखबिरों की हत्या होने लगी थी. ऐसा चतरा एसपी अब्दुल गनी मीर के तबादले के बाद होने शुरू हो गए थे.

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तबादले के बाद जब सीपी किरण चतरा के एसपी बने तो मुखबिरों की सुरक्षा को लेकर उनपर ऊंगली भी उठी. लेकिन बात संभलते-संभलते कई मुखबिरों को अपनी जान गंवानी पड़ गयी थी.

स्थानीय नागरिकों पर भी कहर बन कर टूट रहा नक्सलवाद
पिछले एक साल के दौरान, झारखंड में 22 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट सिर्फ इसलिए उतार दिया गया कि वे पुलिस की मुखबिरी करते थे. दरअसल, स्थानीय नागरिकों पर भी नक्सलवाद कहर बन कर टूट रहा है.

मुखबिर को सुरक्षा देने में पुलिस नाकाम 

पुलिस अपने लिए मुखबिरी का काम करने वाले लोगों को सुरक्षा तक नहीं दे पाती है. इसका हाल में ही एक उदाहरण सामने आया है. चतरा में नक्सलियों के हाथों मारे गए राजकुमार सिंह भोक्ता ने खुद की जान खतरे में होने की जानकारी चतरा पुलिस को दी थी.

लेकिन इसके बावजूद भी राजकुमार सिंह को किसी भी प्रकार की सुरक्षा नहीं दी गई. हत्या की आशंका जताने के दो दिन ही बात राजकुमार सिंह भोक्ता की नक्सलियों ने गला रेत कर हत्या कर दी.

कहां हुए कितने मुखबिरों की हत्याएं

झारखंड में पिछले 1 साल के दौरान पुलिस का मुखबिर बताकर 22 लोगों की नक्सलियों ने हत्या कर दी. जिनमें रांची में 3,चाईबासा में 4,खूंटी में 5,सिमडेगा में 4 , गिरिडीह में 4 और चतरा में 2 लोगों की हत्याएं शामिल हैं. नक्सलियों का कहना है कि पुलिस की मुखबिरी करने वाले लोगों को खोज कर उसे सजा दी जाएगी.

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पिछले 15 दिनों के अंदर पुलिस मुखबिर बता तीन लोगों की हत्याएं

14 अप्रैल- गिरिडीह डुमरी थाना अंतर्गत उग्रवाद प्रभावित जरीडीह पंचायत के कानाडीह गांव में देर रात आए नक्सलियों ने गांव में अपने घर के बाहर सो रहे चुड़का सोरेने उर्फ रागा को पुलिस का मुखबिर बताकर गोली मारकर हत्या कर दी.

16 अप्रैल- गिरिडीह में पीरटांड़ थाना क्षेत्र के बांध पंचायत अंतर्गत केंदुआडीह बस्ती निवासी व आम आदमी पार्टी (आप) के नेता चुड़का बास्के की नक्सलियों ने रात में पुलिस का मुखबिर बता कर गोली मारकर हत्या कर दी.

27 अप्रैल- चतरा के राजपुर थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी की बात करते हुए एक शख्स की हत्या कर दी. मृतक का नाम राजकुमार सिंह भोक्ता है. जिसे गला रेत कर नक्सलियों ने मार डाला. मृतक मूल रूप से बिहार के टीलेहेताड गांव का रहने वाला था.

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