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राजधानी में जमीन पर कब्जा करने का चल रहा खेल, हो रही हैं हत्याएं

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Ranchi: राजधानी रांची में जमीन का धंधा जानलेवा बनता जा रहा है. हाल के दिनों में जमीन विवाद के चलते हत्याओं का सिलसिला बढ़ा है. इससे पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो रहे हैं. जमीन विवाद के चलते लगातार हो रही हत्याओं से शहरवासियों का पुलिस के ऊपर से भरोसा उठता जा रहा है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक झारखंड बनने के बाद सिर्फ रांची में जमीन विवाद के चलते 300 से ज्यादा लोगों की हत्या हो चुकी है. पिछले दो साल के आंकड़ों पर गौर करें, तो इस दौरान रांची में जमीन विवाद को लेकर हत्याओं की घटना में बढ़ोतरी हुई है.

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ग्रामीण क्षेत्रों की हत्याओं के मामले 

रांची से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के जमीन विवाद मामले में ज्यादातर हत्याएं हो रही हैं. कांके, ओरमांझी, नगड़ी, नामकुम व रातू जैसे ग्रामीण इलाके सेमी अर्बन हो गए हैं. यहां जनरल व सीएनटी एक्ट से प्रभावित जमीन की खरीद-बिक्री सबसे अधिक हो रही है. यहां के जमीनों को विवादित बनाने का खेल जोरों पर हो रहा है. इसकी वजह से जमीन पर कब्जा दिलाने और कब्जा करने का खेल फल फूल गया है. इस धंधे में अंचल के कर्मचारी-पदाधिकारियों की भी मिलीभगत होती है. इस खेल में पुलिस की मुख्य भूमिका होती है. क्योंकि, सभी थाना की पुलिस को संबंधित क्षेत्र में जमीन के कारोबार से जुड़े लोग व विवाद की जानकारी होती है. यह जानने के बाद भी पुलिस अपना हिस्सा ले कर शांत हो जाती है.

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कागजात से शुरू होता है गड़बड़ी का खेल 

एक ही जमीन की रजिस्ट्री कई लोगों के साथ हुई रहती है. क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई पीढ़ी के बीच कानूनी बंटवारा नहीं हो पाता है. ऐसे में जमीन का कोई भी हिस्सेदार किसी भी भूखंड को बेच देता है. जब खरीदार उस पर कब्जा लेने जाता है तो, अन्य हिस्सेदार लोग विरोध करने लगते हैं. इसके बाद विवाद बढ़ जाता है और नौबत हत्या तक पहुंचती है.

एक ही जमीन को कई बार बेचा जाता है 

एक ही जमीन को कई दलाल कई लोगों को बेचते हैं. इस काम में रजिस्ट्री ऑफिस के पदाधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत होती है. इनकी मदद से आदिवासी, गैर मजरुआ जमीन की भी रजिस्ट्री आसानी से हो जाती है. जमीन लेने के बाद खरीदार म्यूटेशन के लिए अंचल कार्यालय जाते हैं और यहां जो सबसे अधिक चढ़ावा देता है, उसके नाम से म्यूटेशन हो जाता है.

म्यूटेशन के बाद जमीन पर दबंगई से कब्जा होता है. इसमें स्थानीय जमीन दलाल, नेता और पुलिस की भूमिका होती है और जो  विरोध करते हैं उसको मार दिया जाता है.

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ज्यादातर हत्या जमीन विवाद के कारण होती है 

संपत्ति विवाद में होनेवाली  हत्याओं में आधे से अधिक जमीन विवाद के कारण होती है. इसमें जमीन कारोबारी, जमीन की दलाली करनेवाले, खरीदार और बिक्री करनेवालों के अलावा जमीन को लेकर परिवार के सदस्यों द्वारा की गयी हत्याएं भी शामिल हैं.

जमीन विवाद हत्याओं में रांची अव्वल

जमीन विवाद में हुई हत्याओं का जिलावार आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन सबसे ज्यादा हत्याएं रांची जिले में होती रही हैं. इसके बाद जमशेदपुर और धनबाद का स्थान आता है. रांची में झारखंड बनने के बाद 300 से ज्यादा हत्या जमीन विवाद को लेकर हुई हैं.

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पुलिस के अफसर भी जमीन कारोबार में रहते हैं शामिल

पुलिस अधिकारी भी जमीन के कारोबार में शामिल रहते हैं. पुलिस के अधिकारी भी जमीन कारोबारी की मदद में खड़े हो रहते हैं. पुलिस के पास जमीन पर चल रहे काम पर रोक लगाने और धारा 144 लगा कर इसकी जानकारी एसडीओ कोर्ट को देने का अधिकार है. कई पुलिस अधिकारी इसका फायदा उठाते हैं. पैसे लेकर मजबूत व्यक्ति के पक्ष में काम करते हैं. कभी 144 लगाने की कार्रवाई तुरंत कर देते हैं, तो कई बार इसके लिए कई दिन लगा देते हैं. इस दौरान जमीन पर कब्जा हो जाता है. फिर 144 लगाने का फायदा दबंगों को मिल जाता है. करीब चार साल पहले ऐसे संदिग्ध पुलिस पदाधिकारियों की सूची भी तैयार की गयी थी. जांच का आदेश भी हुआ. सीआईडी को जांच का जिम्मा दिया गया था.

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जमीन विवाद में हत्या और फायरिंग की घटनाएं 

01 मार्च 2018: नामकुम थाना क्षेत्र के लोवाडीह निवासी जमीन कारोबारी अंकुश कुमार उर्फ आशीष बड़ाइक पर दुर्गा सोरेन चौक के पास फायरिंग.

15 मार्च 2018: चुटिया थाना क्षेत्र के पावर हाउस चौक निवासी अरुण नाग की जमीन विवाद में गोली मारकर हत्या.

06 मार्च 2018: लोअर बाजार थाना क्षेत्र के कुरैशी मुहल्ला में गढ़ा टोली की जमीन विवाद में कुरैशी मोहल्ला निवासी सलाम खान की गोली मार कर हत्या.

03 अप्रैल 2018: कांके थाना के बुकरू में जमीन पर बाउंड्री कराने के एवज में रंगदारी नहीं देने पर व्यवसायी मनोज कुमार की पत्थर से कूच कर हत्या.

01 फरवरी 2018: पुंदाग ओपी क्षेत्र के साहू चौक निवासी जमीन कारोबारी काशीनाथ महतो पर जमीन कारोबार के रुपये के विवाद में अशोक नगर गेट नंबर चार के पास फायरिंग.

21 जनवरी 2018: नगड़ी थाना क्षेत्र के गुटुवा बस्ती में जमीन कारोबारी उमेश गंझू और शमशाद की गोली मार कर हत्या.

22 जनवरी 2018: रातू थाना क्षेत्र के जमीन कारोबारी सुंडील निवासी शंकर काशी की अपराधियों ने चटकपुर में गोली मार कर हत्या कर दी.

16 सितंबर की रात के बीजेपी रातू मंडल के महामंत्री देवेंद्र सिंह पर भी अज्ञात अपराधियों ने गोली चलाई थी लेकिन वह इस घटना में बाल-बाल बच गए इस घटना के पीछे भी जमीन विवाद का मामला सामने आ रहा था.

17 सितंबर को मोहम्मद तबरेज उर्फ राजा की गोली मारकर हत्या कर दी गई हत्या के पीछे जमीन विवाद का मामला सामने आ रहा है.

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