
Dhanbad: खबरदार जो किसी ने स्क्रैप कारोबारी के धंधे में टांग अड़ाया. सिंदरी के विधायक फूलचंद मंडल इस कारोबार में अपने खास हिस्से के लिए धरना पर बैठे थे. अपने लोगों को काम देने की मांग कर रहे थे, लेकिन एफसीआई सिंदरी खाद कारखाना के स्क्रैप का ठेका लेनेवाली मुंबई की मेहता ट्रेडिंग कंपनी के लोगों के लिए उनसे सलटना चुटकी का खेल बना.
बता दें कि तीन दिन बाद कहीं से फोन आया और विधायक ने सरेंडर कर दिया. चुपचाप तंबू से चले गये. कंपनी का काम यहां कोई याकूब देख रहा है. उसने नीचे से लेकर ऊपर तक के लोगों को मैनेज कर रखा है. प्रशासन से लेकर स्थानीय गुंडा, सफेदपोश तक उनकी मुट्ठी में है. यहां लोगों को भयभीत करने के लिए गोलियां चल रही है. पुलिसवाले खानापूर्ति कर चले जाते हैं.
हर्ल की यूनिट के बहाने क्या खेल चल रहा है?

यह गंभीर सवाल है, कि क्या कई पब्लिक सेक्टर को मिलाकर बनायी गयी हर्ल कंपनी यहां खाद उत्पादन करेगी कि, उसके बहाने पुराने सिंदरी प्लांट के करीब 2000 करोड़ रुपये मूल्य के पुराने कारखाने का स्क्रैप करीब दो सौ करोड़ रुपये में बेचकर ऊच्च स्तर पर कमीशन का बड़ा खेल हुआ है. इस खेल पर परदा डालने के लिए सिंदरी में नया खाद कारखाना खोलने की सरकार ने घोषणा की है?
सिंदरी के साथ बरौनी, गोरखपुर में नया खाद कारखाना खोलने की सरकार ने घोषणा की है. इस घोषणा के अनुरूप दिसंबर 2020 तक सभी कारखाना में उत्पादन शुरू हो जाना है. जहां तक बात नौ सौ करोड़ मिलियन डॉलर की प्रस्तावित सिंदरी कारखाना की है. इसे स्थापित करने का ठेका एल एंड टी कंपनी ने लिया है. फ्रांस की एक कंपनी प्लांट का अलग-अलग पार्ट सप्लाई करेगी, उसे एसेम्बल कर कारखाना तैयार किया जाना है.
क्या बन रहा है प्लांट?
कारखाना गैस पर आधारित होगा और हर्ल की हिस्सेदार कंपनी इंडियन ऑयल लिमिटेड इसके लिए गैस पाइप लाइन बिछाएगी. लेकिन इसकी कहीं सुगबुगाहट नहीं है. प्लांट जहां स्थापित करना है, वहां पुराने प्लांट का ढांचा अब तक पड़ा है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ महीने पहले यहां आकर एक भव्य समारोह में कारखाना का शिलान्यास किया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने हर्ल के सिंदरी प्रोजेक्ट को 421 करोड़ रुपया कर्ज देने की घोषणा की. हर्ल के अन्य प्रस्तावित प्लांट को मिलाकर कुल 2000 करोड़ रुपये से अधिक कार्यकारी कर्ज देने की केंद्र सरकार ने घोषणा की.
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केंद्र सरकार की यह नयी घोषणा इस विश्वास को बल देने का प्रयास कहा जा सकता है, जो नया कारखाना खोलने की घोषणा के अमल पर शक कर रहे हैं. ऐसे लोगों का दावा है कि जितनी भी पब्लिक सेक्टर की कंपनी मिलाकर हर्ल बनी है. उनमें से कोल इंडिया और एनटीपीसी की हालत खस्ता है. इन कंपनियों का शेयर भविष्य में अडाणी को बेचा जा सकता है?अडाणी कंपनी के लोगों ने यहां का मुआयना किया था. इसके बाद सिंदरी कारखाने को चलाने के लिए टेंडर डाला था.
मगर, सिंगल बिडिंग के कारण सरकार को बाद में टेंडर प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा. सत्ता विरोधी दल के लोगों को यकीन है कि आखिर सिंदरी पर अडाणी कंपनी का ही कब्जा होगा. इसी की प्रक्रिया चल रही है. हर्ल का कंपनी एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन है इसलिए इसका शेयर कभी भी किसी को बेचा जा सकता है. सिंगल बिडिंग के कारण भले अडाणी की कंपनी को सिंदरी की बेशकीमती जमीन नहीं मिली, लेकिन हर्ल बना कर उसी प्रक्रिया को सरकार ने आगे बढ़ाया है. विरोधी ऐसी बात करते हैं तो उनके तर्क को नकारा नहीं जा सकता है.
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स्क्रैप की लूट का मामला
कोई भी चीज जब पुरानी पड़ जाती है तो वैल्यूअर बीते साल से भाग देकर उसकी कीमत कम करते हैं. लेकिन क्या सोना, प्लेटिनम, पीतल आदि मेटल का दाम कम हुआ या बहुत ज्यादा बढ़ा? सिंदरी के पुराने प्लांट खासकर इसके प्रिलिंग टावर में बेशकीमती धातुओं का इस्तेमाल किया गया है. इसकी बढ़ती कीमत की उपेक्षा कर खाद कारखाने की डिजाइनिंग करनेवाले केंद्र सरकार के प्रतिष्ठान पी एंड डी के अधिकारियों ने पुराने कारखाने के ढांचे की मेटल की बढ़ी कीमत की तुलना में एकदम मामूली वैल्यू निकाली.
ऐसा ऊपरी दबाव और स्वार्थ में किया गया. स्क्रैप का ठेका लेनेवाली कंपनी का जलवा देखकर कोई भी समझ सकता है कि केंद्र सरकार या इसे संचालित करनेवाली बड़ी ताकत इसके साथ है. पी एंड डी के अधिकारियों का स्क्रैप लेनेवाली कंपनी से सीधा सरोकार अब भी है. इस कंपनी के काम में कोई बाधा नहीं डाल सकता. हर कोई कंपनी के चांदी के जूते से घायल है. वैसे भी पहुंचवाली इस कंपनी के खिलाफ कोई बोल नहीं सकता. यहां पुराने कारखाने का स्क्रैप ठिकाने लगाने के लिए करीब सात सौ मजदूर काम कर रहे हैं. इनमें स्थानीय नाम मात्र के हैं.
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स्क्रैप के साथ निकलनेवाला जहरीला रसायन जहां-तहां सड़क किनारे फेंका जा रहा है. लेकिन किसकी मजाल जो चूं तक बोले. नया कारखाना बनने की अब तक भले सुगबुगाहट नहीं है. पर इसके बहाने करोड़ों का स्क्रैप कौड़ियों के भाव ठिकाने लगाकर सत्ता को संचालित करनेवालों को सुनहरा मौका जरूर हाथ लग गया है. यदि नया कारखाना बनाने की बात नहीं होती तो लोगों का ध्यान पुराने कारखाने के स्क्रैप लूट की ओर जाता. दस तरह के सवाल होते.
इस मामले में विपक्ष भी मुखर नहीं. विपक्ष के स्थानीय नेताओं को भी चांदी की जूती सुंघायी गयी है. यह कहनेवाले सिंदरी के लोग मामले को लेकर खुलेआम कुछ बोलने से डर रहे हैं. मामले में सिर्फ काना-फूसी चल रही है.




