न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

आईएफएस आनंद मोहन शर्मा पर 152.50 एकड़ जमीन बेचने का आरोप, हो रही मामले की लीपापोती

पूर्व पीसीसीएफ बीसी निगम ने भी अपर मुख्य सचिव वन को लिखा था पत्र, कहा था करें कार्रवाई

948

Ranchi: मुख्य वन संरक्षक रैंक के आईएफएस अफसर आनंद मोहन शर्मा को आखिर कौन बचा रहा है, इस पर सवाल खड़ा हो गया है. आनंद मोहन शर्मा पर 95 एकड़ वन भूमि बेचने के गंभीर आरोप हैं. इस पर पूर्व पीसीसीएफ बीसी निगम ने अपर मुख्य सचिव वन विभाग को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया था. पत्र में पीसीसीएफ ने स्पष्ट कहा था कि इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए. यहां तक पीसीसीएफ ने आनंद मोहन शर्मा के निलंबन की अनुशंसा कर फाइल अपर मुख्य सचिव को भेजी थी. सूत्रों के अनुसार वन विभाग में ही तैनात एक विशेष सचिव रैंक के अफसर इस बड़े आरोप में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं. फाइल डंप कर दी है.

mi banner add

इसे भी पढ़ें: काले धन पर प्रहार, शेल कंपनियों पर शिकंजा, 21 लाख कंपनी निदेशक संदेह के घेरे में

पीसीसीएफ ने क्या लिखा था पत्र में

आनंद मोहन शर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया था. इनके स्पष्टीकरण में आरसीसीएफ बोकारो ने छह जुलाई 2018 को अपना मंतव्य राज्य सरकार को उपलब्ध कराया. इसमें कहा गया कि संबंधित वन भूमि मौजा बालूडीह थाना देवरी थाना नंबर 95 के प्लांट नं 27,62,72,79,94,100,4,14 एवं 41 कुल रकवा 152.50 एकड़ वन भूमि के रुप में राज्य सरकार के दवारा अधिसूचित है एवं अधिसूचना की प्रति प्रमंडलीय कार्यलय में उपलब्ध है. अत: आनंद मोहन शर्मा द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण स्वीकार के योग्य नहीं है.

इसे भी पढ़ें: न्यूज विंग इंपैक्ट : निजी प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों पर कसेगा शिकंंजा

फिर दूसरा पत्र वन विभाग के प्रधान सचिव को लिखा गया

इस मामले में फिर तत्कालीन पीसीसीएफ ने वन विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखा. इसमें कहा गया कि यह मामला काफी जटिल होने के कारण प्रमंडल स्तर के सभी अभिलेखों की छानबीन एवं जांच आवश्यक थी. साथ ही संबंधित वन संरक्षक एवं क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक का मंतव्य भी आवश्यक था. काफी प्रयास के बाद संपूर्ण कार्रवाई पूरी हो सकी और सभी छानबीन के बाद इस विषय पर जो स्थिति स्पष्ट हुई है, उसका विवरण प्रपत्र ‘क’ पर अंकित है. साथ ही अंकित तथ्यों के संबंध में साक्ष्य विवरणी भी संलग्न कर दी गई है. इस मामले की समीक्षा के बाद स्पष्ट होता है कि इस मामले में संबंधित अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कथित एवं अधिसूचित वन भूमि को गैर वन भूमि करार देकर उसे गैर वानिकी कार्य के लिए उपलब्ध कराने पर अनापत्ति पत्र दिया है. यह बहुत ही गंभीर मामला है. इस पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक है.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: