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जीएसटीआर प्रोसेस में बदलाव होने से लोगों को हो रही परेशानी, आसमंजस में हैं व्यवसायी: ब्रजेश

राज्य की ओर से देश का 23 प्रतिशत एनुअल रिर्टन भरा जाता है

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Ranchi: करदाताओं को जीएसटीआर भरने में काफी परेशानी हो रही है. ऐसे में जरूरी है कि जीएसटीआर भरने से पहले इसके प्रोसेस को सही से समझ लें. पिछले दो सालों से करदाताओं विशेष कर व्यवसायियों को जीएसटीआर भरने में विशेष परेशानी हो रही है. उक्त बातें स्टेट कमर्शियल टैक्स से आये ब्रजेश कुमार ने कहीं. वे गुरुवार को फेडरेशन ऑफ झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से आयोजित जीएसटीआर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि दो साल से देखा जा रहा है एनुअल रिटर्न भरने में काफी परेशानी हो रही है. काफी कुछ बदलाव भी किया गया है. जिससे लोगों में असमंजस है. ब्रजेश ने कहा कि अलग अलग क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए एनुअल रिर्टन भरने के लिए अलग-अलग फॉर्म है. जैसे ई कॉमर्स के व्यवसायियों के लिए जीएसटीआर 9बी है. लेकिन इन लोगों को 2017-18 के लिए जीएसटीआर नहीं भरना है. क्योंकि टीडीएस अक्टूबर 2018 से लागू हुई. ऐसे में इस क्षेत्र के व्यवसायियों को परेशान नहीं होना है.

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देश का 23 प्रतिशत एनुअल रिर्टन झारखंड से भरा जाता है

ब्रजेश ने कहा कि देश के कुल एनुअल रिर्टन का 23 प्रतिशत सिर्फ झारखंड से भरा जाता है. ऐसे में राज्य की केंद्र स्तर पर अच्छी छवि बनी हुई है. राज्य औसतन काफी आगे है. इस बार 31 अगस्त तक का समय दिया गया है. काफी कम दिन बचे हैं. असमंजस के कारण लोग जीएसटीआर फाइल नहीं कर रहे. आने वाले समय में हो सकता है केंद्र सरकार इसके लिए समय बढ़ाये. अधिक रिर्टन फाइल हो जाने पर रिफंड क्लेम किया जा सकता है. वहीं अधिक क्लेम हो जाने पर क्लेम वापस लेने का भी प्रावधान दिया गया है. ऐसे व्यवसायी जिनका लाभ शून्य हो, उन्हें भी जीएसटीआर भरना है. अगर वे नहीं पहले भरते थे और इस बार नहीं दे पायेंगे, तो ऐसे में जीएसटी 9सी के तहत उन्होंने दिये हुए नौ कॉलम में विस्तृत जानकारी भरनी होगी. तभी वे एनुअल रिर्टन नहीं भर पायेंगे. एनुअल रिर्टन भरने की तारीख पार होने के बाद, प्रतिदिन केंद्र से एक सौ और राज्य सरकार की ओर से एक सौ, यानी दो सौ रुपये प्रतिदिन पेनाल्टी अमाउंट देना होगा.

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व्यापारियों की समस्या से अवगत कराया जायेगा

मौके पर चेंबर के उपाध्यक्ष दीनदयाल बर्णवाल ने कहा कि व्यापारियों के समक्ष वर्तमान में बहुत सी परेशानियां हैं. इन परेशानियों से केंद्रीय वित्त विभाग को अवगत कराया जायेगा. एक पत्र वित्त विभाग को लिखा जायेगा. जिसमें व्यापारियों की समस्या से विभाग को अवगत कराया जायेगा. साथ ही एनुअल रिर्टन भरने की तिथि भी आगे बढ़ाने की मांग की जायेगी. उन्होंने जानकारी दी कि कुछ व्यापारियों ने आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण भी रिर्टन नहीं भरा है.

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