
Palamu. पांकी के भाजपा विधायक डॉ शशिभूषण मेहता पर मारपीट का आरोप लगाया गया है. पांकी के बीडीओ फुलेश्वर मुर्मू ने इस सिलसिले में जिले के उपायुक्त शशि रंजन से शिकायत की है. बीडीओ ने पांकी थाना में भी आवेदन दिया है. उपायुक्त ने इस मामले में जांच के लिए लेस्लीगंज एसडीपीओ अनूप बड़ाइक को निर्देश दिया है. मामला दो दिन पहले का है. पांकी के एक कंटेनमेंट जोन में दुकान को सील करने के बाद विधायक और बीडीओ के बीच विवाद गहराया. गौरतलब है कि पांकी बीडीओ का 31 जुलाई की शाम पांकी से स्थानान्तरण हो गया है.
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लेस्लीगंज के एसडीपीओ अनूप बड़ाइक ने बताया कि उपायुक्त कार्यालय से उन्हें पांकी विधायक और बीडीओ के बीच हुए विवाद की जांच का निर्देश मिला है. जांच की जा रही है. मामला 29 जुलाई का है. जांच रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपा जाएगा. जांच अभी शुरू हुई है, इसलिए इस संबंध में विशेष कुछ नहीं कहा जा सकता. जांच के दौरान बीडीओ के आरोपों का पता लगाने की पूरी कोशिश की जाएगी.
क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार, दो दिन पूर्व पांकी पूर्वी पंचायत क्षेत्र में बने कंटेनमेंट जोन में पांकी बीडीओ ने एक दवा दुकान को सील कर दिया था. दवा व्यवसायी ने इस सिलसिले में पांकी विधायक को जानकारी दी थी. विधायक मामले में जानकारी लेने के लिए बीडीओ को फोन लगाया, लेकिन विधायक का आरोप है कि बीडीओ ने विधायक का फोन नहीं उठाया. दूसरे का फोन उठाकर बीडीओ ने कहा कि मैं किसी विधायक का फोन नहीं उठाता. मामला यहीं से बिगड़ा. बीडीओ ने उपायुक्त से की गयी शिकायत में पांकी विधायक पर मारपीट, गाली गलौज और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है.
क्या कहना है विधायक का?
पांकी विधायक ने कहा कि आवश्यक सेवाओं में शामिल रहने के बावजूद पांकी बीडीओ ने पांकी पूर्वी इलाके की दवा दुकान को सील किया. इससे पहले खाद दुकान को सील कर दिया था. दवा दुकान को सील किए जाने पर जानकारी लेने के लिए बीडीओ को फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. एक जनप्रतिनिधि को बीडीओ के द्वारा कोई रिस्पांश नहीं देना, कहां तक उचित है. इसी बीच सूचना मिली कि बीडीओ थाना में हैं. सूचना पर थाना पहुंचे तो बीडीओ उन्हें देखकर वाहन में बैठकर वहां से निकल गए.
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लेस्लीगंज के रामसागर के पास उनके वाहन को रोककर बात की. बीडीओ के साथ वाहन में बैठकर बात भी की. उस समय उनका बॉडीगार्ड और चालक भी था. सिर्फ इतना कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जवाबदेही है कि मामले में बात करें. फोन नहीं उठायेंगे तो मामले की जानकारी कैसे होगी? यह भी कहा कि अगर दिक्कत है तो उपायुक्त के पास चलिए, वहीं पर बात होगी. लेकिन बीडीओ ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में कोई शिकायत नहीं है. इसके बाद मैं वहां से रांची निकल गया.
स्थानान्तरण से खफा हैं बीडीओ
विधायक ने कहा कि जब कोई शिकायत थी तो उसी दिन उपायुक्त को आवेदन देना चाहिए था. अगले दिन कंप्लेन करने का क्या मतलब निकलता है. विधायक ने कहा कि पांकी बीडीओ का स्थानान्तरण हो गया है. उन्हें लगता है कि उनका ट्रांसफर्र उन्होंने कराया है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है. एक साथ कई बीडीओ का कल स्थान्तरण हुआ है. इधर, बीडीओ का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल पर दो बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.





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