
♦7 किलोमीटर तक पहाड़ को काट कर बनाया गया रास्ता
♦सरकार के एक्शन प्लान में शामिल है यह इलाका
Dilip Kumar
Palamu : पलामू जिले के मनातू प्रखंड के सुदूरवर्ती और अभावग्रस्त कुंडीलपुर के ग्रामीणों ने मिसाल पेश की है. सरकारी सिस्टम की बेरुखी से परेशान होकर ग्रामीणों ने पहाड़ काट कर गांव तक जाने लायक सड़क बना दी है. कुंडीलपुर के ग्रामीणों के हौसले को बुलंद करने के लिए पड़ोसी राज्य बिहार के ग्रामीणों ने भी पहाड़ काटने में मदद की. सात किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक पहाड़ को काट कर सड़क बनायी गयी है. निर्माण कार्य मंगलवार को पूरा किया गया. अब गांव तक ट्रैक्टर पहुंचने लगा है.
विदित हो कि सरकार द्वारा मनातू प्रखंड को एक्शन प्लान में शामिल किया गया है. इस प्रखंड के गांवों के विकास के लिए विशेष पैकेज दिया जाता रहा है. बावजूद इस प्रखंड के कई गांव अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. मनातू का इलाका घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. इस प्रखंड की सीमा बिहार राज्य से सटती है.
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पहाड़ और छोटी-बड़ी चार नदियों के पार बसा कुंडीलपुर गांव तक पहुंच पथ नहीं रहने के कारण यहां के ग्रामीण काफी परेशान थे. गर्मी के दिनों में गांव तक किसी तरह ट्रैक्टर पहुंच जाता था, लेकिन अन्य दिनों में आवागमन में भारी परेशानी होती थी. सड़क की समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने दिन-रात एक कर दिया और पहाड़ का सीना चीर कर सड़क बनाने में जुट गये. जहां जेसीबी नहीं जा पा रहा था. उस जगह कुदाल से लगातार काम किया गया. नतीजा देखते-देखते पहाड़ों के बीच से सड़क उभर कर सामने आ गयी.
आग्रह बेअसर साबित होने पर लिया सड़क बनाने का निर्णय
ग्रामीण कहते हैं कि हम गांव में सड़क निर्माण को लेकर सरकार से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगा चुके थे. समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. निराश होने के बाद ग्रामीणों ने खुद कुछ करने का फैसला लिया. ग्रामीणों ने सबसे पहले सड़क बनाने का कार्य शुरू किया. पहाड़ काट दिया. उनकी मेहनत रंग भी लायी. लेकिन नदी पर पुल नहीं बनने के कारण ग्रामीणों का सपना अधूरा ही है.
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गर्मी के दिनों में थोड़ी राहत, लेकिन बरसात में हो जाते हैं कैद
ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी के दिनों में ट्रैक्टर गांव में पहुंच जाता है, लेकिन बारिश के दिनों में गांव टापू बन जाता है. 4 से अधिक छोटे-बड़े नदी नाले पार कर गांव पहुंचना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार यहां के लोगों को सड़क के अभाव में सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब कोई बीमार पड़ता है. गांव से मरीजों को बिहार की सीमा सलैया में डोली बना कर ले जाते हैं. समय पर नहीं पहुंचने से मरीज जान भी गंवा देता है.
सड़क बनाने के बाद इस समस्या से ग्रामीण परेशान
ग्रामीणों ने श्रमदान से सड़क तो बना ली, लेकिन कुंडीलपुर गांव तक जाने में कई छोटे बड़े नाले पड़ते हैं. नदी-नाले में पुल नहीं बनने के कारण परेशानी सामने आ रही है. बरसात के दिनों में नदी में काफी पानी आ जाता है. इसी कारण कुंडीलपुर के आसपास के गांव के लोग प्रखंड मुख्यालय से कट जाते हैं.
कहां पर स्थित है कुंडीलपुर?
मनातू प्रखंड मुख्यालय से 22 किलोमीटर की दूरी पर कुंडीलपुर गांव स्थित है. बिहार राज्य से इसकी दूरी 12 किलोमीटर दूर है. दुर्गम पहाड़ों से घिरा हुआ है. यहां सिर्फ पैदल चल कर ही पहुंचा जा सकता है. इस गांव में 70 से 80 घर हैं. इसकी जनसंख्या 700 के आसपास है. यहां ज्यादातर आदिम जनजाति परिवार के लोग रहते हैं. यहां के लोगों को हमेशा सरकारी योजनाओं का नाम पर ठगा जाता रहा है. आज तक गांव में कोई बड़ा जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा. इस गांव के लोगों को 12 से 15 किलोमीटर दूर जाकर वोट देना पड़ता है.
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