
Palamu: कोरोना को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन है. बाहर से आए मजदूरों को पंचायत स्तर पर क्वारेंटाइन सेंटर बनाकर एक जगह रखना है और 14 दिनों तक उनके स्वास्थ्य लक्ष्णों की जानकारी लेते रहना है.
पलामू जिले में पंचायतवार क्वॉरेंटाइन सेंटर बनाए गए हैं. सेंटरों पर हर तरह की सुविधा बहाल की गयी है, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी ना हो.
जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से सटे चैनपुर प्रखंड के पूर्वडीहा पंचायत सचिवालय में भी क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है.
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सुविधाएं तो करीब-करीब सभी सेंटरों पर एक ही तरह की दी गयी है, लेकिन उसे जमीनी स्तर पर उतारने के कारण पूर्वडीहा क्वारेंटाइन सेंटर की पहचान आदर्श क्वारेंटाइन सेंटर के रूप में हो रही है.
पूर्वडीहा क्वारेंटाइन सेंटर बना मिसाल
नियमित मॉनिटरिंग, चेकअप और साफ-सफाई का प्रबंध होने से यह सेंटर इन दिनों चर्चा में है. पिछले दिनों सदर एसडीओ सुरजीत कुमार सिंह, एसडीपीओ संदीप गुप्ता, चैनपुर की बीडीओ अलका कुमार और थाना प्रभारी सुनीत कुमार ने सुविधाओं का जायजा लिया था. सभी पदाधिकारियों ने यहां की व्यवस्था को सराहा था.
सेंटर पर बनाए गए उप स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिनियुक्त एएनएम की ओर से नियमित सभी लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा ती है. समय पर नाश्ता, भोजन दिया जाता है. परिसर की नियमित साफ-सफाई की जाती है.
मुखिया कुलबुल दुबे ने बताया कि पंचायत सचिवालय को आदर्श बनाकर रखने के लिए हर संभव प्रयास किया जाता है. हर दिन यहां रखे गए लोगों को समाचार पत्र जहां पढ़ने के लिए दिया जाता है, वहीं उनके खान-पान और नियमित चेकअप का पूरा ख्याल रखा जाता है.
फिलहाल 36 लोग यहां रह रहे हैं. उनके बीच मास्क का भी वितरण भी किया गया है. मुखिया ने बताया कि सेंटर पर सभी जाति और धर्म को मानने वाले लोग रह रहे हैं. एकसाथ रहने पर भी उनके बीच कोई भेद नहीं दिखता. 24 घंटे साथ रहते हैं.
समय-समय पर केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जाती है. उनके मनोरंजन के लिए धीमे साउंड में भक्ति गीत बजाए जाते हैं. मुख्य गेट पर पुलिस जवान की तैनाती की गयी, ताकि सेंटर में रहने वालों पर नजर रखी जा सके और बाहर से अंदर आने वाले के प्रवेश पर रोक लगी रहे. सुविधाओं की जानकारी लेने के लिए हर दिन जिला मुख्यालय से पदाधिकारी आकर निरीक्षण करत हैं.
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हर पंचायत में बनाया गया है क्वॉरेंटाइन सेंटर
जिले की सभी 283 पंचायत भवनों में बाहर से आने वाले मजदूरों को 14 दिनों तक रख कर क्वारेंटाइन किया जाना है. शुरुआत में सभी पंचायत भवन में 10-10 बेड का क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया था. मगर मजदूरों की तादात बढ़ने के बाद बेड की संख्या बढ़ा दी गई है.
क्वारेंटाइन सेंटर में संबंधित पंचायत के एएनएम, पंचायत सचिव, सहिया को तैनात किया गया है. वहीं देखरेख और मॉनिटरिंग का जिम्मा मुखिया को दिया गया है. सरकार के निर्देश पर सभी मुखिया को जिला प्रशासन ने आकस्मिकता निधि से 10-10 हजार की राशि भी उपलब्ध कराई गई है. ताकि किसी भी आपात स्थिति में आर्थिक संकट नहीं हो.
इसके अलावा होम गार्ड के जवानो को भी तैनात किया गया है, ताकि कोई भी क्वारेंटाइन में रह रहा व्यक्ति भाग नहीं जाए. पलामू में करीब 1600 लोग पंचायत भवनों में क्वारेंटाइन में है. जहां सभी को खाना और रहने की सुविधा उपलब्ध करवायी जा रही है. आंगनबाड़ी सहिया बाहर से आने वाले मजदूरों का डाटा तैयार कर रही है और उनके स्वास्थ्य पर कड़ी निगरानी भी रख रही हैं.
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