
Palamu : नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय के कॉलेजों के नैक एक्रीडिएशन और अगले सत्र 2019-20 से ऑनलाइन एडमिशन की तैयारी तेज कर दी गयी है. इस सिलसिले में शुक्रवार को योध सिंह नामधारी महिला महाविद्यालय में कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसएन सिंह उपस्थित थे. कार्यशाला में मुख्य रूप से सरकार के उच्च तकनीकि शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के निर्देशानुसार राज्य के महाविद्यालयों के नैक एक्रीडिटेशन पर चर्चा की गई. एनपी विवि के कुलपति डॉ एसएन सिंह ने कार्यशाला आयोजन के दौरान कहा कि नैक कराने कि दिशा में जो कॉलेज शिथिल हो चुके हैं, उन्हें गति बनाने की जरूरत है. सत्र 2019-2020 से सभी कॉलेजों द्वारा ऑनलाइन एडमिशन किये जायेंगे. सीटों की संख्या निर्धारित होगी. ऐसी स्थिति में सभी लोगों को सरकार की नीतियों के अनुरूप अपने कॉलेजों को उन्नत बनाना होगा.
कॉलेज की समस्या का हल आपसी चर्चा से निकालें
नैक कराना सिर्फ अंगीभूत कॉलेजों को ही नहीं, बल्कि एफलियेटेड कॉलेजों के लिए भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि नैक के लिए कॉलेज में पहले सारी उच्च कोटि की सुविधाएं डेवलप किये जाएं, बल्कि आधारभूत संरचना को दुरूस्त करके भी नैक कराया जा सकता है और अच्छी ग्रेडिंग ली जा सकती है. कुलपति डॉ सिंह ने प्रचारियों से कॉलेज की समस्या का हल आपसी चर्चा से निकालने की कोशिश करने का आह्वान किया. साथ ही कहा कि विश्वविद्यालय से किसी सहायता की अपेक्षा हो तो संज्ञान में जरूर लायें. सभी कॉलेजों को वाइब्रेट करना है, ताकि कॉलेज केवल डिग्री बांटने वाले संस्थान न रहें. बल्कि कॉलेज का माहौल ऐसा हो कि विद्यार्थी प्रतिदिन क्लास में आएं और शैक्षिक तथा अन्य गतिविधियों से अपना संपूर्ण व्यक्तित्व विकसित करें. उन्होंने कहा कि कॉलेजों को वर्तमान समय के अनुरूप सूचना व तकनीक की व्यवस्था भी दुरूस्त करनी होगी.
आयोजन में ये लोग रहे उपस्थित
इस कार्यशाला में प्रति कुलपति डॉ पवन कुमार पोद्दार ने किसी संस्थान को ग्रेड प्राप्त करने के लिए नेट के सभी सात बिंदुओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा की और ग्रेडिंग बढ़ाने के लिए महाविद्यालयों को कई निर्देश व टिप्स दिये. कार्यशाला में कुल सचिव डॉ. राकेश कुमार, विवि पदाधिकारी डॉ. नकुल प्रसाद, डॉ. वी के देवधरिया, डॉ. आईजे खलको, डॉ. आरपी सिंह, डॉ. विभा पांडेय समेत सभी कॉलेजों के प्राचार्य उपस्थित थे. इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनोरमा सिंह ने किया.
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