
Ranchi: कुपोषण झारखंड का बड़ा मुद्दा है. यह सिर्फ छह जिले का मामला नहीं है. अभी कार्यरत पोषण सखियों के 11 महीने के बकाया मानदेय के भुगतान के लिए अनुपूरक बजट में 38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार पूरे राज्य का अध्ययन कर पोषण सखी मामले पर समेकित निर्णय लेगी. यह बात विधानसभा में महिला एवम बाल विकास मंत्री जोबा मांझी ने माले विधायक बिनोद सिंह के धयनकर्षण प्रस्ताव के जवाब में कहा.
मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने 2017 में ही पोषण सखियों का मानदेय बंद कर दिया है. झारखंड सरकार इस आशा के साथ मानदेय दे रही है कि भारत सरकार इसके लिए राशि देगी. अन्य राज्यों में भी भारत सरकार ने बन्द कर दिया है. कहा कि सरकार छह जिले नहीं बल्कि पूरे राज्य को इस मामले में क्लब करना चाहती है. क्योंकि राज्य में अभी भी कुपोषण है. इस मामले पर मुख्यमंत्री से विचार कर समेकित निर्णय लेंगे.
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पूरे राज्य को जोड़ें स्वागत है पर छह जिलों में काम जारी रहे : बिनोद
माले विधायक बिनोद सिंह ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि झारखंड में 29 हजार बच्चे अपना पहला जन्मदिन नहीं देख पा रहे हैं. कुपोषण के मामले में 116 देशों की सूचि में भारत 101 स्थान पर है. उन्होंने कहा कि पोषण सखियों को 11 महीने के बकाया मानदेय का भुगतान करते हुए कंटिन्यू किया जाय. कहा कि सरकार ने जो लिखित जवाब दिया है उसमें यह शंका सामने आ रही है कि अभी 11 महीने के बकाये का भुगतान तो हो जाएगा लेकिन उन्हें कंटिन्यू नहीं किया जाएगा.
उन्होंने मंत्री के जवाब के बाद कहा कि आप पूरे राज्य में कुपोषण के खिलाफ अभियान चलाइये, इसका स्वागत है लेकिन जिन छह जिलों में यह अभियान चल रहा है उसे बंद नहीं किया जाय. विधायक सरयू राय ने कहा कि यह जनहित के मामले है. सरकार के बजट में कई रियायत दी गयी है. पोषण सखी का मामला अत्यंत आवश्यक है. मुख्यमंत्री तथा मंत्री बात कर इन मामले पर जल्द निर्णय लें. विधायक सुदेश महतो, प्रदीप यादव और दीपिका पांडेय सिंह ने भी सरकार से इसे जारी रखने की मांग की.
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