
Stockholm : इस साल 2020 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अमेरिका के पॉल आर मिल्ग्रॉम तथा रॉबर्ट बी विल्सन को मिला है. दोनों को यह पुरस्कार नीलामी सिद्धांत में सुधार और नये नीलामी स्वरूप के आविष्कार के लिए दिया गया है. बता दें कि रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के महासचिव गोरान हैंसन ने सोमवार को स्टॉकहोम में अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा की.
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वर्तमान में विश्व सर्वाधिक भीषण मंदी का सामना कर रहा है
अर्थशास्त्र के क्षेत्र में यह पुरस्कार ऐसे समय दिया गया है जब विश्व कोविड-19 महामारी की वजह से दूसरे विश्वयुद्ध के बाद विश्व सर्वाधिक भीषण मंदी का सामना कर रहा है. अर्थशास्त्र के क्षेत्र में दिये जाने वाले इस पुरस्कार को तकनीकी रूप से स्वीरिजेज रिक्सबैंक प्राइज कहा जाता है और यह वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में दिया जाता है. इस पुरस्कार की स्थापना 1969 में हुई थी और इसे अब नोबेल पुरस्कारों में से ही एक माना जाता है और तब से इसे 51 बार दिया जा चुका है.
पिछले साल यह पुरस्कार वैश्विक गरीबी को कम करने के प्रयासों के लिए मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के दो अनुसंधानकर्ताओं तथा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अनुसंधानकर्ता को दिया गया था. पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण पदक और एक करोड़ स्वीडिश क्रोना (लगभग 8.27 करोड़ रुपये) की राशि दी जाती है.
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1901 से शुरू हुआ था नोबेल पुरस्कारों का सिलसिला
पहला नोबेल पुरस्कार साल 1901 में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, लिटरेचर और शांति के क्षेत्र में दिया गया था. यह अल्फ्रेड नोबेल की पांचवी पुण्यतिथि थी. नोबेल स्टॉकहोम में 1833 में पैदा हुए थे. उनके पिता युद्ध के शस्त्र बनाने का काम करते थे. आगे चलकर नोबल भी रसायन शास्त्र के बड़े वैज्ञानिक हुए. नोबेल ने 1867 में अत्यंत विस्फोटक डायनामाइट का आविष्कार किया था.
10 दिसंबर 1896 को इटली के सौन रेमो में नोबेल का निधन हो गया. हालांकि नोबल वास्तव में शांति के अनुयायी थे. अपने जीवन के अंतिम दिनों में उन्हें युद्ध में भारी तबाही मचाने वाले अपने अविष्कारों को लेकर भारी पश्चाताप था. इसी के प्रयश्चित स्वरूप उन्होंने नोबल पुरस्कारो की व्यवस्था अपने वसीयत में की थी और लिखा था कि उनकी संपत्ति के अधिकांश हिस्से से मानवजाति के कल्याण की दिशा में उत्कृष्ट काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया जाये.




