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#NewTrafficRule पर खुल कर बोल रहे हैं- पढ़ें लोग क्या कह रहे हैं (हर घंटे जानें नये लोगों के विचार)

Ranchi: देश भर में NewTrafficRule का शोर है. जुर्माने का खौफ है. सड़क पर वाहन कम हैं. डीटीओ कार्यालय, प्रदूषण जांच केंद्र पर भारी भीड़ है. लोगों में गुस्सा है. सरकार मौन है. नया नियम गलत है. सही है. इस पर चर्चा है. हर शख्स सरकार से कुछ कहना चाहता है.

लेकिन सुनने वाला कोई नहीं. इस बारे में लोग क्या सोचते हैं. क्या महसूस करते हैं. लोगों का अनुभव कैसा है. newswing.com ने लोगों से प्रतिक्रिया मांगी. लोग खुल कर बोल रहे हैं.

अपने अनुभव और जानकारी शेयर कर रहे हैं. आप भी पढ़ें. प्रतिक्रिया देने वाले लोगों के विचार हर घंटे अपडेट होंगे. आप जितनी बार इस लिंक खोलेंगे, नये लोगों के विचार जानने को मिलेंगे.

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RAM JI KUMAR – INDIA GOVERNMENT RULES FOR TRAFFIC IS NECESSARY FOR INDIAN PUBLIC .BUT CHARGES OR FINE IS SO HIGH AT WITHOUT HELMET OR WITHOUT DRIVERY LICENCES OR FAILED INSURANCE TWO WHEELER OR ANY MOTORS. GOVERNMENT GIVE SOME TIME FOR UPDATE FOR ANY TYPE OF FACILITIES CHARGES FOR PUBLIC.

 

shashi singh- सरकार के फैसले के साथ हैं. किंतु मेरा कहना है कि अगर गलती पर फाईन होता है तो उसी वक्त पेपर भी बनाना चाहिए. जिससे मेरा भी निदान हो सके.

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Advocate Anil Kumar-  ये सरकार की गंदी नीति है, सरकार बस लोगों कें सेफ्टी के नाम पर तरह तरह के पैसे ऐंठने वाले नियमों को बना रही है. क्यों कि सरकारी खजाना तो खाली हो गया है. जीडीपी ग्रोथ कम गया है. नोटबंदी ने देश की कमर तोड़ दी है. जीएसटी से देश को बरबाद कर दिया अब सरकार के नजर में आम लोग हैं, उन्हें भी कानून बनाकर लूटा जा रहा है.

 

Bikram kumar- सरकार बहुमत में पागल हो गयी है. कहीं ये नीति उनकी प्रतिष्ठा को दागदार न कर दे. भाई ये समय आ गया है कि जनता अपनी बात बोले. वो गलती से सरकार विरोधी हो तो उसे देशद्रोही या दूसरे पार्टी का बोलकर आवाज दबाया जाता है. जनता को समझ कर ही रुल बनाएं. जुर्माना लेने से क्या लोग हेलमेट लेंगे. उनके पैसे से हेलमेट लेकर दीजिए, रुल कड़े करने से बदलाव आता तो अरब में जुर्म नहीं होते.

 

Asit kumar- नियम तो ठीक है पर इसका फायदा पुलिस को ही होगा. आर्थिक जुर्माना इतना ज्यादा नहीं होना चाहिए.

 

Shivam Arora- रुल से सब लोग हेलमेट पहन रहे हैं. ये तो अच्छी बात है. पर अब तो बहुत ज्यादा रुल हो गये हैं, और बेमतलब का भी. जिनके पास हेलमेट है उनको भी पकड़ रहे हैं. थोड़ा सा रहम करो. लोगों की गलती के कारण एक्सीडेंट होता है जिससे रुल लगाने पड़ते हैं, पर भुगतना सबको पड़ रहा अभी.

sanjay  Ranjan  –  21वीं सदी के भारत को नागरिक व्यवहार में सुधार लाने के लिए इंस्पेक्टर राज की जगह क्रिएटिव होने की जरूरत है. नए ट्रैफिक नियमों को ऐसे लागू किया जाना चाहिए था. जो इस प्रकार है : 1. बगैर हेलमेट के पकड़े जाने पर उक्त चालक से जुर्माना वसूलने की जगह बाजार दर से 25 प्रतिशत ज्यादा कीमत पर उसे हेलमेट देने की व्यवस्था की जाय. 2. प्रदूषण सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस सर्टिफिकेट को लेकर पकड़े जाने पर भी ऐसी ही व्यवस्था की शुरुआत की जरूरत है. 3. ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने पर तय शुल्क से 25 प्रतिशत ज्यादा लेकर लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू कराने की जरूरत है. इस प्रक्रिया को जब तक पूरी नहीं कर ली जाये, तबतक गाड़ी को प्रशासन अपने कब्जे में रख सकती है या तबतक इस गाड़ी को सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं दी जाये. 4. शराब पीकर और तेज रफ्तार से ड्राइविंग करने के मामले में जुर्माना वसूलने के साथ-साथ पहली बार एक महीने, दूसरी बार तीन महीने और तीसरी बार छह महीने तक के लिए लाइसेंस कैंसल की जाये.

 

Dheeraj kumar  – यह नियम गलत है. सरकार की ओर से जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है. हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि प्रदूषण के कागजात का फायदा क्या जांच केंद्र पर किसी भी गाड़ी को प्रदूषण सर्टिफिकेट दे दिया जा रहा है.

 

Nandini Kumari – ये सरकार के द्वारा मंदी के असर को छुपाने की कोशिश है.

 

Raj Kishore Prasad Singh  –  शिकायतें तो बहुत सारी हैं, वर्तमान सरकार से लेकिन टू व्हीलर वालों के साथ जो हो रहा है उसे सरकारी लूट कहा जायेगा. सरकार को मुख्यतः पांच बिंदुओं पर ज्यादा सख्ती करनी चाहिए. 1) शराब पी कर वाहन चलाना, 2) रफ्तार पर नियंत्रण रखना 3) नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना 4) वाहन खरीदारी में हेलमेट वाहन के साथ कम्पलसरी एसेसरीज में हो और 5) प्रत्येक पेट्रोल पम्प पर प्रदूषण प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था हो जिसमें शर्त लागू हो कि जो वाहन जांच में सही होगा उसे हीं इंधन मिलेगा. शेष नियमों के लिए सरकार सिस्टम को सुगम बनाने की व्यवस्था करे.

 

Subham jha  –  पहला पहलू- नया नियम बिल्कुल सही है,लोग दूसरे देशो में कड़े नियम देख कर तारीफ करते हैं और भारत में लागू करने को बोलते हैं. लेकिन जैसे ही भारत सरकार ने नया नियम लागू किया लोग सरकार को कोसना चालू कर दिए और इस कड़े कानून का विरोध करने लगे. भारत में जितने गाड़ी मालिक हैं शायद ही 25% के पास ड्राइविंग लाइसेंस होगा. अनगिनत लोगों के दुर्घटना की खबर आती रही कि हेलमेट नहीं होने के कारण मृत्यु. दूसरा- सरकार ने नए नियम बनाये लेकिन सुविधा के नाम और खानापूर्ति सड़के बदहाल और उसमें गड्ढे इसपर न जनप्रतिनिधियों की कोई नजर ओर न अधिकारियों को कोई सुध. अगर राह में दुर्घटना होती है तो एम्बुलेंस सेवा भी तत्काल मिलनी चाहिए, सड़क और मुख्य चौक चौराहों में कैमरे लगने चाहिए और अन्य सुविधा मिलनी चाहिए.

ये नियम अधिकतर दो पहियों और चार पहियों तक ही सीमित रह जायेगी. अधिकतर सड़क दुर्घटना में मृत्यु बड़े ओवरलोडिंग ट्रक, हाइवा और अन्य वाहनों के गलत ड्राइविंग एवं ड्रिंक और ड्राइविंग के वजह से होती है. हालांकि जो भी हो इसमें हेलमेट और इंश्योरेंस कंपनियों का भी ‘अच्छे दिन’ मोदी जी ने ला दिए और डर से ही सही लोग अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहेंगे. शुभम झा,कसमार

Pawan Prabhat  – लोग नियम का पालन जरूर करेंगे, लेकिन शोषण नहीं सहेंगे. लाइसेंस बनवाने में बहुत दलाली होता है इसे भी कैम्प लगाकर बनवाना चाहिए. क्या सारा जुर्माना पब्लिक ही देती रहेगी सरकार पर जुर्माना क्यों नहीं सड़क पर गड्ढे होने पर जुर्माना 5000/=हजार रुपये किसी का एक्सीडेंट होने पर जुर्माना 50000/=से 100000/=लाख रुपये तक सड़कों पर पानी भरने पर जुर्माना 500000/=लाख रुपये किसी कारण से सड़क पर गड्ढे में गिरकर मृत्यु होने पर जुर्माना 10 लाख रुपये किया जाये. जय हिंद जय भारत.

 

Kalpana Neeraj  – नये ट्रैफिक नियम पर मेरे विचार :  इस व्यवस्था से मैं पूरी तरह सहमत हूँ. किसी भी चीज के गुण दोष दोनों ही होते हैं पर इस नियम के गुण अधिक हैं. इससे सड़क पर गाड़ियों की संख्या कम हो सकती है, गाडियाँ कम चलेंगी तो पेट्रोल की बचत होगी. वायु एवं ध्वनि दोनों तरह के प्रदूषण कम होंगे. सड़क पर दुर्घटनाएँ कम होंगी. लोगों में पैदल चलने की या साइकल चलाने की प्रवृति बढ़ेगी , जिससे हमारा स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा. रोड पर आजकल जितनी दुर्घटनाएँ होती हैं ज़्यादातर नाबालिग बच्चे या नौजवानों के द्वारा बिना हेलमेट गाड़ी चलाने या तीन-चार सवारी लेकर चलने एवं तेज गति में चलने की वजह से होती हैं. कड़े नियम से इनपर रोक लगेगी. इस नियम में माता-पिता को भी चूंकि सजा का प्रावधान है, इसलिए अपने कम उम्र के बच्चों को गाड़ी देने से पहले माँ बाप सोचेंगे.

 

नीरज

फाइन की राशि और ज्यादा होनी चाहिए. ताकि कोई गलती ना करे. लेकिन सड़क की हालत, ट्रफिक लाइट और सुरक्षा इन सभी की जिम्मेदारी सरकार को लेना चाहिए. अगर ऐसा सरकार नहीं करती तो सरकार को भी फाइन देना चाहिए. गलती करने पर सभी पर फाइन लगना चाहिए. सबको जिम्मेवार होना चाहिए. सिर्फ आम नागरिक ही फाइन क्यों भरे. सरकार की जवाबदेही का क्या.

Lalan Jha

Sir while making such draconian laws kindly keep the condition of citizens in mind. Instead of managing things, fines are imposed. Is it proper? Copying  western countries in terms of traffic fines. Learn to provide amneties like them. salaries are increased by 5 percent and fines by 100. please reconsider this deadly law.

A.K. Saxena

Very good rules. At least rules followers will enjoy and people will be safe.

प्रीतम कुमार मिश्रा

ट्रैफिक रूल पुराना भी कारगर हो सकता था यदि ईमानदारी से उसका पालन करवाया जाता, लेकिन कभी कभार इसपर प्रशासन ध्यान देता था. सारा मामला ट्रैफिक बूथ के बगल वाले दुकान में गलत ढंग से निबट जाता था. आगे भी शायद यही हो. पुराने नियम को ही यदि रेगुलर बेसिस पे ध्यान दिया जाता तो ये स्थिति नहीं होती.

अमित कुमार

सरकार के द्वारा एम वी एक्ट में किया गया संसोधन का ध्येय सही है परंतु उक्त एक्ट को लागू करने वाले पदाधिकारियों को उक्त ध्येय के बारे में समझाया नहीं गया है. 1 सितंबर के बाद ट्रैफिक पुलिस पदाधिकारियों का व्यवहार भयाक्रांत करने वाला है. उनका ध्येय इस भय का लोगों से आर्थिक दोहन करने वाला प्रतीत होता है. सरकार नियम तथा उससे संबंधित दंड का प्रावधान आम जनों को अपराध करने से रोकने के लिए बनाता है परंतु एम वी एक्ट में किये गए संशोधन के कारण नियमों का पालन करने के बजाय आतंकित और आक्रोशित ज्यादा हुए हैं क्योंकि लगाया गया अर्थ दंड काफी अधिक है.

महेंद्र सिंह

ट्रैफिक रुल रहा है. आमजन को परेशान किया जा रहा है. आमजन से जुर्माना लिया जाता है. जबकि इस कानून में पुलिसवाला गलत करता है तो इसका क्या जुर्माना होगा, कौन देखेगा, यह तय नहीं है. जुर्माना का पैसा का लोगों के बीच में दिखना चाहिए था. किस विभाग में खर्च किया जा रहा उसका हिसाब होना चाहिए था. कोई भी कानून ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे आम जनता में खौफ हो.

रोहित कुमा

नया ट्रैफिक कानून बिल्कुल ही सही है. इसके पीछे मेरा मानना है कि यदि आप सही हैं. तो आपको कानून से डरने की जरूरत नहीं है. पहले ट्रैफिक पुलिस वाले लोगों से अपील करते थे कि कृपया आप अपना हेलमेट पहनकर चलें, इससे आपकी सुरक्षा सुनिश्चित हो जाती है.
एक बार मोरहाबादी में ट्रैफिक पुलिस नेहेलमेट वितरण किया और उस समय भी लोगों से अपील की, आप हेलमेट पहनकर चलें. किंतु पता नहीं लोगों की क्या सोच है, वो हेलमेट को बोझ मानते हैं और उसे पहनना उचित नहीं समझते है. मजबूरन इस प्रकार की कानून की व्यवस्था की गई.

यही नहीं कई बार एंबुलेंस को भी रास्ता नहीं दिया जाता था, जिससे रोगी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था. अब इस नये आये कानून से शायद कई मरीजों की जान बचाने में डॉक्टरों को मदद मिलेगी, क्योंकि वो समय पर अस्पताल पहुंच सकेंगे. अतः आप एवं आपके गाड़ी के कागजात सही है और आप ट्रैफिक नियमों का उचित पालन कर रहे हैं तो आपको कानून से डरने की जरूरत नहीं है.

तपन अड्डी

नया ट्रैफिक नियम बहुत अच्छा हैं. इससे देश में जो सड़क दुर्घटना होती है, उसमें कमी आयेगी. पर क्या हम भारतवासियों के ऊपर ये जो कानून लाद दिया गया है उसके लिए प्रचार-प्रसार किया गया हैं?

आम आदमी को सरकार ने जागरूक करने का काम किया है? बहुत को तो कानून की जानकारी भी नहीं है और ट्रैफिक पुलिस के हाथ लग गए.

ड्राइविंग लाइसेंस बनाने में लोगों में सुगमता नही हैं. बिना दलाली के लाइसेंस बनता नहीं. इसे भी सुगम बनाने की जरूरत है कि लोग आसानी से बना सके.

नियम सिर्फ मोटर साइकल वाले पर न हों जो फोर व्हीलर बड़े आदमी के हो उसकी भी जांच हो. लेकिन ट्रैफिक पुलिस उसकी जांच नहीं करती है, क्योंकि वो बड़े आदमी है. देश भी न्याय संगत कानून का पालन होना चाहिए चाहे वो आम हो या खास. धन्यवाद.

Sunil Kumar

New rule is good but penalties should be in 2 categories first one lesser for within city limit and stringent for highway. But most importantly this one should be implemented only after Government undertakes that there will be No pothole on road.

And if casualties caused by potholes or bad conditions of road Government will also liable for criminal action against his concerned agencies.

रतन कुमार वर्मा

नियम बनाया गया है या वसूली गैंग, आदमी मार्केट सब्जी लेने भी जाये तो पांच हजार लेकर जाना पड़ेगा. 100 की सब्जी 3500 फाइन. कम से कम लोकल मार्केट में ये रंगदारी वसूलने का धंधा बंद होना चाहिए.

हां ट्रिपल लोड और रफ ड्राइविंग को आप रोके फाइन मारे. रास्ते से जानवर, गड्ढे ये सब हटाएं. धन्यवाद

बिट्टु कुमार

सरकार ने जो नया कानून लागू किया है, वो सही है. फाइन के डर से ही लोग नियम का पालन करेंगे और यह सब हमारे भले के लिए हो रहा है. हमें स्पोर्ट करना चाहिए. लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस आसानी से बन सके इसके लिए भी कुछ करना चाहिए.

पॉवेल कुमार

सरकार के द्वारा उठाए गए कदम का हम स्वागत करते हैं. लेकिन सरकार के द्वारा तैयार करने वाले कागजात को सिंगल विंडो सिस्टम में होना चाहिए. सरकारी पदाधिकारियों एवं वाहनों पर भी नियम लागू होना चाहिए.

पुलिस के द्वारा मारपीट, गाली-गलौज करने पर कार्रवाई होनी चाहिए. नियम लोगों की सुविधा के लिए है न कि कानून का भय दिखा कर अवैध वसूली के लिए.

संजीव झा

हर तरफ ट्रैफिक के नए नियमों का शोर है.. होना ही चाहिए.. लोगों में गुस्सा है. कौन हैं वो लोग?? क्यों गुस्सा हैं? उनसे पूछिए कि वो नियम क्यों तोड़ना चाहते हैं? जो 1000 रुपये के मोबाइल फ़ोन पर तुरंत 100 रुपये का कवर चढ़वाते हैं, उनसे पूछिये कि 1000 करोड़ रुपये के सिर पर 500 रुपये का हेलमेट क्यों नहीं चढ़ाना चाहते?
जो पड़ोसी के घर जाते मोबाइल फ़ोन का पावर बैंक नहीं भूलते, उनसे पूछिये कि पड़ोसी शहर जाते वक्त गाड़ी के पेपर क्यों भूल जाना चाहते हैं? किन संबंधों की अकड़ दिखाना चाहते हैं? किसी भी शहर में निकल जाइए, बाइक पर कुछ आतंकवादी मिलेंगे.
जी हां, जो आसपास के लोगों में अपनी चाल-चलन से आतंक फैलाते हैं, आसपास वालों को डराते-गिराते हैं, वे आतंकवादी ही तो हैं. कल इसी सवाल पर एक दादाजी बोल पड़े थे कि बेटा ये नया नियम अंग्रेजों के राज जैसा है, मगर बहुत अच्छा है. लोग ऐसे ही सुधरेंगे.

मो. शाहीद परवेज

सरकार का ये ट्रैफिक रूल महंगा होना गलत है. क्योंकि आम पब्लिक बहुत ही परेशान है. सरकार का महंगाई, जीडीपी और बेरोजगारी से ध्यान भटकाने की यह कोशिश है. चुनाव में इसका जवाब पब्लिक जरूर देगी.

आकाश सिंह

सरकार को कुछ दिनों का समय देना चाहिए था. ऐसा होता तो लोगों को अपने वाहन के कागजात को बनवाने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता.

राजू प्रसाद

मै समझता हूं की यह वो कड़वी दवा है जिससे पूरा सिस्टम ठीक हो जायेगा. शुरुआत में कड़वी लगती है पर बाद में हमें ही फायदा पहुंचाती है.

संजय मेहता

सरकार को मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन से पहले राज्यों से परामर्श कर एक राय बनानी चाहिए थी. कई राज्यों में लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया जटिल है. लोग दलाल और बिचौलिए से परेशान हैं. सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि सबको गुणवत्तापूर्ण सड़क सुविधा मिलेगी.

बिना नागरिक सुविधा, पारदर्शिता के नियमों का यह संशोधन सही प्रतीत नहीं होता है. इसपर पुनर्विचार किया जाना चाहिए. मैं असहमत हूं. विरोध प्रकट करता हूं.

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अरविंद प्रताप

लोकप्रिय वेब पोर्टल के माध्यम से मैं सरकार तक बात पंहुचाना चाहता हूं कि देश में ट्रैफिक के जो नए नियम और कानून बनाये गए हैं, उसे लागू करने से पहले ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए. जर्जर ट्रैफिक लाइट्स और घुन लगी व्यवस्था के कारण ये बिल्कुल भी प्रैक्टिकल नहीं है.

लोगों को दंड से बचने के लिए नहीं बल्कि उनकी जान बचाने के उद्देश्य से यह रूल लागू किया गया है यह अहसास पब्लिक को कराना होगा. कहीं ये नए प्रावधान ट्रैफिक पुलिस की अनुचित आय बढ़ाने का मात्र एक साधन न बन कर रह जाये.

डॉ. विश्वनाथ आजाद

नियम तो पहले से अच्छा है, पर नियत में खोट है. क्योंकि जिस तरह सभी जुर्माना दोगुना कर दिया गया है, उससे पुलिस-प्रशासन कितनी सही तस्वीर पेश करती है यह देखना होगा. यह केवल पॉकेट भरने का जरिया ना बन जाए. क्योंकि अब तक यही चलता रहा है.

जाम करने वाले ई-रिक्शा और ऑटो चालक फुटपाथ के दुकानदारों पर इल्जाम लगता है. तात्पर्य यह कि कोई भी नियम कानून ईमानदारी से लागू हो तो उससे सभी को खुशी मिलती है अन्यथा सिरदर्द.

अब्दुल शॉर्फ

ट्रैफिक व्यवस्था हमारे यहां बहुत ही बदतर है. इसलिए ये सही कदम है. पर इसमें हम ये कर सकते है जिसके पास इंश्योरेंस नहीं है. वो इंश्योरेंस कर दे. हेलमेट नहीं है तो हेलमेट दिला दे और उसका पैसा उनसे ले लिया जाए.

संजय पांडे

मुझे कुछ नहीं कहना है. सिर्फ नियम का पालन करना है. यह कानून पहले से बना था. सिर्फ लागू नहीं था. अब लागू हो गया है, तो सभी पालन करें. अभी तक लोगों का जितना भी चालान कटा है, जिनका चालान कटा है, उनका अनुभव अच्छा रहा होगा.

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देश भर में नये ट्रैफिक रूल का शोर है. जुर्माने का खौफ है. सड़क पर वाहन कम हैं. डीटीओ कार्यालय, प्रदूषण जांच केंद्र पर भारी भीड़ है. लोगों में गुस्सा है. सरकार मौन है. नया नियम गलत है. सही है. इस पर चर्चा है. हर सख्स सरकार से कुछ कहना चाहता है. पर सुनने वाला कोई नहीं.

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