
Toronto( Canada): कोरोना वायरस ने देश-दुनिया में हाहाकार मचा रखा है. इसे रोकने के लिए तरह-तरह के उपाय किये जा रहे हैं. साथ ही वैक्सीन और कोरोना वायरस को लेकर कई तरह के रिसर्च भी हो रहे हैं.
एक नयी स्टडी में ये दावा किया गया है कि आवारा कुत्तों की इस जानलेवा वायरस के फैलाव में भूमिका रही है. ऐसा अनुमान है कि आवारा कुत्तों ने, खास कर उनकी आंतों ने इस महामारी की उत्पत्ति में भूमिका अदा की है.
New study suggests COVID-19 hopped from dogs to humans. Here’s why you should be skeptical. https://t.co/f02y5PYzdV pic.twitter.com/BiN92uqGdD
— Live Science (@LiveScience) April 14, 2020
बता दें कि मॉलिक्यूलर बायोलोजी एंड एवोल्यूशन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह बीमारी सांपों से शुरू हो कर कई प्रजातियों में होती हुई हाल ही में पेंगोलिन तक पहुंची है. और संभवत: इन सभी जानवरों का सार्स कोविड 2 के संक्रमण को एक दूसरे के बीच फैलाने में हाथ रहा. और इस प्रकार यह चमगादड़ों तक और उसके बाद इंसानों तक पहुंचा.
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कुत्तों से इंसानों में फैला कोरोना !
अब कनाडा में ओटावा यूनिवर्सिटी के शिहुआ शिया के अनुसार इन जानवरों से लिए गए वायरस, सार्स कोविड 2 से काफी अलग हैं.
शिया ने बताया, ‘SARS-CoV-2 के पूर्वज वायरस और उनका निकट संबंधी वायरस, चमगादड़ों में पाया जाने वाला वायरस है. जिससे भेड़िये और कुत्तों की आंतों में संक्रमण हुआ और संभवत: उनमें तीव्र क्रमिक विकास हुआ और वायरस छलांग लगा कर इंसानों तक में पहुंच गया.’’
पूरी दुनिया में वैज्ञानिक उन प्रजातियों का पता लगाने में जुटे हैं जिनसे कोरोना वायरस मूल रूप से निकला और इंसानों तक पहुंच गया. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस अध्ययन के परिणाम इस बात को रेखांकित करते हैं कि कैनिडाए परिवार में कोरोना वायरस जैसे सार्स की निगरानी की जरूरत है.
शी कहते हैं कि इंसानों और स्तनपायी में एक महत्वपूर्ण एंटीवायरल प्रोटीन जेडएपी होता है जो एक वायरस को उसके मार्ग में ही रोक देता है. वह इस वायरस को उसके मूल में ही बढ़ने से रोक कर इसके जीनोम का क्षरण करता है.
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कुत्तों की आंत को कोरोना वायरस संक्रमित करते हैं- स्टडी
स्टडी में बताया गया कि इंसानों के शरीर में एक प्रोटीन होता है जिसे जिंक फिंगर एंटीवायरल प्रोटीन जैप (ZAP) कहते हैं. ZAP जैसे ही कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड साइट CpG को देखता है. उसपर हमला करता है. यहीं पर वायरस अपना काम शुरू करता है और वह इंसान के शरीर में मौजूद कमजोर कोशिकाओं को खोजता है.
स्टडी के मुतिबक, सार्स कोविड जैसा कोरोना वायरस जेडएपी से बच सकता है और इस तरह से यह एंटीवायरल प्रोटीन को बेअसर कर देता है.
इस शोध में शिया ने सभी 1252 बीटा कोरोना वायरस जीनोम का अध्ययन किया जो जीन बैंक में जमा हैं.
उन्होंने बताया, सबसे पहले वायरस एक ऐसे टिश्यू में पैदा हुआ जिसमें ZAP का उच्च स्तर था. यह निम्न
सीपीजी वाले वायरल जीनोम के लिए फायदेमंद होता है. उसी के आधार पर उन्होंने बताया है कि कुत्तों में ZAP कमजोर होता है. वह कोरोना वायरस के सीपीजी साइट से लड़ नहीं सकता. कुत्ते की आंतों में यह वायरस अपना घर बना लेता है. और चीन में इंसान कुत्तों को खाते हैं, ऐसे में वहीं से ये वायरस इंसान तक पहुंचा.
दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वायरस का जिंदा रहना इस बात का संकेत है कि यह सफलतापूर्वक ZAP से बच निकलने में कामयाब रहा. दूसरे शब्दों में कहें तो वायरस इंसानों के लिए बेहद घातक और खतरनाक बन चुका है.
लेकिन इस थ्योरी से कई वैज्ञानिक सहमत नहीं है. सैन फ्रांसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लिउनी पेनिंग्स कहते हैं यह थ्योरी और जेनेटिक डेटा एकदूसरे को स्पोर्ट नहीं करते.
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