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मिशन 2024: चुनावी मैदान में फिर से दिखेंगे भाजपा के पुराने चेहरे, युवा, महिला, ओबीसी, ट्राइबल फेस का दिखेगा संतुलन

Principal Correspondent

Ranchi: कुछ ही दिनों में निर्वाचन आयोग (भारत) की ओर से लोकसभा चुनाव के लिए घोषणा होनी है. इसे देखते भाजपा अपनी तैयारियों को अंतिम मुकाम पर ले जा रही है. मिशन 2024 के लिए कमर कसा जा चुका है. झारखंड में सभी 14 सीटों पर जीत हासिल करने को रणनीतियों को अंतिम रूप दिया जाने लगा है. इस क्रम में अब रायशुमारी के आधार पर सभी सीटों के लिए कैंडिडेट के नाम तय कर लिए जाने की सूचना है. अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी इस रिपोर्ट के साथ 28 फरवरी से दिल्ली में जमे हुए हैं.

सूत्रों की मानें तो पार्टी तकरीबन सभी सीटों के लिए एक-एक नाम तय कर चुकी है. हालांकि हर सीट के लिए 1-2 नाम और भी विकल्प के तौर पर लिए हैं. वैसे तीन-चार सीटों पर चेहरों को बदलने की चर्चा है. इनमें धनबाद, लोहरदगा, राजमहल, जमशेदपुर जैसी सीटों पर ज्यादा चर्चा है.

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किन सीटों पर क्या है स्थिति

पिछले दिनों भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश चुनाव समिति की बैठक भी हुई थी. इसमें लोकसभा की सभी सीटों के अलावा राज्यसभा चुनाव के लिए भी संभावित नामों को लेकर चर्चा हुई. बताया जा रहा है कि इस बैठक के बाद अलग अलग सीटों के लिए जो नाम तय हुए, उसमें ज्यादातर सीटों पर पुराने चेहरे ही रिपीट होने हैं. रायशुमारी के आधार पर जो नाम फाइनल हुए, उसमें महिला, युवा, आदिवासी, ओबीसी, एससी जैसे चेहरों का संतुलन रखा गया.

इसके मुताबिक, गोड्डा में निशिकांत दुबे बढ़त बनाए हुए हैं. हालांकि उनके साथ पूर्व मंत्री राज पालिवार को भी रखा गया है. तमाम किंतु परंतु के बाद भी हजारीबाग में जयंत सिन्हा ही आगे हैं. खूंटी में इस बार भी केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा को ही आगे किया जाना है. पलामू में भी वर्तमान सांसद बीडी राम ही आगे चल रहे हैं. वैसे जवाहर पासवान और मनोज भूईयां का भी नाम रेस में है.

चतरा उस लोकसभा सीट में से है जहां दो दर्जन से अधिक नाम रेस में थे. पर रायशुमारी के बाद फिर से वर्तमान सांसद सुनील कुमार सिंह ही बढ़त बनाए हुए हैं. वैसे योगेंद्र प्रताप को भी दावेदार में रखा गया है. रांची में सांसद संजय सेठ रिपीट हो सकते हैं. उनके साथ रेस में प्रदीप वर्मा का भी नाम कहा जा रहा है. कोडरमा सीट से केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी फिर से चुनावी मैदान में दिखने वाली हैं. वैसे रविंद्र राय और प्रणव वर्मा का भी नाम लिया जा रहा है. जमशेदपुर में विद्युत वरण महतो के साथ युवा चेहरे और पूर्व विधायक कुणाल षाडंगी भी मजबूत दावेदारों में से हैं. दुमका में युवा और वर्तमान सांसद सुनील सोरेन ही बढ़त लेते दिख रहे हैं. पूर्व मंत्री लुईस मरांडी भी संभावित नामों में से हैं.

इन सीटों पर दिलचस्प तस्वीर

चूंकि पिछले ही दिनों सांसद गीता कोड़ा ने कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है. ऐसे में चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम) सीट से एक मजबूत आदिवासी और महिला चेहरे के तौर पर गीता की सीट तय दिख रही है. इससे पूर्व प्रशासनिक अधिकारी जेबी तुबिद को लेकर चर्चाएं इस सीट पर थीं. धनबाद सांसद पीएन सिंह को एज फैक्टर के चलते साइड किए जाने की बात है. इस पर विधायक राज सिन्हा को मजबूत दावेदार के तौर पर माना गया है. लोहरदगा सीट से सांसद सुदर्शन भगत को लेकर भी आशंका है. पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारी और रांची नगर निगम की पूर्व मेयर आशा लकड़ा और प्रदेश प्रवक्ता अरुण उरांव को इस सीट के लिए उत्तराधिकारी के तौर पर तय किये जाने की सूचना है.

गिरिडीह सीट से अभी आजसू पार्टी के सीपी चौधरी सांसद हैं. वैसे इस सीट पर भाजपा की ओर पूर्व सांसद रवींद्र पांडेय और विधायक ढुल्लू महतो ने भी अपनी दावेदारी पेश की है. संभव है कि लोकसभा चुनाव में अगर इस सीट पर आपसी सहमति किसी कारण से भाजपा-आजसू पार्टी में ना बने तो इसी साल के आखिर में होने वाले विधानसभा चुनाव में आजसू कुछ अतिरिक्त लाभ मांगे. पार्टी के सामने अब भी राजमहल सीट पर मजबूत कैंडिडेट उतारे जाने का चैलेंज है. यहां 2019 में हुए चुनाव में झामुमो के विजय हांसदा जीते थे. इस सीट के लिए अभी तक पूर्व विधायक ताला मरांडी के अलावा मिस्त्री सोरेन, शीला रानी हेंब्रम को लिस्ट में जगह दी गयी है.

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