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Muzaffarpur : सीबीआई ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड को लेकर एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया और उसे अदालत में पेश किया. अदालत ने आरोपी को चार दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया. मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के पूर्व कर्मचारी गौरव कुमार उर्फ मोटू को यहां गिरफ्तार करने के बाद शहर की विशेष पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अदालत में पेश किया गया.
विशेष पॉक्सो न्यायाधीश आर पी तिवारी ने मोटू को चार दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया। इसके साथ मामले में अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अदालत ने जांच एजेंसी को कुछ कंकालों के अवशेष फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की भी मंजूरी दे दी. ये अवशेष इस हफ्ते की शुरूआत में यहां एक श्मशानघाट में की गयी खुदाई में मिले थे.
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कुछ ही दिन पहले ही मिला था लड़की का कंकाल
केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने गुरूवार को ही उच्चतम न्यायालय को सूचित किया था कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में अनेक लड़कियों से कथित बलात्कार और उनके यौन शोषण के मामले की जांच के दौरान एक नाबालिग लड़की का कंकाल बरामद हुआ है.
न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ को जांच एजेन्सी ने बताया कि उसने आश्रय गृह में रहने वाली अनेक लड़कियों से निम्हांस के विशेषज्ञों की मदद से बातचीत की है. ब्यूरो ने कहा कि उसे जांच के दौरान सामने आये तथ्यों के आलोक में उसे इन लड़कियों से एक बार फिर बात करने के लिये कुछ और समय चाहिए.
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जांच ब्यूरो के वकील ने पीठ से कहा कि ये विशेषज्ञ उस अवसाद के पहलू को देख रहे थे जिससे इन लड़कियों को रूबरू होना पड़ा था और इस कवायद के अभी तक अच्छे नतीजे निकले हैं.
पीठ ने टिप्पणी की कि जांच और पुनर्वास के पहलुओं पर साथ साथ काम होना चाहिए. पीठ ने कहा कि हम सिर्फ जांच के पहलू पर ही गौर नहीं कर सकते. हमें पुनर्वास के पहलू पर भी ध्यान देना होगा. यह (पुनर्वास) जांच की तरह ही महत्वपूर्ण है.
जांच एजेन्सी की चल रही है जांच
इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहीं वकील अपर्णा भट्ट ने कहा कि जांच एजेन्सी की जांच चल रही है और वह इस मामले में गवाहों के बयान भी दर्ज कर रही है.
टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइसेंज के वकील ने कहा कि जांच महत्वपूर्ण चरण में है और इस मामले में नये तथ्य सामने आये हैं. उन्होंने कहा कि कई लड़कियां अभी भी अपघात (ट्रामा) से प्रभावित हैं. जांच एजेन्सी जांच कर रही है परंतु लड़कियों को अलग से निम्हांस की काउन्सलिंग की जरूरत है और उन्हें साक्ष्य के रूप में नहीं लिया जा सकता है.
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बिहार सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि इन लड़कियों के पुनर्वास की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए क्योंकि वे गंभीर अपघात के दौर से गुजरी हैं.