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खूंटीः इलाके में जोरदार वोटिंग का दिखायी दे रहा है मूड, शर्त है कि उम्मीदवार जमीन से जुड़ा और जुझारू हो

ग्राउंड जीरो से न्यूज विंग के वरीय संवाददाता प्रवीण कुमार की रिपोर्ट

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  • सरहुल के गीत और मांदर की थाप के साथ मस्त हैं ग्रामीण, लेकिन चुनाव की बेचैनी भी साथ-साथ

Ranchi:  रांची से 120 किलोमीटर दूर कोचांग व वीरबांकी का इलाका. खूंटी का बीहड़. घने जंगल, सिर्फ हवा के झोंकों की आवाज. पांच साल पहले इन इलाकों में वोट का नाम लेने की हिम्मत किसी में नहीं थी. लेकिन पांच साल बाद फिजां कुछ बदली है.

न्यूज विंग के वरीय संवाददाता प्रवीण कुमार ने इन वीहड़ों का करीब से मुआयना किया. वहां के बाशिंदों से चुनावी तपिश का हाल जाना और समझा. सफर की शुरूआत खूंटी के हांसदा इलाके से हुई. इस बीहड़ इलाके में पलाश के फूल सूख चुके हैं.

सखुआ के फूल निकल आये हैं. पूरे इलाके में मांदर की थाप गूंज रही है. सरहुल के गीत और नृत्य कदम-ताल कर रहे हैं. लेकिन चुनाव की सुगबुगाहट कहीं दिख नहीं रही. इस इलाके में चुनाव का प्रचार अब तक शुरू नहीं हुआ है. बीहड़ के बाशिंदों को पता नहीं है कि चुनाव कब होगा. महिलाएं और बच्चे महुआ चुनने में व्यस्त हैं.

वहां के बाशिंदे वन उत्पादों पर ही निर्भर हैं.  यह बात भी सामने आयी कि जल, जंगल, जमीन ही वहां के बाशिंदे के लिए सबसे ऊपर है. हालांकि कुछ लोगों से बात करने पर वोट देने की बेचैनी तो दिखी लेकिन दबी जुबां से.

हांसदा क्षेत्र वह इलाका है जहां मुंडा समुदाय के लोग ही रहते हैं. इसी इलाके में पत्थलगड़ी और सीएनटी-एपीटी संशोधन के खिलाफ उग्र आंदोलन हुआ था. यहीं पांच युवतियों के साथ दुष्कर्म का मामला प्रकाश में आया था.

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कोचांग के अधिकांश युवा कर चुके हैं पलायन

कोचांग वही बीहड़ इलाका है जो पत्थलगड़ी के कारण पूरे देश में चर्चा में आया. जब हांसदा इलाके से होते हुए  अपराह्न तीन बजे हम कोचांग पहुंचे, इससे पहले कई जगहों पर बच्चे और महिलाएं पालतू जानवरों के साथ जंगल के इलाके में नजर आये.

कुछ महिलाएं सिर पर महुआ की टोकरी लिये अपने घर की ओर जाती नजर आयीं. काफी आग्रह के बाद कुछ महिलाओं ने बात की. चुनाव के सवाल पर बिरसी मुंडा ने कहा कि गांव में कोई रोजी-रोजगार नहीं है. खेती-बारी और जंगल के उत्पादों से ही गुजारा होता है. एक किलो सूखा महुआ बेचेंगे तो 25 रुपये मिलेंगे. जंगल में मिलने वाले फल-फूल से ही साल के तीन महीने का गुजारा चलता है.

मनरेगा के बारे में पूछने पर कहती है कि एक बार डोभा खोदा गया,  उसी में काम मिला. गांव के अधिकांश युवा काम की तलाश में बेंगलुरू और चेन्नई चले गये. सबसे अहम बात जो सामने आयी वह है, इस पत्थलगड़ी वाले इलाके के अधिकांश युवा पलायन कर चुके हैं. विकास कार्य तो नहीं हुआ लेकिन कोचांग और कुरूगा में सीआरपीएफ की तैनाती जरूर कर दी गयी. जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है.

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कोचांग बाजार में मिले ग्राम प्रधान, कहा स्थिति खराब

कोचांग बाजार पहुंचने पर ग्राम प्रधान सुखराम मुंडा से मुलाकात हुई. बातचीत में कहा हमलोग ऐसे जनप्रतिनिधि का साथ देंगे जो पांचवीं अनुसूची और संविधान प्रदत्त आदिवासी अधिकारों का पालन करते हुए इलाके का विकास करे.

इस इलाके में शिक्षा की स्थिति काफी खराब है. सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है. स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. वोट बहिष्कार के मामले कहा कि इस इलाके में वोट बहिष्कार की बात नहीं है. हम लोग चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. वोट बहिष्कार की बात पूरी तरह से अफवाह है.

 

जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा करने वाले जनप्रतिनिधि को वोट देंगे  

कोचांग से निकलने के बाद बीरबांकी पहुंचे. शाम ढ़ल रही थी. बाजार में काफी गहमागहमी थी. आस-पास के दर्जनों गांव के लोग बाजार में खरीदारी करने पहुंचे थे. खरीदारी कर वे वापस अपने घर भी लौट रहे थे. बाजार से घर जाते हुए महिला भी सवारी गाड़ी में लटकी नजर आयी. वहां के बाशिंदों से चुनाव और इलाके की समस्याओं पर बात हुई.

ग्रामीणों का सरकारी व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के काम-काज के तरीके के प्रति आक्रोश नजर आया. पौलूस हेब्रोम ने चुनाव के सवाल पर कहा, चुनाव कब होगा, यह पता नहीं. लेकिन हमलोग अपनी बदहाली को बदलने के लिए वोट देंगे. इलाके में पेयजल की किल्लत है. ग्रामीण अपने जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा करने वाले जनप्रतिनिधि को ही अपना वोट देंगे.

रात के नौ बजे घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र अड़की पहुंचे

बीरबांकी से निकलने के बाद रात के करीब नौ बजे थे. कुछ युवा नजर आयेंं. काफी मशक्कत के बाद युवाओं ने अपना नाम बताया, लेकिन चुनाव पर बात करने से इंकार कर दिया. अविनाश नाम का युवा एक बुदबुदाया, सभी तो गरीबोंं को लूटने और झूठे वादे करने के लिए चुनाव में आते हैं. चुनाव जीत कर कोई विकास नहीं करता.

बस हमलोग अपना जल, जंगल और जमीन बचा रहे हैं. हमलोग किसी तरह जी-खा लेंगे. खूंटी लोकसभा क्षेत्र में आने वाले तमाड़ विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों से भी बात हुई. उन्होंने कहा कि मतदान करेंगे. भले ही ग्रामीणों को चुनाव की तरीख का पता नहींं. लेकिन यह साफ हो गया कि इलाके में धन बल पर वोट नहींं होगा.

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