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मॉब लिंचिंग मामलाः अलीमुद्दीन हत्याकांड के सजायाफ्ता की अपील पर बहस पूरी, फैसला सुरक्षित

Ranchi: रामगढ़ में हुए मॉब लिंचिंग मामले में अलीमुद्दीन की हत्या के सजायाफ्ता के मामले में बुधवार को सभी पक्षों की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में बहस पूरी हो गई. जिसके बाद कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया. सुनवाई के दौरान सभी प्रार्थी की ओर से खुद को निर्दोष बताया गया और कहा गया था कि उनके खिलाफ जो भी आरोप लगाया गया वह झूठा है. वही मृतक अलीमुद्दीन की पत्नी की ओर से कहा गया था कि इस घटना में इन सभी की संलिप्तता है. दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि इस मामले में अनुसंधान सही तरीके से किया गया है जिसके बाद अभियोजन पक्ष की की दलील सुनने के बाद ही निचली अदालत ने सभी अभियुक्तों को सजा सुनाई है.बीते 15 सितंबर को दीपक मिश्रा, विक्रम प्रसाद सहित सभी अपील कर्ता  की ओर से बहस पूरी हो गयी थी.

दीपक मिश्रा व अन्य की ओर से निचली अदालत द्वारा दी गयी सजा के खिलाफ दाखिल याचिका की सुनवाई सोमवार को झारखंड हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षतावाली खंडपीठ में हुई.  बता दें कि रामगढ़ कोर्ट ने 21 मार्च 2018 को 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनायी थी. हजारीबाग के मीट कारोबारी अलीमुद्दीन अंसारी की बीफ ले जाने के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में मृतक की पत्नी ने 12 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी थी. 16 मार्च 2018 को 12 में से 11 आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि एक आरोपी को नाबालिग होने के कारण उसका मामला जुवेनाइल बोर्ड में भेज दिया गया था.

जिन्हें अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा दी गयी थी उनमें छोटू वर्मा, दीपक मिश्रा और संतोष सिंह के अलावा भाजपा नेता नित्यानंद महतो, विक्की साव, सिकंदर राम, उत्तम राम, विक्रम प्रसाद, राजू कुमार, रोहित ठाकुर, और कपिल ठाकुर शामिल थे.

यह भी बता दें कि रामगढ़ जिले के मनुआ फुलसराय के रहने वाले अलीमुद्दीन की हत्या 29 जून 2017 को कर दी गयी थी. मारुति वैन से बीफ ले जाने के आरोप में भीड़ ने बाजार टांड़ स्थित गैस एजेंसी के पास अलीमुद्दीन की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

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